Vijayadashami 2026: दिल्ली से मुंबई तक, दशहरे की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? यहां देखें शहरवार टाइमिंग

Vijayadashami 2026: दशहरे का त्योहार सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन जीवन में नई शुरुआत करने, अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है.

Vijayadashami 2026 City Wise Dussehra Puja Muhurat Timings
AI Generated

Vijayadashami 2026: दशहरे का त्योहार सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन जीवन में नई शुरुआत करने, अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है. इस साल विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर धर्म की स्थापना की थी. यही वजह है कि इस दिन पूजा-पाठ से लेकर शस्त्र पूजन तक का विशेष महत्व माना जाता है.

हालांकि, दशहरे की पूजा के लिए शुभ समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता. दिल्ली, नोएडा, मुंबई, जयपुर और कोलकाता जैसे शहरों में विजय मुहूर्त की टाइमिंग में अंतर देखने को मिलेगा. ऐसे में अगर आप भी दशहरा पूजन की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने शहर का शुभ मुहूर्त पहले ही जान लेना जरूरी है.

दशमी तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी. हालांकि, उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा.

इस दिन विजय मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों और विजय से जुड़े अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है. मां अपराजिता की पूजा और शस्त्र पूजन के लिए भी इस समय को महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • विजयादशमी: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
  • दशमी तिथि प्रारंभ: दोपहर 12:50 बजे, 20 अक्टूबर
  • दशमी तिथि समाप्त: दोपहर 2:11 बजे, 21 अक्टूबर
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
  • अपराजिता पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक
  • रावण दहन का सामान्य समय: शाम 5:47 बजे से रात 8:21 बजे तक

किस शहर में कब करें दशहरा पूजा?

विजयादशमी के दिन पूजा का शुभ समय स्थान के अनुसार बदलता है. इसलिए दूसरे शहर का मुहूर्त देखकर पूजा करने के बजाय अपने शहर की स्थानीय टाइमिंग को ध्यान में रखना चाहिए. 20 अक्टूबर 2026 के लिए प्रमुख शहरों में विजय मुहूर्त इस प्रकार रहेगा.

दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में विजय मुहूर्त

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले श्रद्धालु दोपहर के समय विजयादशमी की विशेष पूजा कर सकते हैं. दिल्ली में विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा. वहीं, नोएडा में यह समय दोपहर 1:59 बजे से 2:44 बजे तक और गुरुग्राम में दोपहर 2:00 बजे से 2:46 बजे तक रहेगा.

मुंबई, पुणे और अहमदाबाद में पूजा का समय

महाराष्ट्र और गुजरात के प्रमुख शहरों में विजय मुहूर्त दिल्ली की तुलना में थोड़ा देर से रहेगा. मुंबई में दोपहर 2:19 बजे से 3:06 बजे तक, पुणे में दोपहर 2:16 बजे से 3:02 बजे तक और अहमदाबाद में दोपहर 2:20 बजे से 3:06 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा.

बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में शुभ मुहूर्त

दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में भी विजयादशमी की पूजा के लिए अलग-अलग समय निर्धारित है. बेंगलुरु में दोपहर 2:02 बजे से 2:49 बजे तक, चेन्नई में दोपहर 1:52 बजे से 2:39 बजे तक और हैदराबाद में दोपहर 1:57 बजे से 2:44 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा.

कोलकाता, जयपुर और चंडीगढ़ में कब करें पूजा?

कोलकाता में विजय मुहूर्त दोपहर 1:17 बजे से 2:03 बजे तक रहेगा. जयपुर में दोपहर 2:06 बजे से 2:51 बजे तक और चंडीगढ़ में दोपहर 2:00 बजे से 2:46 बजे तक पूजा का शुभ समय है. इन समयों को ध्यान में रखकर श्रद्धालु अपने पूजन की तैयारी कर सकते हैं. स्थानीय पंचांग और परंपराओं के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है.

दशहरे पर कैसे करें भगवान राम और मां दुर्गा की पूजा?

विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा करने की परंपरा है. इसके अलावा कई जगहों पर मां अपराजिता, शमी वृक्ष और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा भी की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इन अनुष्ठानों के जरिए लोग सुख-समृद्धि, सफलता और जीवन में विजय की कामना करते हैं.

पूजा के लिए सबसे पहले घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद दीपक जलाकर उन्हें फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करें. श्रद्धा के साथ आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.

शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा का महत्व

दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी काफी पुरानी है. इस दिन लोग अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ-साथ कामकाज में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण वस्तुओं की पूजा करते हैं. इसके लिए उन्हें साफ करके रोली, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं. आज के समय में कई लोग अपने वाहन, औजार, कलम और लैपटॉप जैसी कार्य से जुड़ी वस्तुओं का भी पूजन करते हैं.

वहीं, शमी वृक्ष की पूजा को भी विजयादशमी पर विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता के अनुसार, शमी की पूजा करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने और सफलता प्राप्त करने की कामना की जाती है. इस दिन शमी के पत्तों को शुभता का प्रतीक मानकर एक-दूसरे को देने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है.

दशहरे पर रावण दहन कब होगा?

विजयादशमी के अवसर पर शाम को रावण दहन किया जाता है. यह परंपरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की याद दिलाती है और बुराई का अंत होने का प्रतीक मानी जाती है. उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, रावण दहन के लिए सामान्य समय शाम 5:47 बजे से रात 8:21 बजे तक बताया गया है. हालांकि, अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियों और स्थानीय आयोजकों के कार्यक्रम का समय अलग हो सकता है. इसलिए रावण दहन देखने जाने से पहले अपने क्षेत्र के आयोजन का समय जरूर जांच लें. दशहरे का संदेश यही है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन की चुनौतियों का सामना किया जाए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

ये भी पढ़ें: रावण के 10 सिर सिर्फ अहंकार नहीं, इन 10 बुराइयों के हैं प्रतीक! दशहरा पर क्यों जलाया जाता है पुतला?