वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत की कुछ फार्मास्युटिकल कंपनियों के अधिकारियों और उनके परिवारों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके वीजा रद्द कर दिए हैं. इन पर फेंटेनाइल जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी में शामिल होने का गंभीर आरोप है. यह मामला अब केवल व्यापार या विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है.
अमेरिकी दूतावास ने आधिकारिक बयान में कहा है कि जिन व्यक्तियों पर संदेह है, उन्हें अब अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी और भविष्य में भी उनका वीजा प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है. इससे जुड़ी भारतीय कंपनियों की गतिविधियों पर अधिक निगरानी और कठोर जांच शुरू की जा रही है.
फेंटेनाइल ड्रग अमेरिका में बना मौत का कारण
फेंटेनाइल एक अति-संवेदनशील सिंथेटिक ओपिओइड है, जो मॉर्फिन से 50 गुना और हीरोइन से 100 गुना अधिक ताकतवर होता है. इसका मुख्य उपयोग चिकित्सकीय पेन रिलीफ में होता है, लेकिन जब इसे अवैध रूप से बेचा और इस्तेमाल किया जाता है, तो यह घातक परिणाम देता है.
अमेरिकी सरकार के मुताबिक, हर साल हजारों अमेरिकियों की मौत फेंटेनाइल ओवरडोज से होती है. खासकर युवा वर्ग विशेष रूप से 18 से 44 आयु वर्ग इस ड्रग के कारण सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है.
वीजा रद्द: अमेरिका का सख्त संदेश
अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार, “हमारे देश में अवैध ड्रग्स की आपूर्ति करने वालों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. हमारी प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा है.”
इस संदेश के साथ यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अमेरिका अब ड्रग्स से जुड़े किसी भी व्यक्ति, कंपनी या संगठन को मूल्य चुकाने के लिए तैयार कर रहा है, चाहे वह देश के भीतर हो या बाहर.
भारतीय कंपनियां निशाने पर
हालांकि अमेरिका ने उन भारतीय कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियां हैं जो फेंटेनाइल या उससे जुड़े रसायनों का उत्पादन करती हैं.
अब इन कंपनियों के व्यापारिक व्यवहार, आपूर्ति चैन और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की पड़ताल की जा रही है. जिन अधिकारियों के वीजा रद्द हुए हैं, उनके परिवारों को भी अमेरिका में प्रवेश से रोका गया है- यह शायद पहली बार है जब इस स्तर की सामूहिक कार्रवाई की गई हो.
ड्रग्स के खिलाफ ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब दोबारा राष्ट्रपति पद पर लौट आए हैं, उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही ड्रग तस्करी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है.
ट्रंप प्रशासन की प्रमुख कार्रवाइयाँ:
फरवरी 2025: Make America Healthy Again Commission की स्थापना, जिसमें बताया गया कि युवाओं में बढ़ती ड्रग लत के कारण 77% अमेरिकी सेना में भर्ती के लिए अयोग्य हो गए हैं.
1 अप्रैल 2025: नई National Drug Control Strategy लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य ड्रग ओवरडोज़ मौतों को रोकना और नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाना है.
31 जुलाई 2025: ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ बढ़ाकर 35% कर दिए. उनका आरोप था कि फेंटेनाइल जैसे ड्रग्स की तस्करी में कनाडा की भूमिका है.
4 सितंबर 2025: ट्रंप ने ड्रग तस्करों को “वॉर एनिमी” (युद्ध शत्रु) घोषित करते हुए कहा कि उन्हें बिना मुकदमे मारने की अनुमति मिलनी चाहिए.
15 सितंबर 2025: ट्रंप ने दावा किया कि 2024 में ड्रग्स के कारण अमेरिका में 300 मिलियन लोगों की मौत हुई, हालांकि यह दावा वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाता.
CDC (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) के अनुसार, 2024 में 79,383 अमेरिकी नागरिकों की मौत ड्रग ओवरडोज से हुई थी.
भारत समेत 23 देशों को जिम्मेदार ठहराया
ट्रंप प्रशासन ने जिन 23 देशों को ड्रग तस्करी और अवैध ड्रग उत्पादन में लिप्त माना है, उनमें शामिल हैं:
इन देशों को ‘प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन रिपोर्ट’ में सूचीबद्ध किया गया है, जिसे 15 सितंबर को अमेरिकी संसद में पेश किया गया. इस रिपोर्ट में कहा गया कि इन देशों से अवैध ड्रग्स की सप्लाई अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है.
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