एक उदयगिरी तो दूसरा हिमगिरी..., नौसेना में शामिल होंगे नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रीगेट; टेंशन में चीन-PAK!

भारत की समुद्री ताकत में अब नया अध्याय जुड़ने वाला है. 26 अगस्त को देश के समुद्री इतिहास में एक और ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज किया जाएगा, जब दो अत्याधुनिक स्वदेशी स्टेल्थ फ्रीगेट — हिमगिरी और उदयगिरी — भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेंगे.

Two Nilgiri Stealth class frigate inducted to visakhapatnam
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भारत की समुद्री ताकत में अब नया अध्याय जुड़ने वाला है. 26 अगस्त को देश के समुद्री इतिहास में एक और ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज किया जाएगा, जब दो अत्याधुनिक स्वदेशी स्टेल्थ फ्रीगेट — हिमगिरी और उदयगिरी — भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेंगे. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सामुद्रिक जुगलबंदी भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती बन चुकी है.

विशाखापत्तनम में आयोजित एक विशेष समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दोनों युद्धपोतों को भारतीय नौसेना को औपचारिक रूप से सौंपेंगे. इस समारोह के साथ ही भारत की नौसैनिक क्षमताएं न केवल मजबूत होंगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और भी सशक्त हो जाएगी.

‘नीलगिरी क्लास’ वॉरशिप: आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

‘प्रोजेक्ट 17A’ के तहत विकसित किए जा रहे नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रीगेट्स भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम हैं. इस परियोजना के तहत कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रीगेट बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और तीन का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया जा रहा है. साल 2015 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के सभी वॉरशिप 2019 से 2023 के बीच लॉन्च किए जा चुके हैं. वर्तमान में चार फ्रीगेट्स का समुद्री परीक्षण जारी है. इनमें से तीन युद्धपोत साल 2025 तक नौसेना में शामिल हो जाएंगे.

तकनीक और ताकत का मेल क्या खास है इन फ्रीगेट्स में?

हिमगिरी और उदयगिरी जैसी स्टेल्थ फ्रीगेट्स आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित हैं और बहुआयामी युद्ध क्षमताओं से लैस हैं:

  • एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस वॉरफेयर: सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल से लैस
  • एंटी-एयर वॉरफेयर: बराक-8 लॉन्ग रेंज मिसाइल और अत्याधुनिक एयर डिफेंस गन
  • एंटी-सबमरीन वॉरफेयर: वरुणास्त्र टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर
  • सेंसर्स और डिटेक्शन सिस्टम: मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार, सोनार, और उन्नत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम

हेलिकॉप्टर हैंगर: दो हेलिकॉप्टरों के लिए डेक और हेली-हैंगर की सुविधा

ये युद्धपोत लगभग 6,700 टन वजनी हैं और 30 नॉट की रफ्तार से समुद्र में चल सकते हैं. इनका डिजाइन पूरी तरह भारतीय नौसेना वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है और 75% से अधिक उपकरण स्वदेशी कंपनियों द्वारा निर्मित हैं.

समुद्री पड़ोसियों को मिल रहा करारा जवाब

चीन और पाकिस्तान की संयुक्त नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत की ओर से ऐसे अत्याधुनिक वॉरशिप की तैनाती इस क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को नया मोड़ दे रही है. जहां पाकिस्तान चीनी मदद से अपनी नौसेना का विस्तार कर रहा है, वहीं भारत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से अपनी नौसेना को मजबूती प्रदान कर रहा है. ये स्टेल्थ फ्रीगेट न सिर्फ भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे, बल्कि हिंद महासागर में भारत की व्यापारिक और रणनीतिक रुचियों की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएंगे.

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