ब्रिटेन सरकार नागरिक पहचान के तरीके में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. नई डिजिटल आईडी योजना के तहत सरकार उन सभी लोगों के लिए एक ऐप-आधारित पहचान प्रणाली शुरू करने जा रही है जो देश में काम करना या संपत्ति किराए पर लेना चाहते हैं.
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ संकेत दिया है कि मौजूदा संसद का कार्यकाल खत्म होने तक यानि 2029 तक डिजिटल आईडी के बिना ब्रिटेन में काम करना संभव नहीं होगा.इस योजना का उद्देश्य जहां एक ओर सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज बनाना है, वहीं इसका एक प्रमुख लक्ष्य अवैध प्रवास और बिना दस्तावेज वाले रोजगार को रोकना भी है. हालांकि, इस कदम को लेकर देश के भीतर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है.
क्या है डिजिटल आईडी योजना?
डिजिटल आईडी एक मोबाइल-आधारित पहचान प्रणाली होगी जो कागजी दस्तावेजों की जगह लेगी. यह ऐप की तरह काम करेगी, जिसमें नागरिक की ज़रूरी जानकारियां जैसे—नाम, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, निवास की स्थिति और एक तस्वीर दर्ज होगी. इसके अलावा, सिस्टम में बायोमेट्रिक सुरक्षा, अत्याधुनिक एन्क्रिप्शन और रियल-टाइम वेरिफिकेशन जैसी तकनीकी विशेषताएं होंगी. सरकार का कहना है कि अगर फोन चोरी या खो जाता है, तो आईडी को तत्काल रद्द किया जा सकेगा और नया आईडी जारी किया जा सकेगा.
क्यों लाई जा रही है यह योजना?
ब्रिटेन लंबे समय से अनियमित प्रवास और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों की समस्या से जूझ रहा है. खासकर हाल के वर्षों में, बड़ी संख्या में प्रवासी छोटी नावों से फ्रांस के रास्ते ब्रिटेन में दाखिल हुए हैं. सरकार का मानना है कि डिजिटल आईडी से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल वैध दस्तावेज़ रखने वाले लोग ही काम पा सकें. वर्तमान में कई लोग किसी और का नेशनल इंश्योरेंस नंबर या नकली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं. डिजिटल आईडी से 'राइट टू वर्क' यानी काम करने के अधिकार की जांच करना आसान होगा और कंपनियां अब सिर्फ दस्तावेजों के भरोसे किसी को नौकरी नहीं दे सकेंगी.
किन लोगों के लिए अनिवार्य होगी डिजिटल आईडी?
यह प्रणाली उन सभी लोगों के लिए अनिवार्य होगी जो नौकरी करना चाहते हैं. किराए पर मकान लेना चाहते हैं. कानूनी निवासी हैं और किसी भी सरकारी सेवा से लाभ लेना चाहते हैं. हालांकि, छात्रों, पेंशनभोगियों और बच्चों के लिए यह वैकल्पिक होगी. स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच के लिए भी यह जरूरी नहीं होगी.
सरकार का दावा है कि इससे:
डिजिटल आईडी को लेकर क्या है विरोध?
इस योजना को लेकर भारी विरोध भी सामने आ रहा है. निजता और नागरिक स्वतंत्रता के पक्षधर समूहों ने इसे जनता की गोपनीयता और अधिकारों पर हमला बताया है.करीब 16 लाख नागरिकों ने डिजिटल आईडी के विरोध में ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर हस्ताक्षर किए हैं. कई तकनीकी विशेषज्ञों ने सिस्टम की साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर चिंता जताई है. विपक्षी पार्टियां, खासतौर पर लिबरल डेमोक्रेट्स, इसे "महंगा और अनावश्यक" कदम बता रही हैं.कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद केमी बेडेनोच ने कहा है कि सरकार को इस योजना पर आगे बढ़ने से पहले "राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस" करानी चाहिए.
चुनौती और संभावना दोनों
डिजिटल आईडी प्रणाली ब्रिटेन की पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है. जहां एक ओर इससे सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी और डिजिटल हो सकेंगी, वहीं यह नागरिक स्वतंत्रता और डेटा प्राइवेसी जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी छूती है.अब यह देखना बाकी है कि सरकार किस तरह नागरिकों के विश्वास को बनाए रखते हुए इस योजना को लागू करती है.
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