Banke Bihari Mandir: वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन की व्यवस्था को अधिक सुचारु, पारदर्शी और श्रद्धालु-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी की चौथी बैठक वृंदावन में संपन्न हुई, जिसमें मंदिर प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगी.
बैठक का सबसे अहम निर्णय रहा, VIP दर्शन पर्चियों की व्यवस्था को पूर्ण रूप से बंद करना. अब कोई भी विशेष पर्ची जारी नहीं की जाएगी. हर श्रद्धालु को समान रूप से एक ही कतार में खड़े होकर दर्शन करने का अवसर मिलेगा. यह निर्णय श्रद्धालुओं के बीच समानता और दर्शन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
प्रवेश और निकास के लिए तय होंगे अलग-अलग द्वार
भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है कि मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार निर्धारित किए जाएंगे. इससे दर्शन की प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित होगी तथा अनावश्यक धक्का-मुक्की से राहत मिलेगी.
मंदिर के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव
श्रद्धालुओं की संख्या और मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गर्मियों और सर्दियों के अनुसार मंदिर के समय में परिवर्तन किया गया है:
गर्मियों में समय:
सर्दियों में समय:
दर्शन की लाइव स्ट्रीमिंग को मिली सहमति
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि दर्शन की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की जाएगी, ताकि जो श्रद्धालु मंदिर नहीं आ सकते, वे भी अपने घर बैठे भगवान बांके बिहारी के दर्शन कर सकें.
संपत्तियों और खातों की होगी जांच
मंदिर के पास कितनी चल-अचल संपत्ति है, इसका पूरा विवरण 15 दिनों के भीतर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. इसके साथ ही वर्ष 2013 से 2016 तक का विशेष ऑडिट भी कराया जाएगा, ताकि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
गर्भगृह से सटे बंद कमरे की जांच
मंदिर के गर्भगृह के पास स्थित एक बंद कमरे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जिसमें ऑडिटर, सिविल जज, एसडीएम वृंदावन, क्षेत्राधिकारी वृंदावन और गोस्वामी समाज का एक नामित सदस्य शामिल होंगे. यह समिति कमरे को खोलेगी, वीडियोग्राफी कराएगी और इन्वेंटरी बनाकर संयुक्त हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.
समावेशी निर्णय प्रक्रिया
बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति अशोक कुमार, रिटायर्ड जिला सत्र न्यायाधीश मुकेश मिश्रा ने की. गोस्वामी समाज के चार प्रतिनिधि सदस्यों की उपस्थिति में निर्णय लिए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सभी फैसले संवाद और सहमति के आधार पर किए जा रहे हैं.
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