तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के दौरान एक बार फिर 'कामीकाजे डॉल्फिन' की चर्चा तेज हो गई है. सोशल मीडिया और कुछ विदेशी रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ईरान समुद्र में खास ट्रेनिंग वाली डॉल्फिन का इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि अब तक इस दावे का कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया है.
क्या है 'कामीकाजे डॉल्फिन'?
दावा किया जाता है कि इन डॉल्फिन को इस तरह ट्रेनिंग दी जाती है कि वे दुश्मन के युद्धपोत या बड़े जहाज के पास जाकर हमला कर सकें. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इनके शरीर पर विस्फोटक या समुद्री माइंस बांधी जा सकती हैं, जिससे जहाज को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सके.
लेकिन अब तक ऐसी किसी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी विश्वसनीय एजेंसी ने इस दावे को सही माना है.
अमेरिका में भी हुई थी चर्चा
इस मुद्दे ने उस समय ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, जब एक प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से 'कामीकाजे डॉल्फिन' को लेकर सवाल पूछा गया.
उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास इस तरह का कोई हथियार होने की जानकारी नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अमेरिका के अपने समुद्री कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.
कहां से शुरू हुई यह कहानी?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस कहानी की शुरुआत शीत युद्ध के समय से जुड़ी मानी जाती है.
उस दौर में सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने डॉल्फिन और सी-लायन जैसे समुद्री जीवों को सैन्य कामों के लिए ट्रेनिंग दी थी. इनका इस्तेमाल समुद्र के अंदर छिपी माइंस खोजने, दुश्मन के गोताखोरों का पता लगाने और समुद्री सुरक्षा जैसे कामों के लिए किया जाता था.
इन जानवरों को आत्मघाती हमला करने के लिए ट्रेनिंग देने की बात का कोई पक्का प्रमाण कभी सामने नहीं आया.
ईरान से जुड़ी अफवाह कैसे फैली?
साल 2000 के आसपास कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सोवियत संघ के टूटने के बाद ईरान ने रूस से सैन्य ट्रेनिंग प्राप्त डॉल्फिन खरीदी थीं. हालांकि इस दावे की भी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई.
अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यही पुरानी कहानी फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. कई लोग इसे सच मान रहे हैं, जबकि अब तक इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है.
सच क्या है?
फिलहाल 'कामीकाजे डॉल्फिन' को लेकर सामने आए दावों की पुष्टि नहीं हुई है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें चल रही हैं, लेकिन किसी भी दावे को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है.
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