अदावती रुख अपना कर क्या ट्रंप के लिए आसान था भारत पर टैरिफ लगाना? बिगड़ते रिश्तों पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए भारी-भरकम 50% टैरिफ को लेकर एक बार फिर खुलकर बयान दिया है. उन्होंने माना कि यह फैसला न केवल कठिन था, बल्कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव भी पैदा हुआ.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए भारी-भरकम 50% टैरिफ को लेकर एक बार फिर खुलकर बयान दिया है. उन्होंने माना कि यह फैसला न केवल कठिन था, बल्कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव भी पैदा हुआ. ट्रंप के मुताबिक, यह कदम उन्होंने रूस से तेल खरीद को रोकने के उद्देश्य से उठाया था, क्योंकि भारत रूस का सबसे बड़ा तेल ग्राहक बना हुआ है.

शुक्रवार, 12 सितंबर को मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने माना कि भारत पर टैरिफ लगाने से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है. उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि इस फैसले से नुकसान हुआ है. परंतु कुछ फैसले देशहित में लेना ही पड़ते हैं. यह कदम मैंने पहले ही उठा लिया था. यह समस्या अमेरिका से ज्यादा यूरोप के लिए गंभीर है.”

टैरिफ से दबाव बनाने की कोशिश

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान कई देशों पर आयात शुल्क बढ़ाया गया, जिसमें भारत प्रमुख रूप से शामिल रहा. शुरुआत में उन्होंने भारत पर 25% का टैरिफ लगाया, लेकिन रूस से तेल खरीद जारी रहने पर इसे और 25% बढ़ाकर कुल 50% कर दिया गया. हालांकि, इन आर्थिक दबावों के बावजूद भारत अपने रुख पर अडिग रहा. भारत सरकार ने साफ कर दिया कि वह राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगी और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगी.

मोदी को बताया "सबसे अच्छा दोस्त"

भारत के खिलाफ सख्त रुख के बावजूद ट्रंप ने हाल के समय में अपने बयानों में मुलायम लहजा अपनाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "सबसे अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर सकारात्मक बातचीत चल रही है. ट्रंप ने यह भी कहा कि वे मोदी से जल्द मुलाकात की योजना बना रहे हैं और उन्हें भरोसा है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं “सार्थक परिणाम” लेकर आएंगी.

नए राजदूत ने दिए संकेत

ट्रंप द्वारा भारत के लिए नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि अगले सप्ताह एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन बुलाया गया है. बातचीत में तेजी लाई जा रही है और व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हो रही है.

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