क्या होता है IMEI नंबर, इससे कैसे ट्रैक हो जाता है आपका फोन, क्यों सख्त हुए इसके नियम? यहां जानें सबकुछ

हमारे सारे जरूरी काम अब हमारे स्मार्टफोन के माध्यम से होते हैं. ऐसे में अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो उस नुकसान से बचना बेहद जरूरी है. और यही काम करता है आपका IMEI नंबर. लेकिन क्या आप जानते हैं कि IMEI नंबर क्या होता है, कैसे काम करता है और क्यों सरकार ने इसके नियमों को और सख्त कर दिया है?

what an IMEI number is how it tracks devices government has tightened its regulations
Image Source: Social Media

IMEI Number: आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन सिर्फ एक डिवाइस नहीं बल्कि हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग, सोशल मीडिया, पर्सनल डाटा, हमारे सारे जरूरी काम अब हमारे स्मार्टफोन के माध्यम से होते हैं. ऐसे में अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो उस नुकसान से बचना बेहद जरूरी है. और यही काम करता है आपका IMEI नंबर. लेकिन क्या आप जानते हैं कि IMEI नंबर क्या होता है, कैसे काम करता है और क्यों सरकार ने इसके नियमों को और सख्त कर दिया है? आइए, विस्तार से जानते हैं.

IMEI नंबर क्या है?

IMEI (International Mobile Equipment Identity) एक 15 अंकों का यूनिक नंबर है, जो हर मोबाइल डिवाइस को दिया जाता है. इसे हम किसी तरह से बदल या कॉपी नहीं कर सकते, और यही कारण है कि यह मोबाइल डिवाइस की पहचान का सबसे सुरक्षित तरीका है. जैसे आपका आधार नंबर आपकी पहचान है, वैसे ही IMEI नंबर आपके फोन की पहचान है.

IMEI नंबर कैसे देखें?

  • अपने फोन के डायलर में *#06# डायल करें.
  • फोन की सेटिंग्स में 'About Phone' सेक्शन में जाएं.
  • नए फोन के बॉक्स पर दिए गए लेबल में IMEI नंबर होता है.
  • या फिर आपके फोन के रसीद या बिल पर भी यह नंबर छपा होता है.
  • इस नंबर को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, खासकर यदि कभी आपका फोन खो जाए या चोरी हो जाए.

IMEI नंबर से फोन कैसे ट्रैक होता है?

IMEI नंबर फोन का लोकेशन नहीं बताता, लेकिन यह मोबाइल नेटवर्क के साथ मिलकर फोन को ट्रैक करने में मदद करता है. जैसे ही आपका फोन किसी नेटवर्क से जुड़ता है, मोबाइल टावर IMEI नंबर को रीड करता है और उसकी लोकेशन को ट्रैक करता है. इस तरह, चोरी होने पर पुलिस और नेटवर्क कंपनियां IMEI के जरिए फोन की स्थिति और लोकेशन का पता लगाती हैं.

IMEI ब्लॉक क्यों किया जाता है?

भारत में, अगर कोई फोन चोरी हो जाता है, तो उसका IMEI नंबर CEIR (Central Equipment Identity Register) सिस्टम में ब्लॉक कर दिया जाता है. ब्लॉक होने के बाद, फोन में नई SIM डालकर उसे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इससे फोन के चोरी होने पर उसे आसानी से ट्रैक और रोक दिया जाता है.

IMEI नंबर में बदलाव क्यों है अपराध?

IMEI नंबर में छेड़छाड़ करना या उसे बदलना गंभीर अपराध है. सरकार ने इसे गैर-जमानती अपराध बना दिया है, जिससे अब किसी भी व्यक्ति के लिए यह काम करना नामुमकिन हो गया है. अवैध तरीके से IMEI बदलने का प्रयास करने पर 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा, डुप्लीकेट IMEI वाले फोन साइबर अपराधों और धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होते थे, जिससे सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं.

सरकार ने IMEI नियम क्यों कड़े किए हैं?

भारत में मोबाइल फोन चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं. चोर अक्सर IMEI बदलकर फोन बेच देते थे, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. इसके साथ ही फर्जी और क्लोन फोन भी बाजार में आसानी से बिक रहे थे. इसलिए सरकार ने IMEI से छेड़छाड़ करने पर सख्त कानून बनाए हैं, ताकि न केवल चोरी किए गए फोन का पता चल सके, बल्कि नकली डिवाइस के बाजार को भी नियंत्रित किया जा सके.

IMEI से संबंधित नियम और सावधानियां

  • जब आप नया फोन खरीदें, तो उसके IMEI नंबर को फोन और बॉक्स पर दिए गए IMEI से मिलाकर चेक करें.
  • सेकंड-हैंड फोन खरीदने से पहले IMEI की जांच जरूर करें.
  • IMEI नंबर किसी से शेयर न करें, खासकर यदि वह किसी का फोन खरीद रहे हों.
  • अगर आपका फोन चोरी हो जाए तो तुरंत उसे CEIR में ब्लॉक करवाएं.
  • IMEI बदलवाने की कोशिश न करें, यह एक अपराध है.

IMEI के नियमों का भविष्य

सरकार द्वारा IMEI नंबर के नियमों को कड़ा करने से न सिर्फ मोबाइल फोन की चोरी में कमी आएगी, बल्कि इससे साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी. अब किसी भी चोरी हुए फोन को ट्रैक किया जा सकता है और उसे ब्लॉक किया जा सकता है, जिससे अपराधियों के लिए बचना मुश्किल हो जाएगा.

ये भी पढ़ें: Meta का जबरदस्त फीचर! Facebook और Instagram पर पोस्ट चोरी हुई तो तुरंत मिलेगा अलर्ट, जानिए डिटेल्स