मॉस्को/कीव: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के नए चरण में प्रवेश कर चुका है. ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक प्रमुख गैस प्रोसेसिंग संयंत्र पर ड्रोन हमला किया, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई. इस हमले के कारण संयंत्र में गैस सप्लाई पूरी तरह बंद करनी पड़ी है.
यह हमला रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र में हुआ, जो कजाखस्तान की सीमा के पास स्थित है. यह गैस प्रोसेसिंग संयंत्र सरकारी कंपनी गज़प्रोम (Gazprom) के नियंत्रण में है और विश्व के सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग प्लांट्स में गिना जाता है. इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 45 अरब क्यूबिक मीटर बताई जाती है.
ओरेनबर्ग के गवर्नर येवगेनी सोलंतसेव ने बताया कि ड्रोन हमले से संयंत्र के एक वर्कशॉप क्षेत्र में आग लगी, जिससे कुछ हिस्से को क्षति पहुंची है. हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट्स में किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है.
कजाखस्तान की गैस सप्लाई बाधित
कजाख ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस हमले के बाद ओरेनबर्ग प्लांट अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. परिणामस्वरूप, कजाखस्तान से रूस की ओर आने वाली गैस की प्रोसेसिंग रुक गई है, जिससे सप्लाई में व्यवधान उत्पन्न हुआ है. मंत्रालय ने इसे “तकनीकी आपातस्थिति” बताते हुए कहा कि प्लांट को फिर से चालू करने में समय लग सकता है.
यूक्रेनी सैन्य सूत्रों ने दावा किया कि ड्रोन हमले में संयंत्र के कई हिस्सों में भीषण आग लगी और मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट को गंभीर नुकसान पहुंचा है. हालांकि रूस की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के लगातार हमले
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों, गैस संयंत्रों और ऊर्जा भंडारण केंद्रों को बार-बार निशाना बनाया है. इन हमलों का उद्देश्य रूस की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के ड्रोन हमले रूस की ऊर्जा निर्यात प्रणाली पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जो उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.
रूस की तेल रिफाइनरियों पर भी वार
यूक्रेनी सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने नोवोकुइबिशेव्स्क ऑयल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया. इस हमले के बाद वहां आग लग गई और प्रमुख रिफाइनिंग यूनिट क्षतिग्रस्त हुई. यह संयंत्र समारा क्षेत्र में स्थित है और रूस के सबसे महत्वपूर्ण रिफाइनिंग हब्स में से एक माना जाता है.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि उनकी वायु सेना ने शनिवार की रात कुल 45 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, जिनमें से 12 समारा क्षेत्र, 1 ओरेनबर्ग, और 11 सारातोव क्षेत्र में नष्ट किए गए. वहीं, यूक्रेन की वायुसेना का कहना है कि रूस ने रात में 62 ड्रोन यूक्रेन की दिशा में भेजे थे, जिनमें से 40 ड्रोन या तो मार गिराए गए या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के कारण रास्ता भटक गए.
अमेरिका में यूक्रेन युद्ध को लेकर हलचल
इस बीच, अमेरिका में यूक्रेन युद्ध को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यूक्रेन को युद्ध समाप्त करने के लिए रूस को कुछ क्षेत्र छोड़ने पड़ सकते हैं.
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बिना किसी भूभाग पर कब्जा किए युद्ध समाप्त करने को तैयार होंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, "वो कुछ न कुछ तो लेंगे ही. उन्होंने इतनी लंबी लड़ाई लड़ी है और कुछ इलाकों पर नियंत्रण हासिल किया है."
ट्रंप ने आगे कहा, "हम (अमेरिका) ही एकमात्र ऐसा देश हैं जो युद्ध जीतने के बाद भी वहां से लौट जाता है." यह बयान उनके पिछले बयानों से भिन्न है, क्योंकि हाल के हफ्तों में उन्होंने रूस की नीतियों पर असहमति जताई थी और यूक्रेन को अधिक सैन्य मदद देने के संकेत दिए थे.
टॉमहॉक मिसाइलों पर अनिश्चितता
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अभी यूक्रेन को टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें देने पर अंतिम फैसला नहीं कर पाया है. उन्होंने कहा, "हमें अपनी सुरक्षा के लिए भी हथियार चाहिए. सब कुछ हम यूक्रेन को नहीं दे सकते."
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका टॉमहॉक मिसाइलें उपलब्ध कराता है, तो यह रूस पर दबाव बढ़ाने का एक बड़ा कदम साबित होगा, क्योंकि इन मिसाइलों की रेंज मॉस्को तक पहुंच सकती है.
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