भारत के FF Bot ने पोखरण में दिखाई अपनी ताकत, 48°C की गर्मी में हर चुनौती से निपटने को रहेगा तैयार

पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर में 12 मई 2026 को अधिकतम तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उस दिन यह राज्य का सबसे अधिक तापमान था.

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पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर में 12 मई 2026 को अधिकतम तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उस दिन यह राज्य का सबसे अधिक तापमान था. फलोदी में पारा 46.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि जैसलमेर और बीकानेर में भी तापमान 45 डिग्री के पार चला गया.

पश्चिमी सीमा पर स्थित कई एयरबेस और ठिकानों को पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 और 8 मई 2025 को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी. इनमें फलोदी, उत्तरलाई, नाल, भुज, आदमपुर और बठिंडा जैसे स्थान शामिल हैं. ऐसे ठिकानों पर आग लगने की स्थिति में उसे जल्द बुझाना और हवाई संचालन दोबारा शुरू करना बेहद जरूरी होता है.

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत में बना FF Bot फायरफाइटिंग रोबोट तैयार किया गया है. इसे अहमदाबाद के पास चांगोदर स्थित स्वदेशी एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है. यह रोबोट iDEX पहल के तहत चुना गया है. इसका परीक्षण पोखरण में किया गया, जो थार रेगिस्तान के इसी गर्म क्षेत्र में स्थित है.

भीषण गर्मी में काम करने की क्षमता

इस रोबोट के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भीषण गर्मी है. स्वदेशी एंटरप्राइज कंपनी करीब चार दशकों से आग बुझाने और वाटर-मिस्ट सिस्टम पर काम कर रही है. कंपनी ने 2017 से फायरफाइटिंग रोबोट बनाना भी शुरू किया था.

FF Bot में एक खास कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जो इसे आग के पास काम करने में मदद करता है. रोबोट के वायरलेस सिस्टम बनाने वाली कंपनी की ओर से प्रकाशित एक केस स्टडी के अनुसार, लगातार कूलिंग की मदद से इसका बाहरी आवरण 800 से 900 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन कर सकता है. इस दौरान यह प्रति मिनट 300 लीटर पानी भी छोड़ सकता है.

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रोबोट के लिए बाहरी मौसम के तापमान की अधिकतम सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. इसलिए राजस्थान में दर्ज 48.3 डिग्री सेल्सियस को उस क्षेत्र की गर्म जलवायु के उदाहरण के तौर पर समझना चाहिए, न कि रोबोट की आधिकारिक तापमान क्षमता के रूप में.

ऊबड़-खाबड़ जमीन और मलबे में भी काम करने की क्षमता

दूसरी बड़ी चुनौती रेगिस्तान की जमीन और आग लगने के बाद फैला मलबा है. 27 फरवरी 2026 को पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित अभ्यास वायु शक्ति के दौरान FF Bot का परीक्षण किया गया. इस दौरान आग, मलबे और ऊबड़-खाबड़ जमीन जैसी परिस्थितियों में इसकी क्षमता परखी गई.

रोबोट में छह मोटर से चलने वाले पहिए और सस्पेंशन सिस्टम दिया गया है. इसकी मदद से यह खराब रास्तों पर चल सकता है और आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाली पानी से भरी भारी पाइप को खींच सकता है. कंपनी के अनुसार, यह पांच टन तक वजन वाले वाहन को भी आग के खतरे वाले इलाके से बाहर खींचने में सक्षम है. इसमें गति को जरूरत के अनुसार नियंत्रित करने की सुविधा भी है. इससे रोबोट मलबे के बीच आगे बढ़ सकता है और एयरबेस के हैंगर या स्टोर जैसे संकरे रास्तों में भी मुड़ सकता है.

धुएं के बीच भी आग के स्रोत का पता लगाने में मदद

आग लगने के दौरान धुआं इतना घना हो सकता है कि सामने की चीजें दिखाई देना मुश्किल हो जाता है. रात के समय या कम रोशनी में यह चुनौती और बढ़ जाती है. वायु शक्ति 2026 के दौरान कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में भी FF Bot का परीक्षण किया गया. इसमें सामान्य कैमरों के साथ थर्मल कैमरे भी लगे हैं. ये कैमरे गर्मी के आधार पर आग के आसपास मौजूद गर्म हिस्सों का पता लगाने में मदद करते हैं.

रोबोट में कैमरों को अलग-अलग दिशाओं में घुमाने की सुविधा, अतिरिक्त लाइट और एक विंच भी दिया गया है. इनकी मदद से ऑपरेटर दूर बैठकर धुएं के बीच आग के स्रोत का पता लगा सकते हैं और स्थिति के अनुसार रोबोट को नियंत्रित कर सकते हैं.

ऑपरेटर की सुरक्षा और जंग से बचाव पर भी ध्यान

आग बुझाने के दौरान इंसानों को सुरक्षित दूरी पर रखना बेहद जरूरी होता है. FF Bot को इस तरह बनाया गया है कि ऑपरेटर आग के सीधे खतरे वाले क्षेत्र से बाहर रहकर इसे चला सकें. इसके लिए एक कंट्रोल स्टेशन दिया गया है, जिसमें बड़ी टचस्क्रीन और जॉयस्टिक की मदद से रोबोट को नियंत्रित किया जाता है. रोबोट के वायरलेस सिस्टम की कंपनी की केस स्टडी के अनुसार, इसकी वायरलेस रेंज कम से कम 100 मीटर है. इससे ऑपरेटर को आग के काफी करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

इसके शरीर को बनाने में स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया गया है. यह सामग्री जंग से बचाव में मदद करती है. रेगिस्तान की रेत, समुद्र के किनारे की नमी और आग बुझाने में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक फोम जैसी परिस्थितियों में यह विशेषता उपयोगी साबित हो सकती है.

इस रोबोट का इस्तेमाल केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है. बिजलीघरों, हवाई अड्डों, ईंधन भंडारण केंद्रों और आपदा राहत कार्यों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है. कंपनी के अनुसार, विशाखापत्तनम की एक रिफाइनरी में लगी बड़ी आग के दौरान भी इस रोबोट का इस्तेमाल किया जा चुका है.

iDEX से मिली पहचान, भारतीय वायुसेना के लिए भी अहम

FF Bot को भारत सरकार की रक्षा नवाचार पहल iDEX के तहत महत्वपूर्ण पहचान मिली है. यह DISC-7 श्रेणी के तहत Acceptance of Necessity यानी खरीद की जरूरत की औपचारिक स्वीकृति पाने वाला पहला SPRINT मामला था. इसे 2023 में यह स्वीकृति मिली थी. 30 जून 2026 तक की iDEX खरीद आदेश सूची में भी इसका नाम सबसे ऊपर दर्ज था. कंपनी के मुताबिक, जनवरी 2026 में सामने आए भारतीय वायुसेना के आपातकालीन खरीद आदेश के तहत 80 रोबोट की आपूर्ति का काम निर्धारित 12 महीने की समयसीमा के बजाय 11 महीने में पूरा कर लिया गया.

यह रोबोट ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है, जब सैन्य ठिकानों पर आग लगने के बाद नुकसान कम करना और संचालन जल्द बहाल करना जरूरी होता है. हालांकि, इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन करते समय कंपनी की ओर से दी गई जानकारी, परीक्षण के नतीजों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तकनीकी विवरणों को अलग-अलग समझना भी जरूरी है.