हमारे शरीर में कोशिकाओं की नियंत्रित बढ़ोत्तरी जीवन के लिए आवश्यक होती है, लेकिन जब यह बढ़ोत्तरी अनियंत्रित हो जाती है, तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी जन्म लेती है. कैंसर का इलाज आज भी विश्व के वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है. हालांकि, कई खतरनाक वायरस और जीवाणु हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि फफूंद यानी फंगल जीवाणु भी एक गंभीर खतरा बन सकते हैं. खास बात यह है कि मिस्र के रहस्यमयी तूतनखामुन की कब्र से निकले जहरीले फफूंद ने कई शोधकर्ताओं की जान ली थी, लेकिन आज वही फफूंद कैंसर के इलाज में नई उम्मीद बनकर उभरा है.
तूतनखामुन की कब्र और मौतों का रहस्यलासा
मिस्र के पिरामिडों और कब्रों को अक्सर शापित माना जाता है. ऐसी मान्यताएं न केवल आम लोगों में बल्कि शोधकर्ताओं में भी चर्चा का विषय रही हैं. तूतनखामुन की कब्र से जुड़ी मौतें भी इसी रहस्यमयी श्रंखला का हिस्सा थीं. यह मौतें एक साथ नहीं हुईं, लेकिन इनकी वजह पर हमेशा संदेह बना रहा. शोधकर्ताओं ने विभिन्न समयों में हुई इन मौतों का कारण जानने की कोशिश की, लेकिन सही कारण पता लगाना आसान नहीं था.
जहरीले फफूंद का खु
बाद में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि तूतनखामुन की कब्र में पाए गए जहरीले फफूंद "एस्परजिलस फ्लेवस" का संबंध इन मौतों से था. इसे "फैरोज कर्स" यानी फरोह का शाप भी कहा जाता है. इस फफूंद ने कई पुरातत्वविदों को फेफड़ों के संक्रमण की चपेट में लेकर उनकी जान ले ली. यह फफूंद हवा में फैलकर संक्रमण करता है और खतरनाक साबित हो सकता है.
जहरीला फफूंद, कैंसर के इलाज में कैसे मददगार?
वैज्ञानिकों ने इस जहरीले फफूंद में एक खास प्रोटीन खोजा है, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकता है. शोध में यह बात सामने आई है कि यह प्रोटीन खासतौर पर ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया जैसी बीमारी की कोशिकाओं के बढ़ने को रोकने में सक्षम है. कैंसर के दौरान असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे शरीर की अन्य कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ता है. यह प्रोटीन उन असामान्य कोशिकाओं के विभाजन को रोकता है, जिससे कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है.
वैज्ञानिकों की नई उम्मीद
यह खोज कैंसर की दवाओं के विकास में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है. जहरीले फफूंद के इस प्रोटीन से उम्मीद की जा रही है कि वह भविष्य में कैंसर रोगियों के इलाज में सहायता कर सकेगा. हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह रिसर्च फंगल जीवाणुओं के संभावित उपयोग को लेकर चिकित्सा विज्ञान में नई दिशा दे रही है.
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