नई दिल्ली: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, शोषण और धोखाधड़ी के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. हर साल हजारों भारतीय युवा बेहतर कमाई और जीवन की तलाश में विदेश का रुख करते हैं, लेकिन उनमें से कई फर्जी एजेंटों और दलालों के झांसे में आकर बड़ी मुसीबतों में फंस जाते हैं. इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार अब एक नया और सख्त कानून लाने जा रही है.
"ओवरसीज मोबिलिटी बिल, 2025" नाम का यह प्रस्तावित कानून पुराने इमिग्रेशन एक्ट, 1983 की जगह लेगा. सरकार का उद्देश्य है कि विदेश जाने वाले भारतीयों को न सिर्फ ठगी से बचाया जाए, बल्कि उनका पूरा अनुभव भी सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए.
क्यों जरूरी हो गया है नया कानून?
पुराना इमिग्रेशन एक्ट, 1983 करीब 4 दशक पुराना है. तब से लेकर अब तक न सिर्फ वैश्विक नौकरी बाजार में बदलाव आया है, बल्कि भारत से बाहर जाने वाले लोगों की संख्या भी कई गुना बढ़ चुकी है. मौजूदा कानून डिजिटल युग की चुनौतियों को संभालने में सक्षम नहीं है. इसके चलते फर्जी एजेंट, बिचौलिए और ट्रैवल कंपनियां कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों को विदेश भेजने के नाम पर धोखा देने में कामयाब हो जाती हैं.
आमतौर पर सामने आने वाले फर्जीवाड़े के मामले:
इन घटनाओं से न सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान होता है, बल्कि भारत की वैश्विक छवि को भी ठेस पहुंचती है.
क्या है "ओवरसीज मोबिलिटी बिल, 2025"?
सरकार द्वारा प्रस्तावित यह नया कानून मौजूदा इमिग्रेशन व्यवस्था को व्यापक, तकनीकी रूप से मजबूत और पीड़ितों के लिए न्यायपूर्ण बनाएगा. यह बिल संसद के आगामी सत्र में पेश किया जा सकता है. केंद्र सरकार ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे सार्वजनिक चर्चा के लिए भी रखा जा सकता है.
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