ट्रेन में सफर करते समय अगर आप भी मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो, रील या गाने देखते-सुनते हैं, तो सावधान हो जाइए. ऐसा करने पर दूसरे यात्री आपके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं और रेलवे आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. दक्षिण रेलवे ने ट्रेन और रेलवे स्टेशन पर तेज आवाज में मोबाइल चलाने वाले यात्रियों को लेकर सख्ती के निर्देश दिए हैं.
रेलवे का कहना है कि मोबाइल के स्पीकर पर तेज आवाज में वीडियो या गाने चलाने से आसपास बैठे यात्रियों को परेशानी होती है. इससे बचने के लिए यात्रियों को नियमों की जानकारी दी जाएगी. साथ ही, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी की जा सकती है.
1000 रुपये तक जुर्माना, कार्रवाई भी
दक्षिण रेलवे ने अपने सभी डिवीजनों को भेजे सर्कुलर में कहा है कि ट्रेन और स्टेशनों पर मोबाइल से तेज आवाज में वीडियो और संगीत चलाने की आदत बढ़ रही है. इससे दूसरे यात्रियों को परेशानी होती है और सफर का माहौल भी खराब होता है.
रेलवे के निर्देशों के मुताबिक, ऐसे मामलों में दोषी यात्री पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर यात्री को ट्रेन के कोच से उतारने की कार्रवाई भी की जा सकती है. अगर कोई यात्री इस दौरान हंगामा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
रेलवे ने किस कानून का दिया हवाला?
दक्षिण रेलवे ने अपने सर्कुलर में रेलवे अधिनियम की धारा 142 का जिक्र किया है. इसके तहत संबंधित अधिकारी तय नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं. टिकट जांच करने वाले कर्मचारी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं. रेलवे बोर्ड को भी इसकी जानकारी दी गई है.
रेलवे ने जुलाई 2012 में जारी पुराने निर्देशों का भी हवाला दिया है. उस समय ट्रेन में तेज आवाज में मोबाइल पर बात करने और आपत्तिजनक रिंगटोन बजाने जैसी आदतों पर चिंता जताई गई थी. अब वीडियो और रील देखने का चलन बढ़ने के बाद रेलवे ने यात्रियों को फिर से नियमों के प्रति जागरूक करने का फैसला किया है.
हिंदी समेत कई भाषाओं में चलेगा अभियान
दक्षिण रेलवे ने अपने डिवीजनों से कहा है कि स्टेशनों और ट्रेनों में अनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को नियमों की जानकारी दी जाए. यह अभियान हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में चलाया जाएगा. यात्रियों से अपील की जाएगी कि वे तेज आवाज में वीडियो या गाने न चलाएं और जोर-जोर से बात करने से भी बचें.
सार्वजनिक जगहों पर दूसरों को परेशान करने से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 का भी जिक्र आता है. हालांकि, किसी मामले में कौन-सा कानून लागू होगा, यह घटना की स्थिति और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा.
रेलवे की इस पहल का मकसद यात्रियों को सफर के दौरान शोर-शराबे से राहत देना है. ऐसे में ट्रेन में मोबाइल पर वीडियो, रील या गाने सुनते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा, ताकि दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो.