Tariff On Europe: अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर विरोध करने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक हथियार का सहारा लिया है. ग्रीनलैंड सौदे का विरोध कर रहे यूरोपीय देशों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ नीति को सबसे बड़ा हथियार बना लिया है. इसके चलते अमेरिका और यूरोप के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की आशंका जताई जा रही है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक यूरोपीय सहयोगी देशों से आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है.
President Trump announces tariffs on 8 European nations in a move to reach a deal to acquire Greenland. pic.twitter.com/Bzr8uIZjqF
— America (@america) January 17, 2026
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर घोषणा की कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा. इसके बाद 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा. यह नीति तब तक लागू रहेगी, जब तक अमेरिका और संबंधित देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो जाता.
यूरोप की सैन्य तैनाती से भड़के ट्रंप
ग्रीनलैंड विवाद के बीच यूरोपीय देशों की ओर से वहां सैन्य कर्मियों की तैनाती भी की गई है. इस कदम को राष्ट्रपति ट्रंप ने खतरनाक और उकसावे वाला बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की सैन्य मौजूदगी क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है और हालात को और बिगाड़ सकती है.
डेनमार्क और ग्रीनलैंड में विरोध प्रदर्शन
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के प्रस्तावों के खिलाफ डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों जगह विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़ा कोई भी फैसला वहां के लोगों की सहमति से ही होना चाहिए. उनका साफ संदेश है कि किसी बाहरी दबाव के तहत क्षेत्र का भविष्य तय नहीं किया जा सकता.
NATO और यूरोपीय देशों की चेतावनी
यूरोपीय संघ के कई बड़े देशों ने इस मुद्दे पर डेनमार्क का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका NATO के दायरे में आने वाले किसी क्षेत्र पर सैन्य कब्जे की कोशिश करता है, तो इससे गठबंधन को गंभीर झटका लग सकता है. ब्रिटेन ने भी डेनमार्क के पक्ष में खड़े होने का संकेत दिया है.
बढ़ता तनाव और वैश्विक असर
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव अब केवल कूटनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है. टैरिफ, सैन्य तैनाती और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों ने इस टकराव को और गंभीर बना दिया है. जानकारों का मानना है कि अगर यह विवाद लंबा चला, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, NATO की एकता और वैश्विक राजनीति पर गहराई से पड़ सकता है.
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