अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कई वर्षों बाद आमने-सामने की मुलाकात हुई. दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी थीं और उम्मीद थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर कोई ठोस हल निकल सकता है. लेकिन करीब तीन घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों नेताओं के बीच किसी प्रकार का समझौता नहीं हो सका.
इस बैठक ने फिर से एक बार ट्रंप के चुनावी वादे को याद दिला दिया. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान ट्रंप ने दावा किया था कि अगर वह सत्ता में आते हैं, तो 24 घंटे के भीतर रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को रोक देंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि वर्तमान युद्ध के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन जिम्मेदार हैं.
रूस-यूक्रेन सीजफायर सफल नहीं
हालांकि सत्ता में आने के बाद ट्रंप कई बार कोशिश कर चुके हैं, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष रोकने में सफल नहीं हो पाए. ऐसे में अलास्का में पुतिन के साथ उनकी यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही थी. तीन घंटे तक चली इस बैठक में भी सीजफायर या किसी समझौते पर कोई सहमति नहीं बन सकी, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में निराशा का माहौल है.
ट्रंप होते तो युद्ध नहीं होता
लेकिन इस बैठक के दौरान एक अहम पल यह रहा कि पुतिन ने ट्रंप की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, "आज, जब राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि अगर वह उस समय राष्ट्रपति होते तो युद्ध नहीं होता, मुझे पूरा यकीन है कि ऐसा ही होता." पुतिन ने आगे कहा कि 2022 में अपने पूर्व अमेरिकी सहयोगियों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया था कि शत्रुता को कभी उस बिंदु तक नहीं बढ़ाना चाहिए, जहां से वापसी संभव न हो. उनका यह बयान ट्रंप के लिए एक बड़ी संतोषजनक पुष्टि की तरह माना जा रहा है. तीन घंटे की लंबी बातचीत के बावजूद सीजफायर न बन पाने के बावजूद, पुतिन के इन शब्दों ने ट्रंप के दावे को वैश्विक मंच पर एक राजनीतिक समर्थन का स्वरूप दे दिया है.
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