4 विमान, 6 अफसर और 19 जवान… ऐसे हुई थी भारतीय वायुसेना की शुरुआत, आज आसमान पर करती है राज!

छोटी शुरुआत से बड़ी ताकत बनने तक भारतीय वायुसेना ने लंबा सफर तय किया है. कभी चार विमानों और कुछ अफसरों-जवानों के साथ शुरू हुई यह फोर्स आज देश की हवाई सुरक्षा की सबसे अहम ताकतों में शामिल है.

Indian Air Force day The IAFs journey began with four aircraft know history
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Indian Air Force Day: छोटी शुरुआत से बड़ी ताकत बनने तक भारतीय वायुसेना ने लंबा सफर तय किया है. कभी चार विमानों और कुछ अफसरों-जवानों के साथ शुरू हुई यह फोर्स आज देश की हवाई सुरक्षा की सबसे अहम ताकतों में शामिल है. कई बड़े सैन्य अभियानों में अपनी भूमिका निभाने के साथ भारतीय वायुसेना ने समय के साथ अपनी क्षमता भी बढ़ाई है.

वायुसेना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है. इस मौके पर आइए जानते हैं कि 4 विमान, 6 अफसर और 19 वायुसैनिकों से शुरू हुई भारतीय वायुसेना का सफर कैसे आगे बढ़ा और इसके नाम से ‘रॉयल’ शब्द कब हटाया गया.

साल 1932 में रखी गई थी नींव

भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी. उस समय इसका नाम इंडियन एयर फोर्स था और यह ब्रिटिश भारत की वायुसेना के तौर पर काम करती थी. शुरुआती दौर में इसकी वर्दी, बैज और दूसरे प्रतीकों पर भी ब्रिटिश प्रभाव दिखाई देता था.

स्थापना के कुछ महीनों बाद 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना की पहली ऑपरेशनल यूनिट यानी नंबर 1 स्क्वाड्रन ने काम शुरू किया. यहां यह समझना जरूरी है कि 8 अक्टूबर स्थापना की तारीख है, जबकि 1 अप्रैल 1933 को पहला स्क्वाड्रन अस्तित्व में आया था.

चार विमान, छह अफसर और 19 वायु सैनिक

1 अप्रैल 1933 को नंबर 1 स्क्वाड्रन की शुरुआत चार वेस्टलैंड वापिटी विमानों के साथ हुई थी. इसके शुरुआती दल में छह प्रशिक्षित अफसर और 19 वायु सैनिक थे. कुछ रिकॉर्ड में शुरुआती पायलटों की संख्या पांच भी बताई जाती है.

वेस्टलैंड वापिटी उस समय का दो पंखों वाला विमान था. आज के आधुनिक लड़ाकू विमानों के मुकाबले यह काफी साधारण था, लेकिन उस दौर में यह वायुसेना के लिए एक अहम शुरुआत थी. इतने छोटे दल को उड़ान के साथ विमानों की देखभाल, संचार और दूसरे सैन्य काम भी संभालने थे.

पहले स्क्वाड्रन की कमान ब्रिटिश अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट सेसिल बाउशर के पास थी. समय के साथ भारतीय अफसरों और वायु सैनिकों ने ट्रेनिंग और ऑपरेशन का अनुभव हासिल किया. सीमित संसाधनों के बावजूद वायुसेना धीरे-धीरे मजबूत होती गई.

दूसरे विश्वयुद्ध में बदली पहचान

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने बर्मा क्षेत्र में कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया. जापानी सेना की बढ़त को रोकने और जमीन पर मौजूद सैनिकों की मदद करने में भी इसकी भूमिका रही.

युद्ध के दौरान वायुसेना का तेजी से विस्तार हुआ. विमानों और स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ी और इसके काम का दायरा भी बड़ा हुआ. युद्ध में योगदान के बाद 1945 में इसे ‘रॉयल’ की उपाधि दी गई. इसके बाद इसका आधिकारिक नाम रॉयल इंडियन एयर फोर्स हो गया.

रॉयल शब्द कब हटाया गया?

भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, लेकिन इसके बाद भी कुछ समय तक वायुसेना के नाम में ‘रॉयल’ शब्द बना रहा. साल 1950 में यह शब्द हटा दिया गया.

26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और इसी के साथ वायुसेना का नाम रॉयल इंडियन एयर फोर्स से बदलकर इंडियन एयर फोर्स हो गया. यह बदलाव सिर्फ नाम तक सीमित नहीं था. यह इस बात का भी संकेत था कि अब भारत ब्रिटिश राजशाही के अधीन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र गणराज्य था.

8 अक्टूबर की तारीख ही क्यों?

वायुसेना दिवस के लिए 8 अक्टूबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन साल 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी. इस दिन वायुसेना के जवानों, अफसरों और पूर्व कर्मियों के योगदान को याद किया जाता है.

वायुसेना दिवस पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इनमें परेड, सम्मान समारोह और विमानों का प्रदर्शन शामिल हो सकता है. हालांकि कार्यक्रम और आयोजन की जगह हर साल अलग हो सकती है, लेकिन इस दिन का ऐतिहासिक संबंध 8 अक्टूबर 1932 से ही है.

आज भारतीय वायुसेना के पास खास जिम्मेदारियां

आज भारतीय वायुसेना का काम सिर्फ लड़ाकू विमान उड़ाना नहीं है. देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ यह सेना के दूसरे अंगों को हवाई मदद भी देती है. जरूरत पड़ने पर सैनिकों और जरूरी सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम भी वायुसेना करती है.

इसके अलावा खोज और बचाव अभियान में भी इसकी अहम भूमिका होती है. बाढ़, भूकंप या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वायुसेना के विमान और हेलीकॉप्टर राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद करते हैं.

यानी वायुसेना की जिम्मेदारी सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है. चार विमानों और छोटे से दल से शुरू हुई यह फोर्स आज एक बड़े और आधुनिक सैन्य बल के रूप में काम कर रही है.

छोटी शुरुआत, लेकिन सफर लंबा

भारतीय वायुसेना का इतिहास उसके लगातार विकास की कहानी बताता है. 1932 में इसकी स्थापना हुई और 1933 में पहला स्क्वाड्रन बना. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसे युद्ध का अनुभव मिला. आजादी के बाद इसने नए भारत की वायुसेना के तौर पर अपनी पहचान बनाई और 1950 में इसके नाम से ‘रॉयल’ शब्द भी हटा दिया गया.

वायुसेना दिवस इसी लंबे सफर को याद करने का मौका है. चार विमानों, छह अफसरों और 19 वायुसैनिकों से शुरू हुआ यह सफर कई पीढ़ियों के योगदान, ट्रेनिंग और अनुशासन के साथ लगातार आगे बढ़ता रहा है.