चीन को भी नहीं बख्शेगा अमेरिका! इशारों-इशारों में ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और ब्राजील के खिलाफ बड़ी आर्थिक कार्रवाई करते हुए भारी-भरकम टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है. हालांकि ट्रंप का इशारा साफ है कि ये शुरुआत भर है.

Trump will impose tariff on china after india
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और ब्राजील के खिलाफ बड़ी आर्थिक कार्रवाई करते हुए भारी-भरकम टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है. हालांकि ट्रंप का इशारा साफ है कि ये शुरुआत भर है. आगे और देश इस फेहरिस्त में आ सकते हैं, जिनमें चीन का नाम प्रमुख है. भारत ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ सवाल खड़ा किया है. "जब रूस से तेल चीन और तुर्किए भी ले रहे हैं, तो सिर्फ भारत को क्यों निशाना बनाया गया?"

ट्रंप का इशारा चीन की ओर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,हो सकता है कि हम और देशों पर भी टैरिफ लगाएं. अभी तय नहीं है, लेकिन भारत के साथ हमने कदम उठाया है. आगे चीन भी इस सूची में आ सकता है.ट्रंप के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब रूस से व्यापार करने वाले देशों पर दबाव बढ़ा रहा है और भारत इसके शुरुआती निशानों में शामिल है.

भारत की तीखी आपत्ति, बोला सिर्फ हम क्यों?

भारत सरकार ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि रूस से कच्चा तेल खरीदने का निर्णय भारत की ऊर्जा जरूरतों और घरेलू बाजार के दबावों के आधार पर लिया गया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत के उन फैसलों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जो भारत ने अपने लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिए हैं. यह कदम अनुचित और अविवेकपूर्ण है.

चीन और तुर्किए को क्यों छोड़ा गया

MEA ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन और तुर्किए पर भी सवाल खड़े किए हैं. भारत का कहना है कि रूस से तेल आयात केवल वह नहीं कर रहा—चीन और तुर्किए जैसे कई देश अब भी रूस से बड़े पैमाने पर तेल व ऊर्जा उत्पाद खरीद रहे हैं. फिर भी, सिर्फ भारत को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ रहा है. मंत्रालय ने इस भेदभाव को लेकर अमेरिका के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए कहा हमने यह स्पष्ट किया है कि हमारा आयात पूरी तरह बाजार के कारकों और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है. यदि रूस से व्यापार को ही मुद्दा बनाया जा रहा है, तो क्या यही मापदंड अन्य देशों पर लागू नहीं होते?

भारत का रुख– राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं

भारत ने यह भी दोहराया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, "हम अमेरिका से इस फैसले पर पुनर्विचार की अपेक्षा करते हैं, लेकिन साथ ही भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा."

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