Bonjour Modi: G7 समिट में छाए PM मोदी, यूरोप दौरे से दुनिया को क्या संदेश? देखें डॉ. जगदीश चंद्र का विश्लेषण

The JC Show: स्लोवाकिया में ऐतिहासिक सम्मान और जी7 में वैश्विक नेताओं के बीच बढ़ता प्रभाव. क्या मोदी की यह यात्रा भारत के उस वैश्विक पहचान का प्रतीक है जहां दुनिया भारत को सुन भी रही है और भारत के साथ चलना भी चाहती है. आज जेसी शो में इसी पर करेंगे चर्चा और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ जगदीश चंद्र.

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The JC Show: बोंजोर मोदी... यह सिर्फ फ्रांस की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत नहीं था बल्कि उस भारत का अभिनंदन था जो आज दुनिया की कूटनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक समीकरणों का केंद्र बन चुका है. फ्रांस से लेकर स्लोवाकिया तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा ने दुनिया को एक बार फिर से संदेश दिया कि 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति में भारत सिर्फ सहभागी नहीं बल्कि निर्णायक शक्ति है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो और मोदी के बीच रिश्तों को नो बाउंड्री पार्टनरशिप का नाम दिया जा चुका है. रक्षा,  एआई सेमीकंडक्टर और तमाम क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच नजदीकियां नई ऊंचाइयों को छू रही हैं. इसी दौरे के दौरान एक तस्वीर थी जिसने सबका ध्यान खींचा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात जिसमें उन्होंने उन्हें अच्छा दोस्त और टफ नेगोशिएटर बताया. यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड अब पूरा होने वाला है. 

कुछ ही दिन पहले अ ग्रेट वन ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा था. यह सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है बल्कि दुनिया के बड़े नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि आज भारत के बगैर वैश्विक रणनीति अधूरी नजर आती है. स्लोवाकिया में ऐतिहासिक सम्मान और जी7 में वैश्विक नेताओं के बीच बढ़ता प्रभाव. क्या मोदी की यह यात्रा भारत के उस वैश्विक पहचान का प्रतीक है जहां दुनिया भारत को सुन भी रही है और भारत के साथ चलना भी चाहती है. आज जेसी शो में इसी पर करेंगे चर्चा और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ जगदीश चंद्र. 

सवाल: आज द जेसी शो की हेडलाइन है बोंजोर मोदी. आखिर फ्रेंच भाषा में लिखे हुए इस वाक्य या फिर नैरेटिव के मायने क्या है?

जवाब: नरेटिव्स यही है कि हेलो मोदी एक्चुअली फ्रांस की जनता और भारत की जनता द्वारा वहां यह जो नैरेटिव बनाया गया है यह बहुत चार्मिंग और एक तरह से कहिए कि डार्लिंग नैरेटिव है. इसको बड़ा पसंद किया गया है और हेलो मोदी मतलब मोदी 21वीं सदी के नेता उनके प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है. आप देखिए ये मोदी के व्यक्तित्व की पहचान, उनके व्यक्तित्व का प्रतीक है और उनके प्रगतिशील होने का प्रतीक है. कुल मिलाकर इसका अर्थ है हेलो मोदी एंड मोस्ट वेलकम मोदी. राइट. 

सवाल: सर ये नरेंद्र मोदी का कैसा चमत्कार है कि वो G7 के स्थाई सदस्य ना होते हुए भी ग्लोबल सेंटर स्टेज पर नरेंद्र मोदी ही छाए रहे. 

जवाब: अबब्सोलुटली इट्स अ मोदी मिरेकल इनफैक्ट ही इज़ हाईजैक्ड G7 जस्ट ऑन अकाउंट ऑफ ह पॉपुलरिटी एंड डिप्लोमेसी एस अ ग्लोबल लीडर जितने चित्र आए जितने फोटो आए हैं सब में मोदी आकर्षण का केंद्र है. मोदी बीच में खड़े हुए हैं. और सबसे बड़ी बात यह है इट वाज़ नॉट ओनली एन इनविटेशन. एक्चुअली इट वाज़ रिकॉग्निशन नरेंद्र मोदी सर्विज एस अ ग्लोबल लीडर. नरेंद्र मोदी ओरा एस ए ग्लोबल लीडर एंड आल्सो टू सेटिंग अप और टू टेस्टिफाई द टोटल आरसी ट्रेक्टर ऑफ इंडिया फ्रेंच रिलेशनशिप इंडिया फ्रेंडशिप. तो कुल मिला के है कि नरेंद्र मोदी जहां जाते हैं छा जाते हैं और यही सब वहां पे हुआ G7 में. 

