India Vs Pakistan Oxford Union Debate: ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी में हाल ही में भारत और पाकिस्तान से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली. इस डिबेट में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व मुंबई के छात्र विरांश भानुशाली ने किया, जबकि पाकिस्तानी पक्ष की ओर से मूसा हर्राज शामिल हुए.
यह बहस 27 नवंबर को आयोजित हुई थी, लेकिन इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. डिबेट का विषय था— ‘India’s Policy Towards Pakistan is a Populist Strategy Sold as Security Policy’
पाकिस्तान पर आरोप और भारत की नीति
बहस की शुरुआत में मूसा हर्राज ने भारत की नीति पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि भारत में जब भी कोई आतंरिक समस्या होती है, तो उसका ठीकरा पाकिस्तान पर फोड़ दिया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय सरकार पाकिस्तान का नाम लेकर डर का माहौल बनाती है और इसी के जरिए जनता का समर्थन हासिल करती है.
हर्राज ने सवाल किया कि क्या यह वास्तव में सुरक्षा नीति है या फिर केवल घरेलू राजनीति का एक तरीका.
26/11 का जिक्र और भावनात्मक जवाब
इस सवाल के जवाब में विरांश भानुशाली ने बेहद व्यक्तिगत और तर्कपूर्ण अंदाज में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वे मुंबई से हैं और उन्होंने 26 नवंबर 2008 की वह रात अपनी आंखों के सामने घटित होते देखी है.
“This House Believes That India's Policy Towards Pakistan Is a Populist Disguise for Security Policy.”
— Augadh (@AugadhBhudeva) December 22, 2025
Viraansh Bhanushali, a law student from Mumbai at the University of Oxford, delivered a compelling opposition speech in the Oxford Union debate on the motion “This House… pic.twitter.com/RWbAw5MfOv
विरांश ने बताया कि उस रात उनकी मौसी उसी रेलवे स्टेशन से गुजर रही थीं, जहां आतंकियों ने हमला किया था. संयोग से वह बच गईं, लेकिन 166 लोग अपनी जान नहीं बचा सके. उन्होंने पूछा- क्या इस तरह की त्रासदी को राजनीति कहा जा सकता है?
उन्होंने साफ कहा कि भारत ने यह सच्चाई बहुत कड़वे अनुभवों के साथ सीखी है कि जिस देश में शर्म नहीं होती, उसे शर्मिंदा नहीं किया जा सकता.
सुरक्षा बनाम दिखावा
मूसा हर्राज ने पलटकर कहा कि हिंसा तो हर देश में होती है और क्या हर बार सख्त रुख अपनाना जरूरी है? क्या यह जनता को खुश करने की रणनीति नहीं है?
इस पर विरांश ने एक सरल उदाहरण देते हुए जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अगर किसी इलाके में लगातार चोरी हो रही हो, तो क्या आप अपने घर का दरवाजा खुला छोड़ देंगे? ताला लगाना दिखावा नहीं, बल्कि सुरक्षा है. भारत की नीति भी ठीक वैसी ही है.
“आतंकवाद भारत पर थोपा गया”
बहस के दौरान विरांश ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर भाषण देने की जरूरत नहीं, बल्कि सिर्फ एक कैलेंडर काफी है. उन्होंने साल दर साल हुए आतंकी हमलों की तारीखें गिनाईं—
1993 के मुंबई धमाके, 2008 का 26/11 हमला, फिर पठानकोट, उरी और पुलवामा.
उन्होंने सवाल किया कि क्या इन सभी घटनाओं के समय भारत में चुनाव चल रहे थे? अगर नहीं, तो फिर इन्हें वोट बैंक की राजनीति कैसे कहा जा सकता है? उनका कहना था कि आतंकवाद भारत पर थोपा गया है, यह किसी राजनीतिक रणनीति का नतीजा नहीं है.
युद्ध क्यों नहीं किया गया?
मूसा हर्राज ने फिर सवाल उठाया कि अगर खतरा इतना बड़ा था, तो 26/11 के बाद भारत ने युद्ध क्यों नहीं किया?
इस पर विरांश ने कहा कि यही भारत की जिम्मेदार सोच को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि उस समय देश में गुस्सा चरम पर था. अगर सरकार केवल लोकप्रियता चाहती, तो तत्काल सैन्य कार्रवाई की जाती. लेकिन भारत ने संयम दिखाया, सबूत इकट्ठा किए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सच्चाई रखी.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि उस संयम के बावजूद शांति नहीं आई और बाद में भी आतंकी हमले होते रहे, इसलिए भारत को अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त होना पड़ा.
पहलगाम की घटना और ताजा उदाहरण
जब हर्राज ने कहा कि भारत आज भी हर घटना के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता है, तो विरांश ने हालिया पहलगाम की घटना का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि वहां पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर मारा गया. उनसे यह नहीं पूछा गया कि उन्होंने किसे वोट दिया या उनकी राजनीतिक सोच क्या है. वे सिर्फ भारतीय थे. क्या इसे भी राजनीति कहा जाएगा?
पाकिस्तान पर तीखा कटाक्ष
विरांश ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कहीं दिखावटी राजनीति है, तो वह वहां देखने को मिलती है. भारत में किसी भी कार्रवाई के बाद जांच और बहस होती है, जबकि पाकिस्तान में ऐसे मामलों को उत्सव और तमाशे की तरह पेश किया जाता है.
उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार अपने लोगों को बुनियादी जरूरतें नहीं दे पाती, तो उन्हें तमाशों में उलझाए रखती है.
भारत युद्ध नहीं, शांति चाहता है
बहस के अंत में मूसा हर्राज ने पूछा कि क्या भारत युद्ध चाहता है. इस पर विरांश ने स्पष्ट कहा कि भारत कभी युद्ध नहीं चाहता.
उन्होंने कहा कि भारत एक शांत पड़ोसी की तरह रहना चाहता है, जहां व्यापार, ऊर्जा और संसाधनों का आदान-प्रदान हो. लेकिन जब आतंकवाद को राज्य नीति की तरह इस्तेमाल किया जाता है, तब चुप रहना संभव नहीं होता.
अंत में उन्होंने कहा कि अगर अपने नागरिकों की जान बचाना लोकप्रिय कहलाता है, तो भारत उस लोकप्रियता को स्वीकार करता है. लेकिन यह राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है.
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