ट्रंप का फैसले से होगा गाजा में सीजफायर, लेकिन आसान नहीं...क्या ईरान फेरेगा पानी?

गाज़ा पट्टी में महीनों से जारी खूनी संघर्ष को विराम देने की दिशा में आज एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने वाला है. इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज व्हाइट हाउस में मुलाकात कर सकते हैं.

Trump plan to stop war in gaza but iran will fail disrupt
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गाज़ा पट्टी में महीनों से जारी खूनी संघर्ष को विराम देने की दिशा में आज एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने वाला है. इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज व्हाइट हाउस में मुलाकात कर सकते हैं. इस बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें युद्धविराम और बंधकों की रिहाई जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं.

लेकिन तस्वीर इतनी सीधी नहीं है  कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ईरान इस संभावित समझौते में बाधा बन सकता है.

ईरान की गतिविधियों पर ट्रंप की सख़्त टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान गाज़ा संघर्ष को उलझाने की कोशिशों में लगा हुआ है. जुलाई में दिए गए एक बयान में ट्रंप ने आरोप लगाया था कि ईरान, कतर में चल रही सीज़फायर वार्ताओं और बंधकों की रिहाई प्रक्रिया में जानबूझकर हस्तक्षेप कर रहा है.उन्होंने ये भी चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू किया तो अमेरिका "उसे पूरी तरह तबाह कर देगा". हालांकि व्हाइट हाउस की तरफ़ से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

ईरान का रुख: “हम शांति का समर्थन करते हैं”

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 27 सितंबर को दिए गए एक बयान में कहा कि हम गाज़ा में किसी भी मानवीय संघर्ष विराम का समर्थन करेंगे. अगर कोई समझौता इस त्रासदी को रोक सकता है तो हम उसका स्वागत करते हैं. यह बयान भले ही शांति का पक्ष लेता हो, लेकिन मध्यस्थता के दायरे में ईरान की भूमिका को लेकर संदेह बना हुआ है, खासतौर पर अमेरिका और इज़रायल के नजरिए से.

हमास ने कहा: "कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला"

वहीं दूसरी ओर हमास ने साफ किया है कि उन्हें अभी तक युद्धविराम को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है. हालांकि अमेरिकी मीडिया में लीक हुई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शांति समझौता होते ही 48 घंटे के भीतर सभी बंधकों की रिहाई का प्रावधान होगा, बदले में इज़रायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, जिनमें कई उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं. नेतन्याहू ने भी पुष्टि की है कि डील अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंची है.

ईरान-हमास के रिश्तों की पड़ताल

यहां एक दिलचस्प बात यह है कि ईरान एक शिया देश है जबकि हमास एक सुन्नी इस्लामी संगठन है. धार्मिक मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच गहरी सामरिक साझेदारी है. ईरान ने हमास को वर्षों से हथियार, वित्तीय मदद और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है, ताकि वह इज़रायल के खिलाफ अपनी रणनीति को अमल में ला सके. हालांकि हमास कई बार ईरान की रणनीतिक रेखाओं से अलग चलता है, लेकिन इसके सशस्त्र धड़े पर ईरान का खासा प्रभाव माना जाता है. हमास की नीतियों और फैसलों में भी ईरानी छाया अक्सर देखी जाती रही है.

क्या युद्धविराम संभव है?

गाज़ा में खूनखराबे को रोकने की वैश्विक कोशिशें तेज़ हो रही हैं. आज व्हाइट हाउस में होने वाली ट्रंप-नेतन्याहू मुलाकात से उम्मीदें बढ़ी हैं. लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब ईरान जैसी ताकतें रचनात्मक भूमिका निभाएं और राजनीतिक एजेंडा थोपने के बजाय मानवीय सरोकारों को प्राथमिकता दें.

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