सवाल: सर फ्रांस के राष्ट्रपति इमरान मैक्रो ने बड़े ही अनोखे अंदाज में सांस्कृतिक अंदाज में पीएम मोदी का स्वागत किया. आखिर प्रधानमंत्री मोदी की पर्सनालिटी में ऐसा क्या है कि जो वहां पर प्रोटोकॉल्स होते हैं राष्ट्र अध्यक्ष अलग-अलग देशों के उसको भूलकर पीएम मोदी के लिए पलक पावड़े बिछा देते हैं. 

जवाब: ये सच में नरेंद्र मोदी को ईश्वर की देन है. अलग-अलग किस्म का व्यवहार करते हैं. हर कोई मोदी को रिझाने की कोशिश करता है इन अ वे. आप देखिए जो मैक हैं फ्रांस के अब वो क्या है कि जो उनका शुभकामना संदेश है उसको हिंदी में रिकॉर्ड करवा रहे हैं. साथ में नरेंद्र मोदी का वीडियो रिकॉर्ड करवा रहे हैं. कोई धुरंधर फिल्म है उसमें आरी आरी करके गाना है उसके साथ में नरेंद्र मोदी का वीडियो कर रहे हैं. तो कैसा मतलब दीवानगी है लोगों में मोदी के प्रति उसी का ये प्रतीक है जिसे कहा जाना चाहिए. नहीं लोग प्रोटोकॉल भूल के आ जाते हैं. तो ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर देखे नरेंद्र मोदी को दोनों ने देखा तो भाग के आए वहां से और नरेंद्र मोदी को गले लगाया. तो ये चमत्कार है. गॉड गिफ्ट है नरेंद्र मोदी को. 

सवाल: सर क्या विदेशी दौरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी पसंद की वेशभूषा का भी कोई अर्थ और मैसेज होता है?

जवाब: हां मैसेज है. मैंने सुना है कि वो बेसिकली इसे कहना चाहिए ही डजंट वियर वेस्टर्न स्टाइल बिनेस सूट जो है और भारत की भाषा पहनते हैं. और मैसेज इसके पीछे ये है कि गुलामी की भाषा अंग्रेजों की की जो गुलामी की वेशभूषा थी गोट पेंट इस तरह से उससे थोड़ा दूर हटके भारत की जो मौलिक संस्कृति है भारत की जो मौलिक वेशभूषा है उसको करना उसके पीछे एक खास मैसेज नरेंद्र मोदी का मुझे दिखाई देता है और फिर इन सबके ऊपर मोदी जैकेट सुपरहिट है आज आज संसार के जितने देशों में मोदी जैकेट एक ब्रांड बन चुका है कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी की जो वेशभूषा है उसके पीछे एक सटल मैसेज है. 

सवाल: सर पीएम मोदी ने कहा कि विश्व को समानता आधारित साझेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा. आखिर क्या कहना चाहते हैं पीएम मोदी?

जवाब: मोदी बेसिकली चैंपियन ऑफ ग्लोबल साउथ कंट्रीज गरीब देशों के अब नेतृत्व वो मोदी के पास है. तो कहना चाहते हैं कि आज जी से जो पावरफुल राष्ट्र हैं और वो इन राष्ट्रों को अगर कोई कंट्रीब्यूशन देते हैं तो उसका ऐसे डोनेशन देखते हैं. तो ये जो पावरफुल राष्ट्र हैं ये इन राष्ट्रों की जो मदद करते हैं, गरीब देशों की मदद करते हैं, जो सहायता देते हैं तो उनका माइंडसेट ऐसा है जैसे कोई डोनेशन दे रहे हो, उनको दान दे रहे हो. तो नरेंद्र मोदी का कहना ये है कि नहीं ये कलेक्टिव कोपरेशन होना चाहिए और ये जॉइंट कोपरेशन होना चाहिए और ऐसा दिखे कि हम मन से अपने छोटे भाइयों की मदद कर रहे हैं ना कि इस माइंडसेट के साथ कि ठीक है यार दान दे दिया इनको यह भाव था. 

