Benin Military Coup: पश्चिम अफ्रीका पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र रहा है. कई देशों में सैन्य सत्ता परिवर्तन होते रहे हैं, और अब इसी क्रम में बेनिन में भी एक बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. बीते शुक्रवार की शाम इस देश में अचानक ऐसा दृश्य सामने आया कि पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया.
बेनिन के राज्य टीवी पर प्रसारण के दौरान अचानक सैनिकों का एक समूह दिखाई दिया. हेलमेट और पूर्ण सैन्य वर्दी में उपस्थित इन सैनिकों ने कैमरे के सामने खुद को “मिलिट्री कमेटी फॉर रिफाउंडेशन” का प्रतिनिधि बताया. उन्होंने घोषणा की कि मौजूदा सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है और इसके साथ ही राष्ट्रपति एवं देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपदस्थ कर दिया गया है.
इन सैनिकों ने यह भी बताया कि कमेटी की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल पास्कल टिग्री संभालेंगे, जिन्हें उन्होंने बेनिन का नया नेता घोषित कर दिया. यह दृश्य न केवल देशवासियों बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चौंकाने वाला था, क्योंकि बेनिन को पिछले तीन दशकों से अपेक्षाकृत स्थिर लोकतंत्र माना जाता रहा है.
सरकारी प्रतिक्रिया और स्थिति पर नियंत्रण का दावा
टीवी पर सैनिकों की घोषणा सामने आने के कुछ घंटों बाद बेनिन सरकार सक्रिय हुई. गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह तख्तापलट की एक असफल कोशिश थी. अधिकारियों के अनुसार, सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व ने समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया और सरकार के खिलाफ की गई कार्रवाई को रोक दिया.
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह एक सीमित समूह का प्रयास था और सेना का अधिकांश हिस्सा लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खड़ा है. राजधानी कोटोनू सहित अन्य शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई और सार्वजनिक रूप से घोषणा की गई कि राज्य व्यवस्था सामान्य रूप से कार्य कर रही है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि, क्यों बढ़ा तनाव?
बेनिन के भीतर पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक वातावरण तनावपूर्ण रहा है. राष्ट्रपति पैट्रिस तालोन 2016 से सत्ता में थे और वे आने वाले वर्ष अपने पद से हटने वाले थे. इसी दौरान राष्ट्रपति पद के लिए नए दावेदारों की राजनीतिक स्पर्धा तेज हो चुकी थी. पूर्व वित्त मंत्री रोमुआल्ड वडाग्नी उनकी पसंद के संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे थे.
लेकिन विपक्षी दलों का आरोप था कि सरकार उनकी आवाज़ दबा रही है. यही कारण रहा कि विपक्षी उम्मीदवार रेनॉड एगोब्जो को चुनाव प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया गया, जिससे असंतोष गहरा गया. कुछ सप्ताह पहले संसद ने राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच से बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया, जिससे देश में राजनीतिक अविश्वास का माहौल और गंभीर हो गया. इसी उथल-पुथल के बीच अचानक टीवी पर सैनिकों के प्रकट होने ने बेनिन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए.
पश्चिम अफ्रीका में तख्तापलटों की बढ़ती श्रृंखला
बेनिन में यह तख्तापलट का प्रयास उस समय हुआ है जब पश्चिम अफ्रीका पहले ही लगातार सत्ता परिवर्तन की घटनाओं से जूझ रहा है. माली, नाइजर, बुर्किना फासो और गिनी में सेना पहले ही सरकारों को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर चुकी है.
हाल ही में गिनी-बिसाऊ में राष्ट्रपति उमारो एंबालो को चुनावी विवाद के बाद सत्ता से हटाया गया. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है. तख्तापलटों की इस श्रृंखला ने ECOWAS जैसे क्षेत्रीय संगठनों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
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