Twisha Sharma Case: कानून की आंखें बंद हो सकती हैं. लेकिन न्याय की आत्मा कभी नहीं सोती. जब व्यवस्थाएं मौन हो जाए, जब जांच के रास्तों पर असूख का पहरा बैठ जाए, तब एक बेबस परिवार की चीखें बंद कब्रों में दम तोड़ने लगे. उस वक्त देश की सबसे बड़ी अदालत को ढाल बनकर खड़ा होना पड़ता है. भोपाल की बेटी तिषा शर्मा की संदेहास्पद मौत का मामला अब महज एक क्राइम फाइल नहीं है बल्कि देश की व्यवस्था और उनकी जांच की खामियां और एक परिवार के आंसुओं का वो महासंग्राम बन गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. दिल्ली एम्स के शीर्ष डॉक्टरों का भोपाल जाकर दोबारा पोस्टमार्टम करना यह कड़ियां गवाही दे रही हैं कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसा है जिसे छुपाने की पूरी कोशिश की गई और इन सबके बीच सामने आया वो आखिरी मोबाइल संदेश जो रूह कपा देते हैं.
ये भी पढ़ें- I Love Modi... दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सर्जियो गोर ने ट्रंप को किया कॉल, कही ये बात; देखें VIDEO