Israel Bulldoze UN Headquarters: पूर्वी यरूशलम में स्थित संयुक्त राष्ट्र के एक प्रमुख परिसर पर इजरायल ने बड़ी कार्रवाई की है. इजरायली सेना बुलडोजर और भारी उपकरणों के साथ यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर फिलिस्तीन रिफ्यूजीज़ (UNRWA) के मुख्यालय परिसर में दाखिल हुई और इमारतों को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी. संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम को बेहद गंभीर बताते हुए इसे अपने इतिहास में अभूतपूर्व हमला करार दिया है.
यह परिसर पूर्वी यरूशलम में स्थित है, जो लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का केंद्र रहा है. UNRWA का यह मुख्यालय दशकों से फिलिस्तीनी शरणार्थियों से जुड़ी मानवीय गतिविधियों का संचालन करता रहा है.
UNRWA की भूमिका और महत्व
UNRWA गाजा समेत उन इलाकों में काम करती है, जहां फिलिस्तीनी शरणार्थी बड़ी संख्या में रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, जब तक फिलिस्तीनी समस्या का न्यायसंगत और स्थायी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक यह एजेंसी शरणार्थियों को सहायता देती रहेगी.
UNRWA फिलिस्तीनी शरणार्थियों को पांच प्रमुख क्षेत्रों, गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराती है. एजेंसी करीब 59 लाख पंजीकृत शरणार्थियों की मदद करती है. जिस परिसर को अब गिराया जा रहा है, वही इन गतिविधियों का एक अहम केंद्र माना जाता था.
This morning, Israeli occupation forces demolished #UnitedNations property in occupied #EastJerusalem, yet another live-streamed gruesome crime in violation of international law, directly defying the @CIJ_ICJ's recent ruling that Israel "may not obstruct @UNRWA functions in OPT." pic.twitter.com/W100heRsj8
— PM of Palestine (@PalestinePMO) January 20, 2026
वर्षों पुराने विवाद के बाद कार्रवाई
UNRWA के मुख्यालय को ध्वस्त करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया. यह कदम एजेंसी के खिलाफ लंबे समय से चल रही कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बाद सामने आया है. इजरायल लगातार UNRWA पर हमास के साथ कथित संबंध और आतंकवादी गतिविधियों में सहयोग का आरोप लगाता रहा है.
अक्टूबर 2024 के आखिर में इजरायल की संसद नेसेट ने दो कानून पारित किए थे, जिनके तहत UNRWA को इजरायली नियंत्रण वाले इलाकों में काम करने से रोक दिया गया. इसके बावजूद पूर्वी यरूशलम में UNRWA के कुछ ऑपरेशन, जैसे स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं, सीमित स्तर पर जारी थीं.
इजरायल सरकार का पक्ष
इजरायल ने इस तोड़फोड़ का खुलकर बचाव किया है. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि संबंधित परिसर में UNRWA पहले ही अपने ऑपरेशन बंद कर चुका था और वहां कोई संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी या गतिविधि मौजूद नहीं थी. हालांकि, इस दावे के बीच यह भी सामने आया कि इमारत में कई फिलिस्तीनी परिवार अभी भी रह रहे थे.
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नए कानूनों के तहत की गई है, जिनमें संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था. उनका दावा है कि इस परिसर को किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय या कूटनीतिक छूट प्राप्त नहीं थी और इसे जब्त करना इजरायली तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है.
‘ऐतिहासिक दिन’ करार दी गई तोड़फोड़
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर खुद इस कार्रवाई के दौरान मौके पर पहुंचे और बुलडोजर से हो रही तोड़फोड़ को देखा. उन्होंने इसे यरूशलम में इजरायली संप्रभुता के लिए “ऐतिहासिक दिन” बताया.
बेन-गविर ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यहां से हटाया जा रहा है और भविष्य में भी ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. उनके बयान ने इस कार्रवाई को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है.
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
पिछले महीने इजरायली अधिकारियों ने इस UNRWA परिसर पर छापा मारा था. उस दौरान मुख्य इमारत पर इजरायली झंडा फहराया गया और कुछ संपत्तियों को जब्त किया गया. इजरायल का दावा था कि यह कदम नगर निगम टैक्स विवादों से जुड़ा है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि छापे का टैक्स से कोई संबंध नहीं है और यह परिसर अब भी संयुक्त राष्ट्र की संपत्ति है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पवित्र और हस्तक्षेप से सुरक्षित माना जाता है.
UN का कड़ा विरोध
इजरायल की इस कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. UN ने कहा कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानून का जानबूझकर और खुलेआम उल्लंघन कर रहा है. बयान में कहा गया कि इजरायली सेना ने सांसदों और सरकार के एक सदस्य की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र की साइट पर धावा बोला और अंदर की इमारतों को गिराना शुरू किया.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी और उसके परिसर पर अब तक का सबसे गंभीर हमला है, जो वैश्विक नियमों और कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ जाता है.
UNRWA को बंद करने की कोशिशें
इजरायल लंबे समय से UNRWA को पूरी तरह खत्म करने की मांग करता रहा है. उसका कहना है कि यह एजेंसी फिलिस्तीनी शरणार्थियों को स्थायी रूप से बसाने के बजाय उनके शरणार्थी दर्जे को बनाए रखती है, जिससे संघर्ष और गहराता है.
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि UNRWA की भूमिका फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए जीवनरेखा जैसी है और इसके बिना मानवीय संकट और भी गंभीर हो सकता है.
बढ़ता अंतरराष्ट्रीय तनाव
पूर्वी यरूशलम में UNRWA मुख्यालय को गिराने की यह घटना केवल एक स्थानीय कार्रवाई नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके दूरगामी कूटनीतिक और मानवीय असर होने की आशंका जताई जा रही है. जिस तरह से बुलडोजर के जरिए संयुक्त राष्ट्र के परिसर को ध्वस्त किया गया, उसने इजरायल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है.
आने वाले दिनों में यह मामला वैश्विक मंचों पर और गरमाने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवीय सहायता और यरूशलम की संवेदनशील स्थिति से जुड़ा हुआ है.
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