Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से सामने आया एक सनसनीखेज हत्याकांड अब अपने कानूनी अंजाम तक पहुंच गया है. महिदपुर तहसील कोर्ट ने दोस्त की हत्या के मामले में दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि एक नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है. आरोपियों ने दोस्त से लिए गए उधार पैसे वापस न करने पड़ें, इसलिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी. तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिला है. यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने दोस्ती जैसे भरोसेमंद रिश्ते को कलंकित कर दिया है.
खेत में बोरे में मिली थी सड़ी-गली लाश
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त 2023 को उज्जैन के राघवी थाना क्षेत्र में रहने वाले अंतरसिंह के खेत से बोरे में बंद एक व्यक्ति की लाश मिली थी. पूरी तरह सड़ चुकी लाश को पुलिस ने तुरंत कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके. साथ ही मृतक की पहचान करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई. जांच के दौरान मृत व्यक्ति की पहचान खेड़ा खजुरिया गांव निवासी नरेंद्र राजपूत के रूप में हुई. इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और हत्या के पीछे की वजह तलाशनी शुरू कर दी.
रची गई खौफनाक साजिश
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि नरेंद्र ने कुछ समय पहले अपने दोस्त सुनील परमार को डेढ़ लाख रुपए उधार दिए थे. नरेंद्र लगातार अपने पैसे वापस मांग रहा था, लेकिन सुनील रकम लौटाने के लिए तैयार नहीं था. राघवी थाना पुलिस ने आरोपी के मोबाइल की कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने हत्याकांड की बात कबूल कर ली. सुनील ने बताया कि पैसे न चुकाने पड़ें, इसलिए उसने बलराम उर्फ बल्लू परिहार और एक अन्य नाबालिग को लालच देकर नरेंद्र की हत्या की योजना बनाई. 7 अगस्त 2023 को नरेंद्र को खेड़ा खजुरिया बुलाया गया, जहां तीनों आरोपियों ने पहले उस पर तलवार से हमला किया और चिल्लाने पर उसका मुंह दबा दिया. बाद में पानी से भरे गड्ढे में डुबोकर उसकी हत्या कर दी गई.
अदालत ने सुनाई उम्रकैद
हत्या के बाद भी आरोपियों ने शव पर नजर बनाए रखी. गड्ढे से बाहर आने पर शव को पत्थर से बांधकर दोबारा पानी में डुबो दिया गया. इसके बाद 9 अगस्त को पकड़े जाने के डर से लाश को बोरे में भरकर अंतरसिंह के खेत में फेंक दिया गया था. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की गंभीरता से जांच की. इस पूरे प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश सनोडिया की अदालत में हुई. अदालत ने सभी साक्ष्यों और पुलिस जांच के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी माना. बलराम उर्फ बल्लू परिहार और सुनील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया गया.
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