सवाल: सर मोदी और माइक्रो के बीच में किन-किन मुद्दों पर चर्चा हुई, बातचीत हुई, किन-किन मुद्दों पर समझौते फाइनल हुए और आपको लगता है कि यह मुलाकात दोनों देशों के बीच में एक टर्निंग पॉइंट जैसा साबित होगी?

जवाब: ऑफकोर्स वन ऑफ़ द बेस्ट विजिट फॉर प्राइम मिनिस्टर टू फ्रांस. यू कैन से इज अ टर्निंग पॉइंट और कुल मिला के 13 समझौते वहां पर हुए हैं. सबसे बड़ा समझौता है कि अगले 5 वर्ष में व्यापार को दुगना करना है दोनों देशों के बीच. दूसरा यह है भारत इनोवेट्स 2026. इसका अर्थ ये है कि दोनों देश मिलके दोनों नेता मिलकर के दे विल ट्राई टू डेवलप ओपन एआई सोर्स और फ्रांस के मैक्रो ने तो कहा ही है कि इंडिया इज़ इनोवेशन लीडर. नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम रास्ता सुझाते हैं लोगों को सुझाव देते हैं करने के लिए जो है तो एक बहुत अच्छी बॉन्डिंग जो है इनोवेशन को लेके दोनों नेताओं के बीच जो चल रही है और मुख्यत जो है इन्हीं मुद्दों पे वहां पे चर्चा हुई बाकी तो रूटीन में सब होता ही है डिफेंस है एआई है टेक्नोलॉजी है ये सब बातें तो है ही उसमें जो है लेकिन जो फोकस था वो इन मुद्दों पर था. 

सवाल: सर भारत और फ्रांस के बीच क्या द्विपक्षीय समझौतों से भारत और फ्रांस के बीच व्यापार बढ़ेगा? 

जवाब: पहले से ही पिछले पांच वर्षों में 1581 मैंने पढ़ा बिलियन डॉलर व्यापार हो गया है और अगले 5 वर्षों में व्यापार और दुगना होगा. उनका यह कहना है और सबसे बड़ी बात है कि राफेल की डील हो रही है. 60% राफेल स्वदेशी होने जा रहा है. 3 लाख करोड़ का प्रपोजल है. छोटे परमाणु रिएक्टर बनने की बात है. तो सभी दिशाओं से जो है वो संकेत ऐसे हैं कि भारत और फ्रांस के बीच अगले 5 वर्षों में व्यापार कम से कम दुगना तो होगा ही. 

सवाल: सर आखिर क्या है भारत फ्रांस इनोवेशन रोड मैप 2030? और क्या है ये स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप? 

जवाब: ये रोड मैप जो है बेसिकली ये गाइड करने के लिए भारत और फ्रांस के जो रिलेशनशिप है इनोवेशन में आने वाले 5 वर्षों में उसको गाइड करने के लिए और उसका जो फोकस है बेसिकली वो को डेवलपमेंट और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पे रहेगा एक दिशा है ये देने के लिए कि अगले 5 वर्ष में हमें इस क्षेत्र में कैसे आगे बढ़ना है सो दिस इज अ रोड मैप. 

सवाल: सर भारत फ्रांस के रिश्तों में आखिर क्या महत्व है जयतापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट का? 

जवाब: दिस इज वन द मोस्ट एंबिशियस पावर प्लांट प्रोजेक्ट ऑफ इंडो फ्रेंच एनर्जी रिलेशनशिप जिसे कहना चाहिए और जब यह पूरा होगा तो इट विल प्रूव एस वन ऑफ़ द लार्जेस्ट न्यूक्लियर पावर प्लांट अक्रॉस द ग्लोब जो है और इसीलिए इसको कहा जाता है इसके साथ-साथ इट इज़ आल्सो अ सिंबल ऑफ़ लॉन्ग टर्म फ्रेंच पार्टिसिपेशन इन इंडियन पावर सेक्टर इन इंडियन न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर. तो कुल मिलाकर बड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. लेट्स होप के समय पे पूरा हो जाए. 

सवाल: सर पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके कार्यकाल में पिछले 12 वर्षों में भारत में सब कुछ दोगना हो गया. सर वुड यू लाइक टू एक्सप्लेन फर्दर और क्या इसी स्पीड से एक दिन जरूर सपना पूरा होगा विकसित भारत 2047 का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का. 

