Morocco GEN Z Protest: जब देश की युवा पीढ़ी सवाल पूछने लगे, तो सत्ता की नींव हिलने लगती है. मोरक्को इस समय कुछ ऐसा ही देख रहा है, जहां ‘जेन Z 212’ नाम से शुरू हुआ युवा आंदोलन अब राजधानी रबात से लेकर तांगियर और माराकेश जैसे बड़े शहरों की सड़कों तक फैल चुका है.
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और सरकार की फिजूलखर्ची के खिलाफ उठती यह आवाज अब एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी असंतोष का प्रतीक बन चुकी है. अरब दुनिया में एक बार फिर सड़कों पर लोकतंत्र, जवाबदेही और न्याय की मांग गूंज रही है, और इस बार अगुआई कर रही है जनरेशन Z, यानी वो पीढ़ी जो सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है और बदलाव को सिर्फ सपना नहीं, हक समझती है.
मूल कारण: बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और असमानता
मोरक्को की आधी से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है. लेकिन इस जनसांख्यिकीय ताकत को ना शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं, ना रोजगार. 15-24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 36% तक पहुंच गई है, जो इन विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण बन चुकी है.
सरकार के प्रति यह गुस्सा तब और बढ़ गया जब सामने आया कि देश विश्व कप की तैयारियों के लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करने जा रहा है, वो भी ऐसे वक्त में जब अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है.
'स्टेडियम नहीं, रोटी चाहिए'
3.7 करोड़ की आबादी वाले मोरक्को में जहां लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं, वहां सात नए स्टेडियमों का निर्माण और सात पुराने स्टेडियमों का नवीनीकरण करने का फैसला आग में घी डालने जैसा रहा. युवाओं का सवाल है, “क्या फुटबॉल के नाम पर हमारे भविष्य को गिरवी रखा जाएगा?”
राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसे का संकट
प्रधानमंत्री अजीज अखन्नौच, जो देश के सबसे अमीर कारोबारियों में से एक हैं, और उनके स्वास्थ्य मंत्री अमीन तहरौई को लेकर प्रदर्शनकारियों में गहरी नाराजगी है. युवाओं का आरोप है कि सत्ता और कारोबार की मिलीभगत से जनता का धन चंद लोगों के हाथों में सिमट गया है.
सरकार ने जैसे-तैसे बातचीत की पेशकश की और कुछ अस्थायी घोषणाएं भी कीं, जैसे अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने और नई चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने की बात, लेकिन इन कदमों को युवा वर्ग ने "अस्थायी मरहम" करार दिया है.
एक कोड से आंदोलन तक
‘जेन Z 212’ कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और डिजिटल आंदोलन है, जो मोरक्को के अंतरराष्ट्रीय डायलिंग कोड ‘ 212’ से जुड़कर एक राष्ट्रीय पहचान बन चुका है. इस नाम ने न केवल विरोध को संगठित किया, बल्कि देशभर के युवाओं को जोड़ने वाला एक प्रतीक भी बन गया.
मेडागास्कर के घटनाक्रम से बढ़ा सरकार का डर
बीते हफ्ते मेडागास्कर में सरकार के पतन के बाद मोरक्को में यह डर गहराता जा रहा है कि कहीं यही लहर यहां भी न पहुंच जाए. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने युवाओं की आवाज़ को नजरअंदाज़ किया, तो यह अरब स्प्रिंग 2.0 का आगाज़ भी बन सकता है, इस बार मोरक्को से.
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