पाकिस्तान में बैन हो सकते हैं ये ऐप्स, बोला- 'इनसे यहां आतंकवाद बढ़ रहा', बताया सुरक्षा के लिए खतरा

पाकिस्तान में एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है.

These apps may be banned in Pakistan security threat
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

पाकिस्तान में एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि देश में बड़ी संख्या में लोग ऐसे VPN और डिजिटल टूल का उपयोग कर रहे हैं जो न सिर्फ असुरक्षित हैं, बल्कि आतंकवाद, जासूसी और ऑनलाइन अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं. दबाव बढ़ने के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान सरकार इन ऐप्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि गैर-रजिस्टर्ड VPN के जरिए देश के अंदर ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो ऑनलाइन गुमनामी का फायदा उठाकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, विदेशी सर्वरों से संपर्क बनाए रखते हैं, और सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपाकर प्रोपेगेंडा फैलाते हैं. सरकारी मंत्री भी इस खतरे की पुष्टि कर चुके हैं, जिसके बाद बैन की संभावना और मजबूत हो गई है.

पाकिस्तान के लिए कौन-से ऐप्स बने खतरा?

स्थानीय चैनलों की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में उपलब्ध गैर-रजिस्टर्ड, असुरक्षित और फ्री VPN ऐप्स सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने आए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि:

  • कई VPN गुप्त रूप से उपयोगकर्ताओं का डेटा इकट्ठा कर विदेशी सर्वरों को भेजते हैं,
  • व्यक्तिगत जानकारी और बैंकिंग डेटा डार्क वेब पर बेचा जा सकता है,
  • यही VPN आतंकवादियों और अपराधियों को ऑनलाइन पहचान छिपाने,
  • अवैध संचार करने,
  • और हैकिंग व साइबर धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों के लिए मदद करते हैं.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय में, "VPN का गलत इस्तेमाल पाकिस्तान में न सिर्फ साइबर क्राइम बढ़ा रहा है, बल्कि आतंकवादी गुट भी इससे सुरक्षित नेटवर्क बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की निगाहों से बच रहे हैं."

कई वरिष्ठ अधिकारियों ने यह तक कहा है कि "यह अब सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा खतरा बन चुका है."

दूसरे देशों ने भी उठाए ऐसे कदम

पाकिस्तान में बैन की बढ़ती मांग की एक वजह यह भी है कि कई देश पहले ही गैर-कानूनी VPN पर कड़ी कार्रवाई कर चुके हैं.

इन देशों ने असुरक्षित VPN पर रोक लगाई है:

  • भारत
  • यूएई / दुबई
  • सऊदी अरब
  • बांग्लादेश

इन देशों का तर्क है कि फ्री/असुरक्षित VPN साइबर अपराध को रोकने में बाधा बनते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को कमजोर करते हैं. पाकिस्तान के विशेषज्ञ अब उसी दिशा में बढ़ने का सुझाव दे रहे हैं.

PTA ने शुरू की VPN लाइसेंसिंग

संभावित प्रतिबंध का एक और संकेत यह है कि पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (PTA) ने 13 नवंबर से VPN कंपनियों को आधिकारिक लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है.
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

  • केवल प्रमाणित,
  • सुरक्षित,
  • और सरकारी निगरानी में आने वाले VPN

ही देश में संचालन कर सकें.

अब तक इन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है:

  • Alpha 3 Cubic – Steer Lucid VPN
  • Zettabyte – Crest VPN
  • Nexilium Tech – Kestrel VPN
  • UKI Conic Solutions – QuiXure VPN
  • Vision Tech 360 – Kryptonyme VPN

इन लाइसेंस प्राप्त VPN को सुरक्षित माना जा रहा है और सरकार चाहती है कि संस्थान तथा कंपनियां इन्हीं का उपयोग करें.

आतंकवादी VPN का इस्तेमाल कर रहे

सरकार की ओर से बयान भी इस दिशा में संकेत दे रहा है कि बैन की कार्रवाई निकट हो सकती है. राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा, "आतंकवादी VPN का इस्तेमाल करते हैं ताकि सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपा सकें. सुरक्षा एजेंसियों को इनकी गतिविधियों का पता लगाने में कठिनाई होती है. ऐसे में गैर-रजिस्टर्ड VPN को बंद करना जरूरी है."

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य आईटी उद्योग को नुकसान पहुंचाना नहीं है. रजिस्टर्ड VPN का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों और संस्थानों को किसी प्रकार की रोक का सामना नहीं करना पड़ेगा.

मंत्री ने कहा, "देश की सुरक्षा सर्वोपरि है. अगर आतंकवादियों को रोकना है, तो VPN सिस्टम को नियंत्रित करना ही होगा."

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