गुरुवार की रात यूक्रेन ने रूस के खिलाफ एक बहुत ही व्यापक ड्रोन हमला किया, जिसमें रूसी वायु रक्षा प्रणाली को लगभग 221 ड्रोन रोकने पड़े. रूस का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है, जो मई के बाद हुआ है, जब 524 ड्रोन हमले दर्ज किए गए थे.
आधे से अधिक ड्रोन ब्रांस्क और स्मोलेंस्क क्षेत्रों में रोके गए. ये क्षेत्र रूस के पश्चिमी हिस्सों में आते हैं. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले का मकसद ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनी लुकोइल के संयंत्रों को निशाना बनाना था. इसके अतिरिक्त, प्रिमोर्स्क के बाल्टिक बंदरगाह पर खड़े एक तेल टर्मिनल जहाज में भी आग लगी. अच्छी बात यह है कि कोई हताहत या तेल रिसाव नहीं हुआ.
पोलैंड हमले के बाद की तकरार
इस आक्रमण को यूक्रेन की ओर से एक तरह से जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि दो दिन पहले रूस ने पोलैंड पर हमला किया था. पोलैंड ने आरोप लगाया कि रूसी सेना ने रात को 415 ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों से हमला किया, जिसके कारण हवाई अड्डे बंद करने पड़े और नागरिक इलाकों में भय व्याप्त हो गया.
सीमा पर ड्रोन युद्ध: एक नई चुनौति
यूक्रेन की ओर से यह हमला रूसी हमलों के सिलसिले के बीच आया है. यूक्रेन का दावा है कि पिछले हफ्तों में रूस ने 800 से ज्यादा ड्रोन हमले किए हैं. ड्रोन अब सीमाएँ पार कर उपयोग में आ रहे हैं, जिससे हमले की दूरी और भय दोनों बड़े हैं. मॉस्को, कलुगा, नोवगोरोड जैसे इलाकों में निशाना बनाए जाने की खबरें मिल रही हैं.
स्थिति तनाव बढ़ा, नुकसान कम
हमलों के बाद कई स्थानों पर मलबा बिखरा मिला, लेकिन रूसी अधिकारियों ने जोर दिया कि कोई आम जनता हताहत नहीं हुई. सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं और पूरे मामले की जांच जारी है. गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, हथियारों के साक्ष्यों की पड़ताल हो रही है.
यह भी पढ़ें: अदावती रुख अपना कर क्या ट्रंप के लिए आसान था भारत पर टैरिफ लगाना? बिगड़ते रिश्तों पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति