ईरान पर फिर बड़े हमले की तैयारी में US? अलर्ट पर F-35 जेट और B-2 बॉम्बर, जानें क्या है ट्रंप का प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी ईरान के खिलाफ नए बड़े सैन्य अभियान को शुरू करने का अंतिम फैसला नहीं लिया है.

US preparing for another attack on Iran F-35 and B-2 bombers on alert
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी ईरान के खिलाफ नए बड़े सैन्य अभियान को शुरू करने का अंतिम फैसला नहीं लिया है. हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पेंटागन को संभावित हमले की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं. कुछ दिन पहले ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड को ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की स्थिति में जरूरी तैयारियां पूरी करने को कहा गया था. फिलहाल हमले की तारीख तय नहीं हुई है.

अगर अमेरिका दोबारा बड़ा सैन्य अभियान शुरू करता है तो ईरान के ऊर्जा केंद्रों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाए जाने की आशंका है. अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश मिलकर भी सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. इसकी संभावना इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है. मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा कतर अब ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है. अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई रियायतों की मांग की गई है.

चुनावों से पहले तनाव बढ़ने की आशंका

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले सैन्य कार्रवाई की संभावना पर चर्चा हुई है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चुनाव से पहले हमले की संभावना बहुत ज्यादा नहीं है. फिर भी इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है.

इजरायल में भी चुनाव होने वाले हैं और ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई वहां की राजनीति को प्रभावित कर सकती है. दूसरी ओर, अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं तो जवाब में तेहरान इजरायल पर बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दाग सकता है.

ट्रंप का दावा- ईरान हो चुका है कमजोर

डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है और इसके बाद तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है.

ट्रंप ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. उनका कहना है कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ईरान पर दबाव बनाने का एक अहम तरीका है.

क्या है ईरान का रुख?

वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा है कि उनका देश इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है कि युद्ध खत्म करने के लिए उसकी क्या शर्तें हैं. उन्होंने कहा कि ईरान अपना प्रस्ताव अमेरिका के सामने रख चुका है और अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब भी मध्यस्थों के जरिए ही दिया जाएगा.

इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा था कि जब तक ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट बंद नहीं करता, तब तक युद्ध को खत्म करना मुश्किल होगा.