India GDP: साल 2025 भारत की आर्थिक यात्रा में ऐतिहासिक साबित हुआ है. साल के अंत तक भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. सरकार की वार्षिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक अब वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका पहले, चीन दूसरे, जर्मनी तीसरे, भारत चौथे और जापान पांचवें स्थान पर है.
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन भारत ने तेज विकास दर और मजबूत घरेलू मांग के दम पर अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है.
जर्मनी को भी पीछे छोड़ने की ओर भारत
आर्थिक समीक्षा में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ सकता है. अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही तो भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इसकी औपचारिक पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा 2026 की पहली छमाही में जारी किए जाने वाले 2025 के अंतिम आंकड़ों से होगी.
ग्लोबल ग्रोथ इंजन बनता भारत, चीन की बढ़ी बेचैनी
इन अनुमानों के बीच चीन की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है. वैश्विक विशेषज्ञ और वित्तीय संस्थान अब भारत को दुनिया का नया ग्रोथ इंजन करार दे रहे हैं. ब्लूमबर्ग की बीते वर्षों में आई कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत वैश्विक आर्थिक संतुलन में बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है.
2028 तक वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में चीन से आगे भारत
ब्लूमबर्ग की 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 2028 तक वैश्विक जीडीपी वृद्धि में चीन से ज्यादा योगदान दे सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती की ओर बढ़ रही है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है.
चीन की तुलना में भारत को सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन का भी बड़ा फायदा मिल रहा है. एप्पल जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में अपने उत्पादन और असेंबली का दायरा बढ़ा रही हैं, जिससे भारत विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
ग्रोथ रेट में चीन से कहीं आगे भारत
हालांकि कुल जीडीपी के आकार में चीन अभी भी भारत से आगे है, लेकिन विकास दर के मामले में भारत उसे काफी पीछे छोड़ चुका है. ब्लूमबर्ग के अनुमानों के मुताबिक दशक के अंत तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर करीब 9 प्रतिशत तक रह सकती है, जबकि चीन की ग्रोथ 3.5 प्रतिशत के आसपास सीमित रहने की संभावना है.
इसके साथ ही भारत की कॉरपोरेट कंपनियों की आय के अनुमान लगातार ऊपर जा रहे हैं, जबकि चीन के लिए इन्हें घटाया जा रहा है.
चीन की सुस्ती और भारत की मजबूती
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में चीन की आर्थिक चुनौतियों की भी चर्चा की गई है. बढ़ता कर्ज, कमजोर निजी खपत और प्रॉपर्टी सेक्टर की समस्याएं चीन की रफ्तार को धीमा कर रही हैं. इसके उलट भारत में घरेलू उपभोग मजबूत बना हुआ है और सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया जा रहा है.
हर 18 महीने में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ने की क्षमता
आईडीबीआई कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले छह वर्षों में हर 18 महीने में अपनी जीडीपी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ने की स्थिति में है. इसी रफ्तार से भारत 2032 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है और 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत औद्योगिक उत्पादन के मामले में अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को पीछे छोड़ सकता है.
क्या भारत चीन को पछाड़ सकता है?
ब्लूमबर्ग की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर भारत इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और शहरीकरण पर लगातार काम करता रहा, तो वह 2028 तक वैश्विक विकास का सबसे बड़ा चालक बन सकता है. वहीं चीन के बढ़ते कर्ज और धीमी ग्रोथ को देखते हुए फिच रेटिंग्स ने उसके आउटलुक को स्थिर से नकारात्मक कर दिया है.
भारत इस समय करीब 7 प्रतिशत की अनुमानित जीडीपी ग्रोथ के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार ने दी मजबूती
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है. नवंबर 2025 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट बढ़कर 38.13 बिलियन डॉलर पहुंच गया. काजू, मरीन प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई. सर्विस एक्सपोर्ट भी 8.65 प्रतिशत बढ़कर 270 बिलियन डॉलर के पार चला गया है.
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 686.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो लगभग 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है.
कम महंगाई और तेज ग्रोथ का दौर
नवंबर में खुदरा महंगाई गिरकर 0.71 प्रतिशत पर आ गई, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत रह गई. दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई. ऊंची ग्रोथ और बेहद कम महंगाई के इस संतुलन को अर्थशास्त्री ‘गोल्डिलॉक्स पीरियड’ कह रहे हैं.
भारत की जीडीपी और भविष्य का रोडमैप
फिलहाल भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है. अनुमान है कि 2030 तक यह 7.3 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है. RBI ने भी पूरे साल के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है.
केंद्र सरकार का कहना है कि भारत 2047 तक उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. मजबूत आर्थिक सुधार, नियंत्रित महंगाई, बेहतर बैंकिंग सिस्टम और बढ़ती मांग से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.
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