भारत और तुर्की के बीच रिश्ते धीरे-धीरे और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. खासकर जब से तुर्की ने कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का साथ देना शुरू किया है, तब से भारत ने भी अब अपने तरीके से जवाब देना शुरू कर दिया है — और यह जवाब कूटनीतिक मंच से हटकर अब सैन्य सौदों और रणनीतिक साझेदारी की शक्ल ले रहा है.
तुर्की का साथ छोड़ भारत की ओर झुक रहा है आर्मेनिया
भारत ने हाल के वर्षों में आर्मेनिया के साथ अपने रक्षा रिश्तों को गहरा किया है. जानकारी के मुताबिक, भारत और आर्मेनिया के बीच अब तक करीब 1.5 अरब डॉलर के रक्षा समझौते हो चुके हैं. इन सौदों में शामिल हैं:
क्यों आर्मेनिया को चाहिए भारत के हथियार?
आर्मेनिया के लिए यह सिर्फ रक्षा खरीददारी नहीं है, बल्कि ये सौदे अस्तित्व की लड़ाई का हिस्सा हैं. 2020 में नागार्नो-काराबाख युद्ध में आर्मेनिया को अजरबैजान के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा था, और अजरबैजान को उस युद्ध में हथियार और रणनीतिक समर्थन तुर्की से मिला था. ऐसे में अब जब भारत आर्मेनिया को आधुनिक हथियार दे रहा है, तो यह तुर्की को सीधा जवाब माना जा रहा है.
भारत बन रहा है आर्मेनिया का भरोसेमंद रक्षा भागीदार
SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच आर्मेनिया की हथियार खरीद का 43% हिस्सा भारत से आया है. यह भारत के लिए भी एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि है, क्योंकि अब वह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
तुर्की की नई चाल: S-400 छोड़ F-35 की ओर झुकाव?
तुर्की ने हाल ही में अपने ‘स्टील डोम’ वायु रक्षा प्रणाली की घोषणा की है. यह एक एडवांस मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें देश की विभिन्न रक्षा कंपनियों की टेक्नोलॉजी शामिल है. तुर्की अब अमेरिका के F-35 लड़ाकू जेट प्रोग्राम में दोबारा शामिल होने की कोशिश कर रहा है. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि तुर्की अब रूस से लिए गए S-400 सिस्टम को किनारे करने की योजना बना रहा है.
भारत का नजरिया: S-400 पर भरोसा, F-35 में रुचि नहीं
दूसरी ओर, भारत अभी भी रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर भरोसा कर रहा है. भले ही अमेरिका ने F-35 का अनौपचारिक प्रस्ताव दिया हो, लेकिन भारत ने इस पर कोई खास रुचि नहीं दिखाई है. इसकी एक वजह ये भी है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है और किसी एक धड़े पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहता.
तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ और भारत की चिंता
तुर्की और पाकिस्तान के बीच रिश्ते हमेशा से गहरे रहे हैं. चाहे वो कश्मीर पर बयानबाज़ी हो या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ माहौल बनाना — तुर्की अक्सर पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया और भारत को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी.
भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ अब बन रही है ‘स्मार्ट पावर’
भारत अब केवल बयानबाज़ी से जवाब नहीं दे रहा, बल्कि रणनीतिक साझेदारियों और हथियारों की डिलीवरी के ज़रिए अपने विरोधियों को कूटनीतिक रूप से घेरने की नीति अपना रहा है. आर्मेनिया को अत्याधुनिक हथियार देकर भारत न सिर्फ एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार बन रहा है, बल्कि तुर्की और पाकिस्तान के गठबंधन को भी परोक्ष रूप से चुनौती दे रहा है.
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