भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में यदि कोई शब्द या स्वर ऐसा है जिसने करोड़ों भारतीयों के हृदय में अग्नि प्रज्ज्वलित की, तो वह है — ‘वंदे मातरम्’. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला यह गीत केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की पुकार था. आज जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित स्मरण समारोह में कहा — “वंदे मातरम् हमें यह विश्वास दिलाता है कि भारत के लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. यह हमारे हृदय में साहस, आत्मबल और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का संचार करता है.”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब ‘बंग दर्शन’ पत्रिका में वंदे मातरम् पहली बार प्रकाशित हुआ था, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यह गीत भारत की स्वतंत्रता की आवाज बन जाएगा. यह गीत सिर्फ एक रचना नहीं रहा. यह राष्ट्र के स्वप्न, उसकी वेदना और उसके संघर्ष का प्रतीक बन गया. हर क्रांतिकारी के होंठों पर, हर आंदोलन की पुकार में यही स्वर गूंजता था. “वंदे मातरम्.” पीएम मोदी ने कहा, “वंदे मातरम् शब्द वर्तमान को आत्मविश्वास से भर देता है. यह केवल आजादी का गीत नहीं, बल्कि आजाद भारत का सपना भी है. जब हम वंदे मातरम् का सामूहिक गान करते हैं, तो वह भावना शब्दों से परे होती है. इतनी सारी आवाज़ों में एक लय, एक स्वर और एक भाव, जो हृदय को स्पंदित कर देता है. यही वंदे मातरम् का चमत्कार है.”