टूट की कगार पर ममता बनर्जी की TMC! 20 सांसदों की स्पीकर से मुलाकात की तैयारी, सामने रखेंगे ये मांग

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही नाराजगी अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है. पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा इतना बढ़ चुका है कि अब मामला सीधे लोकसभा तक पहुंच गया है.

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TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही नाराजगी अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है. पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा इतना बढ़ चुका है कि अब मामला सीधे लोकसभा तक पहुंच गया है. सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के कई सांसद नेतृत्व से असहमत हैं और संसद में अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं. 

दिल्ली में तेज हुई राजनीतिक हलचल

शनिवार को टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय का दिल्ली दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया. उन्होंने पहले सांसद शताब्दी रॉय के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी करीब आधे घंटे तक बातचीत की. इन बैठकों को महज औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि इन्हें टीएमसी के भीतर चल रही राजनीतिक उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है. यही वजह है कि इन मुलाकातों ने बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है.

अलग ब्लॉक की मांग से बढ़ेगी मुश्किल?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी के लगभग 20 सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं. माना जा रहा है कि ये सांसद संसद में अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे. यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में उनकी बैठने की व्यवस्था भी अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले मौजूदा टीएमसी समूह से अलग की जा सकती है. इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है.

चुनाव के बाद क्यों बढ़ी नाराजगी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान की खबरें लगातार सामने आती रही हैं. पार्टी के कई नेताओं और सांसदों के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़ने की चर्चा होती रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असंतोष धीरे-धीरे गहराता गया, जिसका असर अब संसदीय राजनीति में भी दिखाई देने लगा है.

ममता और अभिषेक के लिए नई चुनौती

गौरतलब है कि 1 जून को भी लोकसभा में टीएमसी सांसदों के एक बड़े वर्ग ने पार्टी नेतृत्व को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उस समय ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में मौजूद थे. अब यदि सांसदों का यह समूह अलग ब्लॉक की मांग को आगे बढ़ाता है, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है. आने वाले दिनों में स्पीकर के सामने रखी जाने वाली मांग और उस पर होने वाला फैसला बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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