जवाब: कहने का तात्पर्य उनका यह था कि अद्भुत विकास है 12 साल के कार्यकाल में. सब कुछ दुगना मतलब एयरपोर्ट दुगने, जीडीपी दुगना, हाईवे दुगने, यूनिवर्सिटी दुगने. कुल कहने का जो उनका तात्पर्य था कि भारत जो है ना मेजर एक इकोनमी ग्रोथ का जो सेंटर बन चुका है और सब लोगों को आके यहां पे इन्वेस्ट करना चाहिए. जो भारतीय समुदाय के लोग थे उनका प्यार मोहब्बत तो आप जानते हैं नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों ने वहां फिर मोदी मोदी के नारे लगाए वहां पर और ये कहा कि मोदी स्टार्टअप के युवा पीढ़ी के लिए जो है प्रेरणा स्रोत है एक तरह से अच्छा फंक्शन था और ये नरेंद्र मोदी इस तरह के बाद लोगों को आमंत्रित किया इंडिया इस चेंज सामाजिक सुधारों का देश है भारत इस समय और भारत में 12 वर्ष में जो कुछ हुआ है वो अद्भुत है अकल्पनीय है आप भी आइए अपने देश में पैसा लगाइए और इस देश को आगे बढ़ाइए. 

सवाल: सर हमेशा की तरह इस बार भी पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड के टॉप सीईओस को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया. क्या सच में एक राजनेता से अर्थशास्त्री की भूमिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं?

जवाब: सच में ये नरेंद्र मोदी का एक नया अवतार है. उनको बात समझ में आ चुकी है कि ओनली पॉलिटिकल डिप्लोमेसी इस नॉट सफिशिएंट. इट हैज़ टू बी अकंप्लेंड बाय अ पावरफुल इकोनमिक पैकेज, पावरफुल इकोनमिक स्ट्रेटजी. तब वो यही करते हैं इसके अंदर. जहां भी जाते हैं तो कोशिश करते हैं कि जो संसार के देश हैं, सीईओस हैं, इन्वेस्टर्स हैं लीडिंग कंपनीज़ के, वह भारत में आके मैन्युफैक्चरिंग में पार्टनरशिप करें. यहां आ के एनर्जी में करें, डिजिटल में करें, रोड्स में करें, एयरपोर्ट्स में करें. तो उनका एक अभियान रहता है इस तरह का कि सब लोगों को बाहर से आमंत्रित करके भारत में निवेश के लिए जो है ना उनको प्रेरित किया जाए और नरेंद्र मोदी का यह अभियान सफल है. यह आप भारत सरकार के आंकड़ों से इसको देखते हैं. सो दिस इज ऑल. 

सवाल: सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ऐसा चमत्कार है कि ग्लोबल क्राइसिस के बावजूद विदेशों से भारत में धन बरस रहा है. इस पूरे सिनेरियो को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: इट्स डिफिकल्ट टू डिकोड जिसे कहते हैं. वास्तव में चमत्कार है ये. मैंने देखा है पिछले साल में 144 अरब डॉलर रेमिटेंसेस आई हैं भारत में. पिछले साल थी 124 तो 20 अरब डॉलर ज्यादा एक साल में मोदी के नेतृत्व में जो है वो रेमिटेंसेस जो यहां पे आ रही हैं और वो रेमिटेंसेस के आने से तो आप देखते हैं देश बनता है पैसा आता है धन बरसता है उद्योग चलते हैं रोजगार आता है फैक्ट्रीज लगती हैं इंडस्ट्रीज लगती हैं उत्पादन बढ़ता है और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो कुल मिला के ये जो चमत्कार है ये भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और नरेंद्र मोदी अच्छी तरह समझते हैं कि विदेशी दौरों का एक एजेंडा है भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जो कर रहे हैं इस समय. 

