23 साल बाद इराक से अमेरिका की विदाई, अब बदलेगा मिडिल ईस्ट का पूरा समीकरण, बढ़ेगा ईरान का दबदबा?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने 30 सितंबर 2026 को इराक से अपनी सैन्य वापसी पूरी कर ली है. इसके साथ ही 2003 में सद्दाम हुसैन की सत्ता के खिलाफ शुरू हुई अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया.

US Completes Military Withdrawal From Iraq After 23 Years
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने 30 सितंबर 2026 को इराक से अपनी सैन्य वापसी पूरी कर ली है. इसके साथ ही 2003 में सद्दाम हुसैन की सत्ता के खिलाफ शुरू हुई अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया. हालांकि, यह अमेरिका-इराक संबंधों का अंत नहीं है. दोनों देशों के बीच अब सैन्य अभियान की जगह द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर जोर रहेगा. अमेरिकी नेतृत्व वाला ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व भी इराक से खत्म होकर अब जॉर्डन स्थित मुख्यालय से सीरिया में ISIS के खिलाफ अभियान जारी रखेगा.

2003 से 2026 तक कैसे बदली अमेरिकी भूमिका?

अमेरिका ने 20 मार्च 2003 को इराक पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद सद्दाम हुसैन की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. 2007 तक अमेरिकी सैन्य तैनाती अपने चरम पर पहुंच गई थी और इराक में 1.70 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद थे. दिसंबर 2011 में अमेरिका ने अपने अंतिम लड़ाकू सैनिकों को वापस बुला लिया था, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से उभार के बाद इराकी सरकार के अनुरोध पर अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं दोबारा लौट आईं. बाद के वर्षों में ISIS के क्षेत्रीय नियंत्रण को खत्म करने के बाद सैन्य मिशन धीरे-धीरे सीमित होता गया.

2024 के समझौते के बाद तय हुआ वापसी का रास्ता

वाशिंगटन और बगदाद ने 2024 में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के इराक मिशन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना पर सहमति बनाई थी. इसके तहत सितंबर 2026 के अंत तक इराक से सैन्य वापसी पूरी करने की समयसीमा तय हुई. 30 सितंबर को एरबिल एयर बेस से अमेरिकी सैन्य बलों और उपकरणों की अंतिम विदाई के साथ यह प्रक्रिया पूरी हो गई. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब इराक में सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी इराकी सुरक्षा बलों और कुर्द पेशमर्गा पर होगी.

ईरान समर्थित मिलिशिया पर बढ़ी नजर

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कुछ शक्तिशाली मिलिशिया समूहों के निरस्त्रीकरण को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिकी मौजूदगी के हटने के बाद बगदाद सरकार के सामने इन गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को राज्य के सुरक्षा ढांचे के नियंत्रण में रखने की चुनौती रहेगी. इस मुद्दे का असर इराक की घरेलू राजनीति के साथ-साथ ईरान और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन पर भी पड़ सकता है.

ISIS और एयर डिफेंस भी बड़ी चुनौती

ISIS का इराक में क्षेत्रीय नियंत्रण खत्म हो चुका है, लेकिन उसके बचे हुए नेटवर्क और स्लीपर सेल से खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा. अमेरिकी सेना के इराक से हटने के बाद आतंकवाद विरोधी अभियानों में इराकी सुरक्षा बलों की भूमिका और बढ़ेगी, जबकि अमेरिका अब जॉर्डन से सीरिया में अपने अभियान को जारी रखेगा. इसके साथ ही उत्तरी इराक में अमेरिकी एयर डिफेंस क्षमताओं के हटने से सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आई है. कुर्द क्षेत्र में अधिकारियों ने विशेष रूप से हवाई सुरक्षा की क्षमता को लेकर चिंता जताई है.

अमेरिकी विदाई के बाद इराक के सामने नया दौर

इराक से अमेरिकी सैन्य वापसी केवल सैनिकों की तैनाती खत्म होने की घटना नहीं है, बल्कि देश के सुरक्षा ढांचे में एक बड़े बदलाव का संकेत है. अमेरिका के अनुसार, ISIS को एक संगठित सैन्य ताकत के रूप में पराजित करने के बाद अब इराकी सुरक्षा बल प्राथमिक जिम्मेदारी संभालने की स्थिति में हैं. दूसरी ओर, ईरान समर्थित मिलिशिया, ISIS के अवशेष और एयर डिफेंस जैसी चुनौतियां बगदाद के सामने बनी हुई हैं. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इराक अपनी संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा को किस तरह मजबूत करता है और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच अपने सुरक्षा संबंधों का संतुलन कैसे बनाए रखता है.

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