नई दिल्ली : अक्टूबर में भारत की रिटेल महंगाई (CPI) 6.21 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 6 प्रतिशत ऊपरी सहनीय स्तर को पार कर गई. मंगलवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों के दाम 10.87 प्रतिशत पर हैं. सबसे अहम, सब्जियां 42.18 प्रतिशत महंगी हुईं हैं.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए इसी महंगाई दर क्रमशः 6.68 प्रतिशत और 5.62 प्रतिशत रही.
अक्टूबर 2024 के लिए साल-दर-साल आवास महंगाई दर 2.81 प्रतिशत है. सितंबर 2024 यह दर 2.72 प्रतिशत थी. आवास सूचकांक का डेटा केवल शहरी क्षेत्र के लिए जुटाया गया है.
अक्टूबर में दाल, अंडा, चीनी समेत चीजों के दाम में इजाफा
अक्टूबर महीने के दौरान दालों और उत्पादों, अंडों, चीनी और कन्फेक्शनरी व मसालों के दाम में अहम गिरावट देखी गई है. अक्टूबर में खाने-पीने के चीजों महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से सब्जियों, फलों और तेलों व वसा से जुड़ी चीजों के दाम बढ़ने के कारण हुई है.
अगस्त में रिटेल महंगाई 3.65 प्रतिशत थी, जो पिछले 5 सालों में दूसरी बार सबसे कम थी, और तब से यह बढ़ रही है. भारत में नीति निर्माताओं के लिए खाने-पीने की चीजों की कीमतें एक समस्या बनी हुई हैं, जो रिटेल महंगाई को स्थायी आधार पर 4 प्रतिशत पर लाना चाहते हैं. लेकिन आज के मुद्रास्फीति के आंकड़े एक बार फिर साबित करते हैं कि महंगाई मनचाहा टारगेट के मुताबिक नहीं है.
महंगाई भारत ही नहीं कई और देशों के लिए चिंता का विषय
महंगाई भारत ही नहीं, कई और देशों के लिए बनी हुई है चिंता का विषय, जिसमें विकिसित अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, लेकिन भारत ने अपनी महंगाई की दिशा को काफी हद तक कंट्रोल करने में कामयाब रहा है.
जून को छोड़कर महीने-दर-महीने रिटेल महंगाई में कमी आरबीआई की ओर से लगातार 9वीं बार रेपो दर को जस के तस बनाए रखने के तुरंत बाद हुई. आगे चलकर, सभी की निगाहें खरीफ की फसल के मौसम पर होंगी और रबी की बुवाई की प्रगति पर भी नज़र रहेगी. महंगाई कंट्रोल रखने के लिए आरबीआई ने रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखा है. रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई बाकी बैंकों को उधार देता है.
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