सवाल: सर पिछले दिनों भारत सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से मौद्रिक सुधार जो किया गया उसका नतीजा यह हुआ कि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कीमत बहुत तेजी से आगे बढ़ी है. इस घटनाक्रम को और आरबीआई के रोल को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: आरबीआई का रोल बहुत अच्छा था, पॉजिटिव था. ये एक्चुअल में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया और आरबीआई का जो समन्वय है उसका परिणाम था. उसका प्रतीक था. सारे देश के अखबारों ने इस घटना का स्वागत किया और एक बड़े अखबार की हेडलाइन थी उस दिन आरबीआई एंड गवर्नमेंट दे आर वर्किंग एज ए टीम टू एंकर आउट टू कम बैक ट्रेड डेफिसिट और आप कहिए कैपिटल एक्सपेंडिचर एंड अदर फाइनेंसियल रिफॉर्म्स तो आरबीआई के स्तर पर हमेशा इस तरह का संकोच रहता था पहले कि हमारा पैसा है आगे ट्रांसफर करें कि नहीं करें सरप्लस है हमारा हमारे पास रहेगा भारत का पैसा सरकार का पैसा है जनता का पैसा है अब जो नए गवर्नर आए हैं संजय मल्होत्रा ही इज़ अ विज़नरी ही इज़ अ प्रैगिक यंग लीडरशिप उन्होंने बिल्कुल सही जो राय दी गई उनको उसी आधार पर 2.67 लाख करोड़ का जो सरप्लस था वो गवर्नमेंट को ट्रांसफर किया था गवर्नमेंट के काम विकास से कार्यक्रम आगे बढ़े तो ये एक नया अद्भुत प्रयोग था और इसका एक उदाहरण ये था कि टीम इंडिया कैसे काम कर सकती है सरकार के सारे विभाग अगर इस तरह से काम करें और खास करके आरबीआई और फाइनेंस मिनिस्ट्री अगर मिलके ऐसे काम करें तो देश में कैसा भी संकट हो ग्लोबल क्राइसिस हो पेट्रोल क्राइसिस हो डीजल क्राइसिस कैसा भी क्राइसिस हो उसको मिलकर के कमबैट किया जा सकता उसको मिलके सॉर्ट आउट किया जा सकता है. तो आरबीआई डिर्व्स ए वोट ऑफ कडोस जिसे कहते हैं वोट ऑफ़ एप्रिसिएशन फॉर दिस प्रगमेटिक अप्रोच. 

सवाल: सर आखिर फ्रांस स्लोवाक्या और दूसरे देशों के लिए भारत से जुड़ने में क्या है आकर्षण?

जवाब: आकर्षण तो एक लाइन में है नरेंद्र मोदी. ठीक है. इसका दूसरा पहलू यह है. मोदी प्रोवाइड्स अ स्टेबल पॉलिटिकल गवर्नमेंट इन इंडिया. ठीक है? एंड बिकम्स अ सिंगल विंडो. बिकम्स ए वेरी डिसाइसिव प्राइम मिनिस्टर फॉर इन्वेस्टर्स. पहला यह है. दूसरा यह है कि इंडिया इज ए वेरी फास्ट ग्रोइंग इकॉनमी. चार पर पहुंच गए हैं. दो-ती साल में तीसरी संसार की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं. तीसरा 140 करोड़ लोगों का कंज्यूमर मार्केट आपके पास है. सप्लाई चेन है. और चौथी बात यह है कि विश्व की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है. जहां पे इंडो पेसिफिक जो पॉलिटिक्स है जो सिनेरियो है उसमें नरेंद्र मोदी एक की प्लेयर हैं. तो ये सारे फैक्टर्स हैं जो इन्वेस्टर्स को आकर्षित करते हैं भारत में आने के लिए और राष्ट्रों को आकर्षित करते हैं नरेंद्र मोदी के भारत से जुड़ने के लिए. 

सवाल: सर डिजिटल कोऑपरेशन वर्ल्ड में प्रधानमंत्री मोदी का एक और चमत्कार है यूपीआई सिस्टम जो पेरिस के आईफिल टावर से भी लायब हो चुका है. आप इसके बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

जवाब: बिल्कुल कहना चाहेंगे. वास्तव में डिजिटल इंडिया को तो प्रमोट करने जो नरेंद्र मोदी ने काम किया है अद्भुत है. आज संसार के देशों में इतनी प्रोग्रेस इतना डिजिटल एडवांसमेंट शायद कहीं देखने को मिलता है. मैं हैरान होता हूं जब सब्जी वाले के पास जाते हैं, किसी के पास जाते हैं कहते खुले पैसे नहीं दो भाई यूपीआई पेमेंट कर दो. हम आश्चर्य है इंडिया के गांव-गांव में कस्बे कस्बे में स्थिति हो गई है और ओवरऑल अगर आप देखें तो 314 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शंस हुए हैं पिछले एक साल में जो है आप देखिए और अब तो आपने कहा कि वो यूपीआई पेरिस में ले गए उसको पेरिस की टावर है वहां उसका खाता खुल गया वहां जाकर के तो ये तो चमत्कार ऐसा हुआ कि सारे विकसित राष्ट्र भी इसमें पीछे हैं जो कोविड हुआ था तो फोटो के साथ में जो आपका कार्ड था वो भारत में केवल डिजिटल हुआ अमेरिका तक कोई डिजिटल नहीं हो सका था तो ये तो सच सच में चमत्कार हुआ है. नरेंद्र मोदी एंड ह टेक्नो टीम डिर्व्स ए मेजर वोट ऑफ थैंक्स ए वोट ऑफ़ एप्रिसिएशन. 

