एक ऐसा देश जिसकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर और सुरक्षित राष्ट्रों में होती है, जहां वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स तैनात हैं. उस कतर पर इजरायल ने राजधानी के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में हमला कर दिया और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुई. यह घटना 9 सितंबर की है, जब इजरायली फौज ने दोहा के वेस्ट बे लैगून क्षेत्र में एक बड़ा हवाई हमला किया.
इस हमले का लक्ष्य कथित रूप से हमास के वरिष्ठ नेता थे, जो कथित तौर पर संघर्ष विराम को लेकर चर्चा के लिए दोहा आए हुए थे. इजरायल ने इस ऑपरेशन को 'समिट ऑफ फायर' नाम दिया और इसमें 15 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली विमानों ने लक्षित इमारत पर करीब 10 मिसाइलें दागीं और बिना किसी क्षति के सभी विमान अपने ठिकानों पर लौट गए.
कतर की हवाई सुरक्षा: सिर्फ दिखावा या रणनीतिक चूक?
कतर ने बीते कुछ वर्षों में अपनी वायुसेना को इतना मजबूत किया है कि वो खाड़ी देशों में सबसे आधुनिक मानी जाती है. उसके पास कुल 96 एडवांस लड़ाकू विमान हैं. जिनमें 36 अमेरिकी F-15QA, 36 फ्रेंच राफेल, 24 यूरोफाइटर टाइफून और दर्जनों मिराज-2000 शामिल हैं. यही नहीं, एयर डिफेंस के नाम पर कतर के पास पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, NASAMS, SAMP/T और अल्ट्रा-मॉर्डन अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम (AN/FPS-132) भी तैनात हैं. इसके बावजूद न तो किसी रडार ने खतरे का संकेत दिया, न कोई इंटरसेप्ट हुआ और न ही किसी डिफेंस सिस्टम से जवाबी कार्रवाई हुई. सवाल ये है कि क्या इजरायल ने इतनी उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया कि कतर का पूरा एयर डिफेंस सिस्टम ही निष्क्रिय हो गया?
इजरायली तकनीक का जादू या कतर की रणनीतिक विफलता?
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी का बयान भी इसी ओर इशारा करता है. उन्होंने कहा कि इजरायली फाइटर जेट्स उनके किसी भी रडार सिस्टम पर नज़र नहीं आए. इससे दो संभावनाएं सामने आती हैं: या तो इजरायल ने अपने स्टेल्थ F-35I जेट्स का इस्तेमाल किया, या फिर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए कतर की निगरानी प्रणाली को जाम कर दिया. हालांकि यह वही देश है जिसने कुछ महीनों पहले जून 2025 में ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिकी सहयोग से सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया था. फिर इस बार ऐसी क्या चूक हुई?
अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल
इस घटना में एक और दिलचस्प पहलू है. अमेरिका की चुप्पी. अमेरिकी रिपोर्ट्स बताती हैं कि फारस की खाड़ी की ओर बढ़ते इजरायली विमानों को अमेरिकी सेना ने देखा था. फिर सवाल उठता है कि जब अमेरिका ने खतरा देखा, तो उसने कोई जवाब क्यों नहीं दिया? क्या उसने जानबूझकर आंखें मूंद लीं? ईरानी मीडिया ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिका ने कतर के एयरस्पेस की रक्षा के लिए एक भी मिसाइल नहीं छोड़ी.
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