दिल्ली MCD के 12 वार्डों में उपचुनाव को लेकर वोटिंग कल, 580 पोलिंग स्टेशन पर लाखों वोटर करेंगे मतदान

MCD by-elections Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) की 12 खाली सीटों पर होने वाले उपचुनाव राजधानी की राजनीतिक हलचल को नई दिशा देने वाले हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस चुनाव को प्रतिष्ठा और शक्ति परीक्षण की तरह देख रही हैं. 

Voting tomorrow by-elections 12 wards Delhi MCD lakhs voters cast their votes 580 polling stations
Image Source: ANI/ File

MCD by-elections Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) की 12 खाली सीटों पर होने वाले उपचुनाव राजधानी की राजनीतिक हलचल को नई दिशा देने वाले हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस चुनाव को प्रतिष्ठा और शक्ति परीक्षण की तरह देख रही हैं. 

दोनों दल वार्ड-स्तर पर पूरी ताकत झोंक चुके हैं, क्योंकि उपचुनाव के नतीजे सीधे तौर पर आने वाले बड़े निगम चुनावों की रणनीति पर असर डालेंगे. कांग्रेस भी इस चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, जबकि कुछ वार्डों में छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी मुकाबले को और रोचक बना रही है.

उपचुनाव का राजनीतिक महत्व

इन उपचुनावों को आने वाले निगम चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. बीजेपी दिल्ली में जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं आम आदमी पार्टी निगम में अपने प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए आक्रामक प्रचार कर रही है. कांग्रेस उन वार्डों में ज्यादा उम्मीद कर रही है जहां उसके पारंपरिक वोट अब भी प्रभावी हैं.

माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर मतों का विभाजन परिणामों को अप्रत्याशित दिशा दे सकता है, और यही वजह है कि सभी दल रणनीति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

वोटर प्रोफाइल और कुल मतदाता

चुनाव आयोग के अनुसार इन 12 वार्डों में 6,98,751 लोग मतदान करेंगे. मतदाताओं की संख्या चुनाव की गंभीरता को दर्शाती है. इस उपचुनाव में शामिल मतदाता वर्ग का स्वरूप विविध है, जनसंख्या के लिहाज से पुरुष और महिला मतदाताओं के अनुपात में मामूली अंतर है, जबकि पहली बार वोट डालने वाले युवाओं की संख्या भी उल्लेखनीय है. इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों और थर्ड जेंडर मतदाताओं के लिए विशेष प्रबंधन करने की तैयारी की जा चुकी है.

मतदान केंद्र और प्रमुख वार्ड

पूरी चुनाव प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए 580 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं. इनमें से सबसे अधिक 55 केंद्र शालीमार बाग-बी वार्ड में स्थित हैं. यह वही वार्ड है जिसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले प्रतिनिधित्व करती थीं, और इसी कारण यह राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रशासन मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है, जिससे मतदान शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके.

सीटें क्यों हुईं खाली?

इन उपचुनावों का कारण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना खुद चुनाव. बारह में से 11 वार्ड खाली इसलिए हुए क्योंकि उनके पार्षद 2025 के विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बन गए थे. द्वारका-बी सीट इसलिए रिक्त हुई क्योंकि पार्षद कमलजीत सहरावत लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गईं. 

इसी प्रकार शालीमार बाग-बी की सीट मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विधायक बनने के बाद खाली होने के कारण चुनाव में शामिल हुई. इस परिवर्तन के बाद कई वार्डों में स्थानीय नेतृत्व का खालीपन दिखाई दिया, जिसे भरने की जरूरत अब उपचुनाव पूरा करेगा.

दलों की स्थिति और चुनावी रणनीति

AAP अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था और स्थानीय सेवाओं को प्रमुख मुद्दा बनाकर जनता से समर्थन मांग रही है. BJP राष्ट्रीय योजनाओं, कानून व्यवस्था और अपने पिछले निगम कार्यकाल के अनुभवों को सामने रखकर मतदाताओं को आकर्षित कर रही है. कांग्रेस का प्रयास उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां वह पारंपरिक रूप से मजबूत रही है या जहां त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है.

यह भी पढ़ें- इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे किदांबी श्रीकांत, 9 साल बाद फिर से इतिहास रचने का मौका