सीरिया में अब ट्रंप को ऐसा क्या मिल गया, जो व्हाइट हाउस में बुला रहे अल-कायदा के आतंकी को? जानें पूरा मामला

Ahmed Al-Sharaa Donald Trump Meeting: सीरिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ तब देखने को मिला, जब खबर आई कि सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (Ahmed al-Sharaa) नवंबर की शुरुआत में व्हाइट हाउस का दौरा करने जा रहे हैं.

What Trump got in Syria now that Al-Qaeda terrorist is inviting him to the White House
Image Source: Social Media/X

Ahmed Al-Sharaa Donald Trump Meeting: सीरिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ तब देखने को मिला, जब खबर आई कि सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (Ahmed al-Sharaa) नवंबर की शुरुआत में व्हाइट हाउस का दौरा करने जा रहे हैं. यह यात्रा न केवल सीरिया और अमेरिका के बीच संबंधों में एक नई शुरुआत का संकेत देती है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अल-शरा पहले अल-कायदा से जुड़े रहे हैं.

सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने रविवार को पुष्टि की कि राष्ट्रपति अल-शरा 10 नवंबर के आसपास वाशिंगटन का दौरा करेंगे. उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान “प्रतिबंधों में ढील, सीरिया के पुनर्निर्माण और दोनों देशों के बीच नई साझेदारी” पर चर्चा की जाएगी. अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैरक ने भी इसी यात्रा की पुष्टि की है, जिसे “कूटनीतिक संवाद की नई शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है.

अमेरिका और सीरिया के बीच नई शुरुआत?

यह पहला मौका होगा जब किसी सीरियाई राष्ट्रपति को औपचारिक रूप से व्हाइट हाउस आमंत्रित किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बैठक में सीरिया के पुनर्निर्माण, प्रतिबंधों की समीक्षा, और मध्य-पूर्व में स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है.

अहमद अल-शरा की सरकार ने बशर अल-असद को हटाने के बाद से सीरिया को वैश्विक मंच पर फिर से स्थापित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं. सितंबर 2025 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था, जहां उन्होंने कहा था कि “सीरिया अब आतंक और दमन के अतीत से बाहर आ चुका है और नए युग की ओर बढ़ रहा है.”

कौन हैं अहमद अल-शरा?

अहमद अल-शरा, जिन्हें दुनिया अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से जानती है, कभी अल-नुसरा फ्रंट नामक संगठन के संस्थापक रहे, जो अल-कायदा से संबद्ध था. बाद में 2016 में उन्होंने अल-कायदा से अलग होकर कई अन्य गुटों के साथ मिलकर तहरीर अल-शाम (HTS) नामक संगठन बनाया.

2024 में जब बशर अल-असद की सरकार को उखाड़ फेंका गया, तो अल-शरा सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में उभरे. तब से उन्होंने अपनी छवि एक “इस्लामी कट्टरपंथी से सुधारवादी राजनेता” के रूप में बदलने की कोशिश की है. उनका दावा है कि सीरिया का नया प्रशासन “राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय स्थिरता” के सिद्धांत पर काम कर रहा है.

अमेरिका की रणनीतिक दिलचस्पी

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के लिए सीरिया केवल एक भू-राजनीतिक मोर्चा नहीं, बल्कि ऊर्जा और सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है. सीरिया के तेल क्षेत्र और रूस-ईरान के प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है.

2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान अमेरिका ने “फ्री सीरियन आर्मी” जैसे विद्रोही गुटों को सीआईए ऑपरेशन टिम्बर साइकैमोर के तहत प्रशिक्षण और हथियार दिए थे. बाद में, 2014 में ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के नाम से अमेरिका ने वहां सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया, जिसका घोषित उद्देश्य ISIS से लड़ना था. लेकिन विश्लेषकों के अनुसार असली मकसद था रूस समर्थक असद शासन को कमजोर करना.

अमेरिका और अल-शरा की मुलाकात से उठे सवाल

व्हाइट हाउस की इस घोषणा के बाद अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहस शुरू हो गई है. एक ओर, ट्रंप प्रशासन इसे “नई शुरुआत और मध्य-पूर्व में स्थिरता” के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आलोचक कह रहे हैं कि “यह अमेरिका के अपने ही एंटी-टेररिज्म सिद्धांतों के खिलाफ कदम है.”

कई पश्चिमी विशेषज्ञों का कहना है कि वाशिंगटन का यह कदम क्षेत्रीय समीकरणों को बदल सकता है, खासकर तब जब ईरान और रूस जैसे देश सीरिया में अब भी सक्रिय हैं.

सीरिया की “रीबिल्ड स्ट्रैटेजी”

सीरिया की अंतरिम सरकार ने देश के पुनर्निर्माण के लिए एक “रीबिल्ड एंड रिकॉन्स्ट्रक्ट” अभियान शुरू किया है. इस योजना के तहत बमबारी से तबाह हुए शहरों, ऊर्जा संयंत्रों और अस्पतालों को फिर से खड़ा किया जा रहा है.

अहमद अल-शरा ने हाल ही में कहा था, “हमारा लक्ष्य परमाणु या सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय पुनर्निर्माण है.” सीरिया अब रूस, तुर्की और खाड़ी देशों से आर्थिक निवेश लाने की कोशिश कर रहा है.

यह भी पढ़ें- अजरबैजान को धूल चटाएगा आर्मेनिया! भारत से खरीदेगा SU-30MKI फाइटर जेट, जानें इसकी ताकत और खासियत