सवाल: सर इस बार एक और बात हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एक नई व्याख्या करते हुए कहा एआई मीन्स ऑल इंक्लूसिव. आपको कैसी लगी है?

जवाब: अब्सोलुटली. उन्होंने कहा कि ऑल डिजिटल इनोवेशंस आर टू बी शेयर्ड बाय ऑल जिसे कहते हैं सारी जनता को इसका लाभ मिलना चाहिए और उसके साथ में इसका उपयोग होना चाहिए केवल कुछ राष्ट्रों की वो बपौती नहीं होना चाहिए. उन्होंने एक बड़ी इंपॉर्टेंट बात और कही. उन्होंने कहा वी आर नॉट ओनली प्रिपेयरिंग फॉर फ्यूचर. वी आर ट्राइंग टू शेप द फ्यूचर. यहां लीडरशिप है नरेंद्र मोदी की कि नॉट ओनली ट्राइंग न्यू एक्सपेरिमेंट्स बट ट्राइंग टू शेप देम. कैसा होगा? क्या स्वरूप होगा? हम कैसे सुधार लाएंगे? ये सब है. तो यू आर अब्सोलुटली राइट. 

सवाल: सर इस दौरे में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला. इस तरह कुल 33 अंतरराष्ट्रीय सम्मान पा गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. कुछ कहना चाहेंगे सर आप? 

जवाब: ये उनका रिकॉर्ड है. वर्ल्ड रिकॉर्ड है अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने का. ये सहयोग की बात है. उस देश में पहली बार नरेंद्र मोदी एज ए प्राइम मिनिस्टर गए. भारत का पहला प्रधानमंत्री वहां पे गया. पुरस्कार मिला. बहुत अच्छी बात है. मान सम्मान की बात है. और इट्स अ मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर ऑल इंडियंस. 

सवाल: सर भारत और स्लोवा आज्ञा के बीच क्या-क्या समझौते हुए हैं और जो रोटी नमक से स्वागत किया गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का. ये किस्सा क्या है सर?

जवाब: मैंने दो समझौतों के बारे में सुना. एक तो लेबर माइग्रेशन की बात है और एक डिजिटल कोऑपरेशन की बात है. बाकी तो 10 12 समझौते हुए लेकिन बेसिकली दो समझौते हैं. नमक की जो बात आप कह रहे हैं तो इसका वहां पे एक परंपरा है उस देश के अंदर. उसका नाम है वहां पे ब्रेड एंड साल्ट सेरेमनी. इसको वहां की सबसे पुरानी कस्टम है. वहां का सबसे पुराना रिवाज है किसी बड़े मेहमान को स्वागत करने का. जिसमें ब्रेड का मतलब वहां लोग मानते हैं हॉस्पिटिटी प्रोस्पेरिटी एंड गुडविल और नमक का अर्थ वो लोग मानते हैं फ्रेंडशिप. तो इस तरह से वो जो सम्मान है ट्रेडिशनल मान सम्मान है वो नरेंद्र मोदी को मिला वहां पे. इसलिए इसकी चर्चा हुई. 

सवाल: सर अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की जब मुलाकात हुई तो एक अंग्रेजी अखबार की हेडलाइन थी. वो मैं आपको सुनाना चाहती हूं. प्राइम मिनिस्टर मोदी मीट्स ट्रंप आफ्टर 16 मंथ्स विद अ हैंडशेक नॉट अ हग. आप इसको कैसे देखते हैं सर? 

