SCO Summit: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट का दूसरा दिन सिर्फ एक मंचीय औपचारिकता नहीं, बल्कि तीन वैश्विक शक्तियों भारत, रूस और चीन के रणनीतिक संदेशों का अखाड़ा बन गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात और बंद दरवाज़ों में हो रही बैठकें इस ओर इशारा करती हैं कि अंतरराष्ट्रीय सत्ता समीकरणों में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है.
इस मंच से अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ, रूस पर लगे प्रतिबंध और चीन के साथ जारी व्यापार युद्ध जैसे मुद्दों पर अप्रत्यक्ष जवाब मिल सकता है.
Interactions in Tianjin continue! Exchanging perspectives with President Putin and President Xi during the SCO Summit. pic.twitter.com/K1eKVoHCvv
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2025
मोदी-पुतिन की मुलाकात: तेल, टैक्स और ट्रंप
भारत और रूस के बीच यह अहम द्विपक्षीय मुलाकात सुबह 10 बजे शुरू हुई. इसके पृष्ठभूमि में अमेरिका का रूसी तेल पर बैन, भारत की तेल खरीद की निरंतरता और इसके चलते ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाना है. मोदी और पुतिन के इस संवाद पर अमेरिका की पैनी नजर है, क्योंकि यह बातचीत भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को और मजबूती देती है.
तेल का समीकरण: भारत की ‘ऊर्जा कूटनीति’
भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि उसकी तेल संबंधी रणनीति राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होगी, ना कि किसी दबाव से. अब जब SCO के मंच पर पुतिन, मोदी और जिनपिंग साथ दिखे, तो यह एक संकेत भी हो सकता है कि ऊर्जा के क्षेत्र में तीनों देश किसी सामूहिक नीति पर विचार कर रहे हैं, जिससे अमेरिका की टैरिफ नीति पर दबाव बढ़ सकता है.
Always a delight to meet President Putin! pic.twitter.com/XtDSyWEmtw
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2025
त्रिकोणीय गठजोड़: ट्रंप की चुनौती बढ़ी?
इस बैठक ने वैश्विक कूटनीति को नया मोड़ दिया है. एक तरफ रूस, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. भारत, जिसे ट्रंप की टैरिफ नीति ने घेरा है और चीन, जो खुद एक लंबे ट्रेड वॉर में उलझा है. ये तीनों देश अब एक साथ SCO के मंच पर खड़े हैं. ऐसे में क्या यह नई वैश्विक ध्रुवीयता का संकेत है? क्या भारत अब अमेरिका की नीतियों के विरुद्ध नए सहयोगों की ओर बढ़ रहा है?
मोदी का संदेश: “बातचीत जारी है”
पीएम मोदी ने SCO समिट के दौरान अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “तियानजिन में बातचीत जारी है. राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ.” यह छोटा वाक्य कूटनीतिक भाषा में बड़ा संकेत है, भारत अब वैश्विक संवाद में अधीन नहीं, सहभागी की भूमिका निभा रहा है.
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