सऊदी अरब और यूएई के बीच शुरू हुई खुली जंग, लेकिन यमन की धरती पर क्यों हो रहा खून-खराबा? जानें वजह

Saudi-UAE Tension: यमन में चल रहे लंबे और जटिल संघर्ष ने एक बार फिर हिंसक मोड़ ले लिया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को यूएई समर्थित Southern Transitional Council (STC) के ठिकानों पर बमबारी की, जिससे कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों की मौत हो गई.

war erupts between Saudi Arabia and UAE 20 dead so far
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Saudi-UAE Tension: यमन में चल रहे लंबे और जटिल संघर्ष ने एक बार फिर हिंसक मोड़ ले लिया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को यूएई समर्थित Southern Transitional Council (STC) के ठिकानों पर बमबारी की, जिससे कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों की मौत हो गई. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब संयुक्त अरब अमीरात ने यमन से अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त करने का फैसला लिया था. आइए जानते हैं कि यमन में यह संघर्ष क्यों बढ़ रहा है और इसके पीछे की राजनीति क्या है.

सऊदी गठबंधन का हवाई हमला और यमन में छाया डर

हवाई हमले हद्रामौत प्रांत के सेइयून और अल-खाशा क्षेत्रों में किए गए, जहां सैन्य ठिकानों और एक हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया. इन हमलों के कारण क्षेत्र में हवाई गतिविधियाँ ठप हो गईं, और कई घंटों तक कोई भी विमान उड़ान नहीं भर सका. यह स्थिति नागरिकों के लिए बेहद भयावह थी, और पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया. STC के अधिकारियों ने पुष्टि की कि मारे गए सभी लड़ाके थे, जो इन ठिकानों पर तैनात थे. यह हमला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि यह पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सीधे तौर पर STC के ठिकानों पर किया गया है.

यूएई की वापसी और बदलता समीकरण

यूएई ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसने यमन से अपनी अंतिम सैन्य टुकड़ी को वापस बुला लिया है. इस फैसले के बाद से यमन में स्थिति और अधिक जटिल हो गई है. संयुक्त अरब अमीरात का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है. हालांकि, इससे पहले मुकल्ला बंदरगाह पर हुए हमले को लेकर भी विवाद पैदा हुआ था, जिसमें कथित रूप से हथियारों की खेप को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था. यूएई ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि वह केवल एक वाहन की खेप को निशाना बना रहे थे, न कि किसी सैन्य सामग्री को.

STC का विरोध और सऊदी गठबंधन की प्रतिक्रिया

Southern Transitional Council के नेताओं ने सऊदी समर्थित बलों पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सैन्य ठिकानों को शांतिपूर्वक अपने नियंत्रण में लेने की बात की गई थी, लेकिन इसके ठीक बाद हवाई हमले कर दिए गए. STC के एक प्रवक्ता ने इसे अपनी अस्तित्व की लड़ाई करार देते हुए कहा कि वे कट्टरपंथ और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं. वहीं, सऊदी समर्थित प्रशासन ने इसे केवल सैन्य ठिकानों पर कब्जा करने का अभियान बताया और कहा कि इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक या सामाजिक समूह को निशाना बनाना नहीं है. सऊदी सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर STC ने अपने लड़ाके हटाने में देरी की, तो हमले और तेज हो सकते हैं.

संघर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ और क्षेत्रीय राजनीति

यमन का गृहयुद्ध करीब एक दशक से जारी है, और यह संघर्ष केवल एक देश के भीतर की लड़ाई नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीति का भी हिस्सा बन चुका है. सऊदी अरब और यूएई ने अलग-अलग स्थानीय गुटों का समर्थन किया है, जबकि उत्तर यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही अब भी मजबूत स्थिति में हैं. दक्षिणी और पूर्वी यमन में, सत्ता की लड़ाई जारी है, और यही कारण है कि इन क्षेत्रों में हिंसा बढ़ रही है.

यमन का संकट इस समय केवल सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति, शक्ति संघर्ष और बाहरी ताकतों के प्रभाव का भी परिणाम है. फिलहाल यह संघर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि यमन की स्थिरता और शांति की राह बहुत कठिन है, और इसमें बहुत सारे हितों का टकराव हो रहा है.