रनटाइम- 2 घंटे 44 मिनट
रेटिंग- 4
Welcome To The Jungle Review: अगर आप इस वीकेंड कोई ऐसी फिल्म ढूंढ रहे हैं जो आपको गहराई से सोचने पर मजबूर करे, तो भाई साहब... गलत थिएटर में आ गए हैं आप. अहमद खान के डायरेक्शन में बनी 'वेलकम टू द जंगल' में लॉजिक नाम की कोई चीज नहीं है, और सच कहें तो? फिल्म इसी वजह से देखने में मजेदार लगती है. यह फिल्म सीधे-सीधे आपको 2000 के दशक वाली क्रेजी और लाउड बॉलीवुड कॉमेडी के दौर में वापस ले जाती है.
क्या है कहानी?
फिल्म का प्लॉट काफी मजेदार और बॉलीवुड पर ही एक करारा मजाक है. एक शातिर अरबपति ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने के लिए जानबूझकर एक ऐसी महा-फ्लॉप फिल्म बनाने की प्लानिंग करता है, जिससे उसे बिजनेस में भारी नुकसान दिखे. इसके लिए वो इंडस्ट्री के सबसे अतरंगी और नकारा लोगों को हायर करता है.
लेकिन खेल तब पलट जाता है जब यह पूरी नौटंकी क्रू एक दूरदराज के गांव में फंस जाती है. वहां के भोले-भाले ग्रामीण और विलेन इस फिल्म की देशभक्ति वाली नकली स्क्रिप्ट को असली समझ लेते हैं. फिर क्या? असली बंदूकें तनी हुई हैं और हमारे एक्टर्स कैमरे के सामने वाली एक्टिंग को ही अपनी ढाल बना लेते हैं. कहानी में कब क्या हो जाए, इसका कोई नियम नहीं है, बस हर तीन मिनट में आपके सामने एक नया जोक और कन्फ्यूजन परोस दिया जाता है.
कास्ट का तड़का: किसने लूटी महफिल?
स्क्रीन पर एक साथ 34 एक्टर्स को देखना किसी मेले से कम नहीं है. इतनी बड़ी फौज में डायरेक्टर ने सबका इस्तेमाल बहुत ही चालाकी से किया है:खिलाड़ी कुमार की वापसी: अक्षय कुमार अपने सबसे पसंदीदा स्लैपस्टिक कॉमेडी जोन में वापस आ गए हैं और उन्हें देखकर लग रहा है कि उन्हें शूटिंग में कितना मजा आया है. कई सीन्स में तो वो सीधे कैमरे की तरफ देखकर ऑडियंस से पूछते हैं कि भाई, ऐसी मुसीबत में अचानक गाना कौन गाता है?
द ओजी कॉमेडी क्लब
सुनील शेट्टी का येड़ा अन्ना' वाला स्वैग आपको हंसने पर मजबूर कर देगा. वहीं परेश रावल, अरशद वारसी, जॉनी लीवर और राजपाल यादव की पलटन जब स्क्रीन पर आती है, तो थिएटर का माहौल खुद-ब-खुद खुशनुमा हो जाता है.
असली छुपा रुस्तम
जहां दिशा पाटनी और जैकलिन सिर्फ ग्लैमर का तड़का लगाती हैं, वहीं रवीना टंडन और अक्षय कुमार की पुरानी 90s वाली केमिस्ट्री के इनसाइड जोक्स कमाल के हैं. लेकिन बाजी मारी है सीनियर एक्टर्स ने. फरीदा जलाल जिस मासूमियत से बिलकुल बकवास डायलॉग्स बोलती हैं, वो लाजवाब है. वहीं किरण कुमार आम बातचीत में भी ऐसी भारी-भरकम उर्दू झाड़ते हैं कि वो तुरंत एक मीम-मटेरियल बन जाते हैं.
फाइनल वर्डिक्ट: देखें या छोड़ें?
'वेलकम टू द जंगल' एक साफ-सुथरी, लाउड और पूरी तरह से पैसा वसूल फैमिली एंटरटेनर है. यह फिल्म आपसे कोई बड़ा साहित्यिक वादा नहीं करती, बस इतना कहती है कि थिएटर में आइए और खुलकर हंसिए. अगर आप इस हफ्ते रोजमर्रा के तनाव से दूर होकर सिर्फ और सिर्फ मजे करना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके वीकेंड का परफेक्ट प्लान है.
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