भारत अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने पर तेजी से काम कर रहा है. इसी दिशा में डीआरडीओ के प्रोजेक्ट VEDA को अहम पहल माना जा रहा है. VEDA यानी व्हीकल फॉर डिफेंस एप्लीकेशन को डिफेंस स्पेस एजेंसी के लिए एक ऐसे मोबाइल लॉन्च सिस्टम के तौर पर विकसित किए जाने की बात सामने आई है, जो जरूरत पड़ने पर सैन्य सैटेलाइट को जल्दी अंतरिक्ष में भेज सके.
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि इसे किसी एक तय लॉन्च पैड पर निर्भर नहीं रहना होगा. इसे बड़े ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर पर तैनात करके अलग-अलग जगहों से लॉन्च किया जा सकता है.
24 से 72 घंटे में सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, VEDA में ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया जा सकता है. सैटेलाइट और लॉन्च सिस्टम को पहले से तैयार कैनिस्टर में रखा जा सकता है.
इसकी मदद से जरूरत पड़ने पर करीब 24 से 72 घंटे के अंदर सैटेलाइट को कक्षा में भेजने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि, यह समय सीमा प्रोजेक्ट की अंतिम क्षमता और परीक्षण के बाद ही पूरी तरह साफ होगी.
युद्ध के दौरान सैटेलाइट की कमी पूरी करने में मदद
आज के युद्ध में सैटेलाइट की भूमिका बहुत बढ़ गई है. सेना संचार, निगरानी, लक्ष्य की जानकारी और खुफिया जानकारी के लिए इन पर काफी निर्भर रहती है.
अगर युद्ध के दौरान किसी भारतीय सैटेलाइट को नुकसान पहुंचता है या वह काम करना बंद कर देता है तो VEDA जैसे सिस्टम के जरिए उसकी जगह नया छोटा सैटेलाइट जल्दी भेजने की कोशिश की जा सकती है.
इससे कम्युनिकेशन, निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
एक साथ कई छोटे सैटेलाइट भेजने की क्षमता
VEDA को छोटे सैटेलाइट जैसे नैनो सैटेलाइट और क्यूबसैट को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने के लिए भी तैयार किए जाने की बात कही जा रही है.
ऐसे सैटेलाइट जमीन पर मौजूद सैन्य कमांडरों को निगरानी से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं. इनमें रडार तस्वीरें, सामान्य तस्वीरें, इंफ्रारेड जानकारी और सिग्नल से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है.
काउंटर-स्पेस मिशन में भी इस्तेमाल की संभावना
VEDA की संभावित भूमिका सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च तक सीमित नहीं बताई जा रही है. इसके जरिए काउंटर-स्पेस ऑपरेशन में भी मदद मिलने की संभावना जताई गई है.
काउंटर-स्पेस का मतलब ऐसी क्षमता से है, जिसके जरिए किसी विरोधी की अंतरिक्ष आधारित व्यवस्था को प्रभावित किया जा सके. इसमें सीधे नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक के अलावा जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक तरीके भी शामिल हो सकते हैं.
हालांकि, VEDA की वास्तविक क्षमता और इसके अंतिम इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
चीन और अमेरिका के सिस्टम से तुलना
तेजी से लॉन्च किए जा सकने वाले अंतरिक्ष सिस्टम के मामले में चीन के कुआइझोउ कार्यक्रम और अमेरिका के क्विक-रिस्पॉन्स स्पेस लॉन्च प्रयासों का उदाहरण दिया जाता है.
भारत का VEDA भी इसी तरह जरूरत के समय तेजी से सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता विकसित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.
स्पेस डिफेंस रणनीति को मिलेगी नई ताकत
अगर VEDA अपनी योजना के मुताबिक सफल होता है तो भारत के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा तेजी से सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता होगी.
भविष्य के युद्ध में अगर भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी या संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, तो नए सैटेलाइट जल्दी भेजकर उस कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
इस तरह VEDA भारत की स्पेस डिफेंस रणनीति में एक अहम भूमिका निभा सकता है और अंतरिक्ष में देश की सैन्य तैयारियों को और मजबूत कर सकता है.
ये भी पढ़ें- तेजस, राफेल छोड़ो... भारत को मिला 5th जेनरेशन फाइटर जेट का मेगा ऑफर, पूरी टेक्नोलॉजी भी देने को तैयार