चीन के पड़ोस में भारतीय हथियारों की एंट्री, ये दो देश खरीदेंगे 'आकाश' मिसाइल, रूस को बड़ा झटका!

दुनिया के हथियारों के बाजार में कुछ बड़े देशों और कंपनियों का दबदबा है.दुनिया की 100 बड़ी रक्षा कंपनियों की कुल सालाना कमाई 632 अरब डॉलर यानी करीब 52 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है. इस बाजार में अब भारतीय कंपनियां भी अपनी जगह बना रही हैं और विदेशों में रक्षा उपकरणों की सप्लाई कर रही हैं.

Tajikistan and Turkmenistan to buy Akash missile Systems from India
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Akash Missile Systems: दुनिया के हथियारों के बाजार में कुछ बड़े देशों और कंपनियों का दबदबा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) और हाल की रक्षा रिपोर्टों के मुताबिक, दुनिया की 100 बड़ी रक्षा कंपनियों की कुल सालाना कमाई 632 अरब डॉलर यानी करीब 52 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है. इस बाजार में अब भारतीय कंपनियां भी अपनी जगह बना रही हैं और विदेशों में रक्षा उपकरणों की सप्लाई कर रही हैं. भारत ने हाल ही में मध्य एशिया के ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को आकाश मिसाइल सिस्टम बेचने का समझौता किया है. भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी इस डील की पुष्टि की है.

आकाश मिसाइल सिस्टम के बारे में जानें

आकाश भारत का स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाला मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है, जबकि भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इसका निर्माण करते हैं.

आकाश मिसाइल की मारक क्षमता करीब 4.5 से 25 किलोमीटर तक है. यह 100 मीटर से 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ रहे लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. एक मिसाइल का वजन करीब 710 किलोग्राम और लंबाई 5.87 मीटर है. इसकी रफ्तार करीब 2.5 मैक है. यह फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और हेलीकॉप्टर जैसे कई हवाई खतरों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम है.

ताजिकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान संग आकाश मिसाइल सौदा

ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ हुए आकाश मिसाइल सिस्टम के समझौते में राजेंद्र रडार नेटवर्क और लॉजिस्टिक सपोर्ट एवं रखरखाव पैकेज भी शामिल है. हालांकि, कितनी मिसाइल बैटरियां दी जाएंगी और सौदे की कुल कीमत कितनी है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. ये समझौते 2022 में आकाश के पहले विदेशी ग्राहक आर्मेनिया के साथ हुई डील के मॉडल पर आधारित बताए जा रहे हैं.

इस सौदे को चीन और रूस के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है. ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान की सेनाओं में अभी भी बड़ी मात्रा में सोवियत और रूसी हथियार मौजूद हैं. वहीं, चीन भी इन देशों को बड़े पैमाने पर हथियारों की सप्लाई करता है. इसके बावजूद दोनों देशों ने अपनी सैन्य जरूरतों में विविधता लाने के लिए भारत को एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प के तौर पर चुना है.

मध्य एशिया में भारत की मजबूत उपस्थिति

ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को आकाश मिसाइल सिस्टम की बिक्री को मध्य एशिया के रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती पकड़ के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. भारत का रक्षा निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये यानी करीब 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें 61 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

भारत इस समय 80 से ज्यादा देशों को हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात कर रहा है. ऐसे में ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ आकाश का सौदा भारतीय रक्षा उद्योग के लिए मध्य एशिया में नए बाजार खुलने का संकेत माना जा रहा है.