फ्यूचर मोबिलिटी अब केवल पहियों तक सीमित नहीं रही. जापान मोबिलिटी शो में टोयोटा ने एक ऐसा कॉन्सेप्ट पेश किया है, जो तकनीकी कल्पना की सीमाओं को तोड़ता है. इसका नाम है ‘Walk Me’, एक चार पैरों वाला ऑटोनॉमस (autonomous) मोबिलिटी चेयर, जो वहां चल सकता है जहां पहिए हार मान लेते हैं. टोयोटा का यह क्रांतिकारी इनोवेशन उन लोगों के लिए बनाया गया है जिन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है, ताकि वे सीढ़ियां चढ़ सकें, ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चल सकें या बिना मदद के कार में बैठ सकें.
Walk Me सिर्फ एक चेयर नहीं है, बल्कि यह टोयोटा की रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एर्गोनॉमिक डिज़ाइन की बेहतरीन मिसाल है. इसमें पहियों की जगह चार रोबोटिक लेग्स (पैर) दिए गए हैं, जो अपने आप झुक सकते हैं, उठ सकते हैं और अलग-अलग दिशा में एडजस्ट हो सकते हैं. हर पैर को मुलायम बाहरी मटेरियल से ढका गया है ताकि यूजर्स को एक सुरक्षित और सहज अनुभव मिल सके. कंपनी का कहना है कि, यह तकनीक जानवरों की चाल से प्रेरित है. इसकी मूवमेंट गोट्स (बकरियों) और क्रैब्स (केकड़ों) की तरह बायोमिमेटिक (प्रकृति से इंस्पायर्ड) है, जिससे यह उंची-नीची सतहों, ढलानों, सीढ़ियों और पथरीली राहों पर भी अपना संतुलन बनाए रखता है. इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि, ये हर तरह के सरफेस पर आसानी ये चल सके.
कैसे काम करती है ये तकनीक
टोयोटा वॉक मी में दिए गए आगे के पैर पहले सीढ़ी की ऊँचाई को परखते हैं और चेयर को ऊपर खींचते हैं, जबकि पीछे के पैर उसे धक्का देते हैं. इस दिए गया LiDAR और सेंसर लगातार आसपास की स्थिति को स्कैन करते रहते हैं, ताकि चेयर किसी भी ऑब्जेक्ट या व्यक्ति से न टकराए. हालांकि इसमें बैलेंसिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया है. जो आपात स्थिति में खुद को बैलेंस करने की पूरी कोशिश करता है.
Walk Me का सीट डिज़ाइन पूरी तरह यूजर-सेंट्रिक है. इसका बैकरेस्ट रीढ़ की हड्डी के अनुरूप मुड़ता है, और साइड हैंडल्स से मैन्युअल कंट्रोल दिया गया है. हैंडल घुमाकर दिशा बदली जा सकती है या बटन दबाकर चेयर को आगे-पीछे किया जा सकता है.
सबसे खास बात यह है कि, इसे वॉइस कमांड से भी कंट्रोल किया जा सकता है. “किचन” या “फास्टर” जैसी वॉयस कमांड पर Walk Me खुद रास्ता तय करता है और स्पीड एडजस्ट करता है. इसमें ग्लौबल लैंग्वेज को शामिल किए जाने पर कंपनी काम कर रही है. अभी ये प्रोटोटाइप है तो प्रोडक्शन वर्जन तक पहुंचते पहुंचते इसमें कई बदलाव संभव है.
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