"लेट हुए, तो डील खत्म", हमास को ट्रंप ने फिर धमकाया; गाजा को लेकर कर दिया बड़ा ऐलान

Trump Warns Hamas: मध्य पूर्व एक बार फिर एक संभावित मोड़ पर खड़ा है, और इस बार उसका रिमोट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है. एक ओर ट्रंप का 20-प्वाइंट शांति प्रस्ताव है, जिसमें गाजा के लिए एक नए प्रशासनिक ढांचे से लेकर बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता की योजना शामिल है.

Trump threatens Hamas again Made a big announcement regarding Gaza
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Trump Warns Hamas: मध्य पूर्व एक बार फिर एक संभावित मोड़ पर खड़ा है, और इस बार उसका रिमोट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है. एक ओर ट्रंप का 20-प्वाइंट शांति प्रस्ताव है, जिसमें गाजा के लिए एक नए प्रशासनिक ढांचे से लेकर बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता की योजना शामिल है. दूसरी ओर, ज़मीन पर हालात हैं, जहां हर दिन मौतें हो रही हैं, विस्फोट हो रहे हैं, और समझौते की भाषा की जगह अब भी बमों की आवाज़ गूंज रही है.

ट्रंप का संदेश सीधा है, "लेट हुए, तो डील खत्म". उनके इस बयान के कुछ ही घंटों के भीतर इजरायल ने गाजा सिटी में ऑपरेशन रोकने का आदेश तो दिया, लेकिन हकीकत यह है कि हमलों का सिलसिला थमा नहीं.

ट्रंप की ‘शांति या शक्ति’ नीति

ट्रंप ने अपने Truth Social पोस्ट में हमास को सीधी चेतावनी दी, अगर उसने तुरंत सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो समझौते की सारी बुनियाद खत्म मानी जाएगी.
उन्होंने इजरायल की भी तारीफ की कि उसने आंशिक रूप से बमबारी रोककर बातचीत को मौका दिया. लेकिन ट्रंप की “शर्तों वाली शांति” कई सवाल खड़े करती है, क्या यह डील वास्तव में गाजा के लिए है, या अमेरिका के लिए एक भविष्य की राजनीति का प्लैटफॉर्म?

हमास का जवाब, हां, लेकिन शर्तों के साथ

हमास ने 48 बंधकों को छोड़ने और गवर्निंग पावर छोड़ने पर सहमति जताई है, लेकिन उसने ट्रंप प्लान की कुछ शर्तों पर आगे चर्चा की बात कही है. ट्रंप ने इस रुख को "पॉजिटिव सिग्नल" बताया है. इस्लामिक जिहाद ग्रुप (PIJ) का समर्थन मिलने के बाद लग रहा है कि गाजा के सभी बड़े गुट तैयार हैं, लेकिन कितनी देर तक?

इजरायल की सियासत में उबाल

प्रधानमंत्री नेतन्याहू अब दो मोर्चों पर दबाव में हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप का समर्थन और देश के भीतर अपने राजनीतिक विरोधियों की चेतावनी. विपक्षी नेता लैपिड ने इस पहल को 'अवसर' बताया है और बंधकों की रिहाई के लिए सहयोग की बात कही है. हालांकि, नेगोशिएशन टीम को निर्देश मिल चुके हैं, लेकिन ग्राउंड पर कोई ठोस कदम अभी नजर नहीं आ रहा.

कागज़ पर वादा, जमीन पर मुश्किल

ट्रंप का 20-प्वाइंट प्लान एक नई शुरुआत का खाका जरूर पेश करता है, लेकिन कुछ बिंदु बेहद विवादास्पद और जटिल हैं:

  • 72 घंटे में बंधकों की रिहाई
  • बदले में 1000 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई
  • गाजा से इजरायली सेना की वापसी
  • हमास का पूरी तरह से निःशस्त्रीकरण
  • ट्रांजिशनल अथॉरिटी की निगरानी खुद ट्रंप द्वारा

यानी अमेरिका सिर्फ मध्यस्थ नहीं, प्रत्यक्ष नियंत्रक बनना चाहता है, जो इस डील को और भी राजनीतिक बना देता है.

शांति की उम्मीद या सिर्फ बयानबाज़ी?

जहां एक तरफ बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘शांति’ की बातें हो रही हैं, वहीं गाजा में हर दिन विस्फोट हो रहे हैं, लोग मर रहे हैं, और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

  • अब तक 67,000 से ज्यादा मौतें
  • 1.7 लाख से अधिक घायल
  • लाखों लोग बेघर
  • भूख, बीमारी, और ब्लॉकेड की मार
  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि गाजा अब मानव त्रासदी की कगार पर है.

क्या यह पीस है या पॉलिटिक्स?

अभी तक की स्थिति बताती है कि ट्रंप और हमास एक-दूसरे के संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं. ट्रंप के बयान सख्त हैं, लेकिन स्थायित्व की कमी है. इजरायल अब भी दो राहे पर खड़ा है, और गाजा हर दिन एक नई त्रासदी से गुजर रहा है. एक नई अंतरराष्ट्रीय बैठक की तैयारी हो रही है, लेकिन क्या उसमें वाकई गाजा की आवाज़ सुनी जाएगी, या फिर सब कुछ फिर से राजनीति की स्क्रिप्ट बनकर रह जाएगा.

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