क्या गाजा के खिलाफ खड़ा होगा इजरायल? पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने दिया जवाब

गाजा में जारी हिंसा और मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए हाल ही में सामने आई अंतरराष्ट्रीय शांति योजना पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आई है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसाक डार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि गाजा में मुस्लिम देशों की प्रस्तावित शांति सेना के हिस्से के तौर पर पाकिस्तानी सैनिक भेजने का निर्णय देश का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा.

Pakistan will who support gaza foreign minister ishaq dar
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गाजा में जारी हिंसा और मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए हाल ही में सामने आई अंतरराष्ट्रीय शांति योजना पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आई है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसाक डार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि गाजा में मुस्लिम देशों की प्रस्तावित शांति सेना के हिस्से के तौर पर पाकिस्तानी सैनिक भेजने का निर्णय देश का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा.


इस्लामाबाद में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इसाक डार ने कहा कि हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान गाजा मुद्दे को लेकर आठ मुस्लिम देशों के नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक अहम बैठक हुई. डार ने कहा, “प्रस्तावित योजना का उद्देश्य गाजा में युद्धविराम लागू करना, स्थायी शांति स्थापित करना और एक स्वतंत्र फलस्तीनी शासन को अस्तित्व में लाना है. इस पूरे प्रक्रिया की निगरानी एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठन द्वारा की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में फलस्तीनी स्वयं भी शामिल होंगे.”

क्या पाकिस्तान गाजा में भेजेगा अपनी सेना?

पत्रकारों के सवालों के जवाब में डार ने कहा, “गाजा में फलस्तीनी कानून व्यवस्था की एजेंसियां काम करती रहेंगी. इन्हें सहयोग देने के लिए अतिरिक्त शांति बल तैनात किया जाएगा. इंडोनेशिया ने पहले ही 20,000 सैनिक भेजने की पेशकश की है. मुझे विश्वास है कि पाकिस्तान का नेतृत्व भी इस मसले पर कोई ठोस निर्णय अवश्य लेगा.” हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन सरकार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है.

ट्रंप के साथ बैठक में क्या हुआ?

गाजा को लेकर ट्रंप और मुस्लिम नेताओं के बीच हुई बैठक के संबंध में विदेश मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य न केवल हिंसा को रोकना है, बल्कि मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, जबरन विस्थापित किए गए गाजा निवासियों की सुरक्षित वापसी और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना भी है. उन्होंने कहा, “यह प्रयास युद्ध नहीं, शांति के लिए है. गाजा के लोग दशकों से संघर्ष और पीड़ा झेल रहे हैं. ऐसे में यह वैश्विक जिम्मेदारी बन जाती है कि उन्हें एक स्थायी और सुरक्षित भविष्य दिया जाए.”

पाकिस्तान की स्थिति क्या दर्शाती है?

पाकिस्तान हमेशा से फलस्तीन के समर्थन में रहा है, और अब एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे पर उसकी भूमिका पर निगाहें टिकी हुई हैं. यदि पाकिस्तान इस शांति सेना का हिस्सा बनता है, तो यह उसकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान का संकेत होगा.

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