Russian Space Satellites: यूरोप के दो प्रमुख देशों, जर्मनी और ब्रिटेन, ने हाल ही में रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है. दोनों देशों का कहना है कि इन दो महाशक्तियों के उपग्रह लगातार पश्चिमी देशों के सैटेलाइट्स की निगरानी कर रहे हैं, जिससे न केवल सैन्य बल्कि नागरिक संचार प्रणालियों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है.
बीते कुछ महीनों में ब्रिटेन और जर्मनी के रक्षा अधिकारियों ने कई बार यह आरोप लगाया है कि रूसी उपग्रह बार-बार उनके सैटेलाइट्स का पीछा कर रहे हैं, उन्हें जैम (jam) कर रहे हैं और उनके संचालन में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप पैदा कर रहे हैं. इस बीच, अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों ने भी चेतावनी दी है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो दुनिया भर की संचार और सुरक्षा प्रणालियों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है.
“रूस की अंतरिक्ष गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा”
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बर्लिन में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि रूस की गतिविधियां, खासकर अंतरिक्ष क्षेत्र में, यूरोप और नाटो देशों के लिए एक “बुनियादी सुरक्षा चुनौती” बन चुकी हैं.
उन्होंने बताया कि हाल ही में रूस के दो टोही उपग्रहों (reconnaissance satellites) को जर्मनी और उसके सहयोगियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले दो इंटेलसैट (Intelsat) उपग्रहों के बेहद करीब मंडराते हुए देखा गया. इंटेलसैट एक प्रमुख वाणिज्यिक सैटेलाइट सेवा प्रदाता है, जिसका उपयोग अमेरिका और यूरोप की कई सरकारी एजेंसियां करती हैं.
पिस्टोरियस ने कहा कि रूस और चीन दोनों अपनी space warfare capabilities, यानी उपग्रहों को बाधित करने, उनकी निगरानी करने या नष्ट करने की क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रहे हैं. जर्मन सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष सुरक्षा कार्यक्रम में अरबों डॉलर का निवेश बढ़ाने की घोषणा की है.
यूके स्पेस कमांड ने भी जताई चिंता
ब्रिटेन की ओर से भी रूस की हरकतों पर चिंता जताई गई है. यूके स्पेस कमांड के प्रमुख मेजर जनरल पॉल टेडमैन ने कहा कि रूसी उपग्रह अंतरिक्ष में ब्रिटेन के सैटेलाइट्स के बेहद करीब पहुंचकर उनकी गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि रूसी सैटेलाइट्स पर लगे “ऑप्टिकल और रेडियो पेलोड” (payloads) ब्रिटिश सैटेलाइट्स से डेटा एकत्र करने और संचार संकेतों को बाधित करने में सक्षम हैं. टेडमैन के अनुसार, रूस पिछले कुछ वर्षों से अपनी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (Electronic Warfare) तकनीक को अत्यधिक उन्नत कर रहा है और यह क्षमता अब अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है.
उन्होंने यह भी कहा कि रूसी सैटेलाइट्स हर सप्ताह कई बार ब्रिटिश नेटवर्क्स को जाम करने का प्रयास करते हैं, जिससे न केवल रक्षा बल्कि नागरिक टेलीकॉम और GPS सेवाएं भी प्रभावित होती हैं.
वैश्विक विशेषज्ञों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन (RAND Corporation) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि संचार और नेविगेशन उपग्रहों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक स्तर पर कई सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.
इसमें शामिल हैं:
रिपोर्ट के अनुसार, अगर रूस और चीन ने इस क्षेत्र में और प्रगति की, तो वे भविष्य में नाटो देशों के संचार नेटवर्क को निष्क्रिय करने में सक्षम हो सकते हैं.
रूस-चीन की बढ़ती साझेदारी और यूक्रेन युद्ध की भूमिका
यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब रूस और चीन के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा होता जा रहा है. यूक्रेनी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि बीजिंग, मॉस्को की मदद करते हुए यूक्रेन के सीमावर्ती क्षेत्रों की सैटेलाइट निगरानी कर रहा है.
रूस के अंतरिक्ष कार्यक्रम में चीन की तकनीकी भागीदारी ने पश्चिमी देशों की चिंता और बढ़ा दी है. यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने कई बार सैटेलाइट जामिंग (satellite jamming) और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस का इस्तेमाल किया है, जिससे अमेरिकी कंपनी SpaceX और यूरोपीय सैटेलाइट सिस्टम्स को तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
नाटो की प्रतिक्रिया और संभावित खतरे
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि रूस अंतरिक्ष में ऐसे परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जो दुश्मन देशों के उपग्रहों को निष्क्रिय या नष्ट करने में सक्षम होंगे. हालांकि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सार्वजनिक रूप से इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि मॉस्को का अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने का कोई इरादा नहीं है.
लेकिन इस बीच, रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें सदस्य देशों से अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार विकसित न करने की अपील की गई थी. इस कदम ने पश्चिमी देशों के बीच संदेह और बढ़ा दिया है.
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