किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! गेहूं समेत 6 फसलों की बढ़ी MSP, जानिए मोदी कैबिनेट के अन्य फैसले

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.

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केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों, नवीकरणीय ऊर्जा और दिल्ली के ट्रैफिक सिस्टम से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. इसके बाद गेहूं का नया MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. इसके अलावा रबी फसलों की मूल्य नीति और कई बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान को मंजूरी दी गई है.

गेहूं के MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी

सरकार के इस फैसले का सीधा असर रबी सीजन में गेहूं की खेती करने वाले किसानों पर पड़ेगा. रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP अब 2,610 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. सरकार के मुताबिक, इस बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में आय को मजबूती देना है.

कैबिनेट ने रबी फसलों की मूल्य नीति के लिए कुल 90,962 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर छह प्रमुख रबी फसलों के MSP तय किए गए हैं.

छह रबी फसलों के लिए कितना MSP तय हुआ?

गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है. इस हिसाब से किसानों को उत्पादन लागत पर करीब 106 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है. सरसों और रेपसीड की अनुमानित लागत 3,367 रुपये प्रति क्विंटल है और इसका MSP 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे लागत पर करीब 96 प्रतिशत का मार्जिन बनता है.

मसूर की उत्पादन लागत 3,854 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले MSP 7,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. चने की अनुमानित लागत 3,751 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि इसका MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है. इसी तरह जौ की लागत 1,447 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले MSP 2,286 रुपये और कुसुम की लागत 4,810 रुपये के मुकाबले MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है.

किसानों को क्या मिलेगा फायदा?

गेहूं के MSP में बढ़ोतरी से किसानों को अपनी उपज के लिए पहले की तुलना में अधिक निर्धारित समर्थन मूल्य मिलेगा. सरकार के अनुसार, रबी फसलों की मूल्य नीति के लिए किया गया बड़ा वित्तीय प्रावधान किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे रबी फसलों की खेती करने वाले किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

पीएम धारा योजना के लिए 1.86 लाख करोड़ रुपये

कैबिनेट ने नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी पीएम धारा योजना के लिए 1,86,405 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच को बढ़ाना और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक सुसंगत और तेज बनाना है. सरकार ने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III को भी मंजूरी दी है.

यह परियोजना देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के दीर्घकालिक लक्ष्य से जुड़ी है. सरकार के अनुसार, यह 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य की दिशा में मददगार होगी.

दिल्ली में ट्रैफिक मैनेजमेंट होगा स्मार्ट

राजधानी दिल्ली में यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है. इस परियोजना के लिए 1,790 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इसका उद्देश्य दिल्ली के प्रमुख यातायात मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन को अधिक तकनीक आधारित और प्रभावी बनाना है.

ITMS परियोजना दिल्ली के 42 चिन्हित यातायात गलियारों को कवर करेगी. इसे 24 महीनों के भीतर तीन चरणों में लागू किया जाएगा. परियोजना के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी. इससे राजधानी में यातायात प्रबंधन को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा.

किसानों से लेकर ऊर्जा और दिल्ली तक बड़े फैसले

केंद्रीय कैबिनेट के इन फैसलों में एक तरफ रबी फसलों के MSP के जरिए किसानों पर फोकस किया गया है, तो दूसरी तरफ नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी यातायात जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है. गेहूं के MSP में बढ़ोतरी और रबी फसलों के लिए 90,962 करोड़ रुपये का प्रावधान किसानों के लिए प्रमुख फैसलों में शामिल है, जबकि पीएम धारा और दिल्ली ITMS से जुड़े फैसले ऊर्जा और शहरी परिवहन क्षेत्र के लिहाज से अहम हैं.

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