जवाब: इसका दूसरा पहलू है साइडलाइन का वो यह है कि एक बड़े अखबार में यह भी लिखा है कि ए नरेंद्र मोदी ट्रंप हग ब्रेक्स आइस और दूसरी बात ये है हग करने के लिए मंग में उमंग होनी चाहिए उत्साह होना चाहिए हग सेरेमोनियल नहीं होता तो निश्चित तौर पर मेरा आकलन नरेंद्र मोदी के मन में ऐसा उत्साह नहीं रहा होगा ट्रंप का व्यवहार ही ऐसा रहा है दिस इज़ वेरी डिसपॉइंटिंग वेरी डिसगस्टिंग जिसे कहना चाहिए हो सकता है उतना उत्साह नहीं हो मन में जो है लेकिन फिर भी हालात ठीक थे व्यवहार ठीक थे बातचीत हुई 10 मिनट जितना भी बातचीत हुई वो सब ठीक था लेकिन जो हक का सवाल है हक तो देखो उनका मन करेगा जब नरेंद्र मोदी हग तो तभी करेंगे.

सवाल: सर राजनीतिक प्रेक्षक इस बात को लेकर हैरान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राष्ट्रपति ट्रंप का सरकारी और जो व्यक्तिगत व्यवहार है इसमें इतना अंतर क्यों है?

जवाब: यस ब्रिलियंट क्वेश्चन देयर इज हज गैप बिटवीन ह वर्ड्स एंड एकशंस इसलिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय वित्त मंत्रालय अधिकारी परेशान हैं कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की घोषणाओं को जो कहते हैं स्ट्रेटेजिक पार्टनर है हम कितना महत्व दिया जाए बिकॉज़ व्हेन इट कम्स टू एकशंस दे हैव सर्टेनली अ डिफरेंट सेट ऑफ कैलकुलेशंस तो क्या करें इस ओथे में इस कन्फ्यूजन में जो है हमारी ब्यूरोक्रेसी लीडरशिप कहती है ट्रंप ट्रंप को लेकर के अब एक पल के लिए ये देख लें कि ट्रंप जो है मोदी के मुरीद हैं. और मैं कहूं अगर संसार में नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े प्रशंसक हैं तो ट्रंप हैं. इसमें अतिशक्ति नहीं होगी. वो क्या कहते हैं उनके लिए ही इज़ अ कूल काम. फिर कहेंगे वो देवदूत फरिश्ते की तरह दिखाई देते हैं. नरेंद्र मोदी ये ट्रंप कह रहे हैं. और फिर यह भी कह रहे हैं कि टफ गाय हैं, टफ कुकी हैं, ग्रेट व्यक्ति हैं. फिर अहमदाबाद की अपनी यात्रा को याद कर रहे हैं. तो एक्चुअली प्रॉब्लम क्या है कि ट्रंप के मन में नरेंद्र मोदी समाए हुए हैं. उठते बैठते, जागते, सोते उनको नरेंद्र मोदी दिखाई देते हैं. नरेंद्र मोदी का जितना महिमा मंडन और जितना मान सम्मान वोकल तरीके से ट्रंप करते हैं. शायद संसार में कोई दूसरा लीडर नहीं करता. लेकिन प्रॉब्लम यह है कि ट्रंप जैसे ही वाशिंगटन की अपनी कुर्सी पर बैठते हैं बस वही उनका दिमाग खराब हो जाता है और फिर वो डिफरेंट हो जाते हैं. जिसे कहना चाहिए ना एगोनी कह दो इसे एनग्मा कह दो इसे डलेमा कह दो इसे वी हैव टू बियर विद इट.  

सवाल: जी7 में ट्रंप ने एक और घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए अगर भारत पर किसी ने भी हमला किया तो अमेरिका भारत के साथ खड़ा रहेगा. आखिर इस आउट ऑफ द टर्न आउट ऑफ द कॉन्टेक्स्ट घोषणा का महत्व इसके मायने क्या है?

जवाब: मायने तो ये है कि एक तो नरेंद्र मोदी के प्रति उनके सम्मान उनके आदर का प्रतीक है. एज एन इंडियन सुनने में अच्छा लगता है. लेकिन सवाल ये है कि भारत पे कौन हमला कर रहा है?
हम किसकी हिम्मत है भारत पे हमला करने की? आवश्यकता कहां है इसकी? इस बयान की? और फिर आपका ट्रैक रिकॉर्ड क्या रहा है? यू आर अब्सोलुटली नॉट डिपेंडेबल. हम वी आर वरेबल इन वे कौन डिपेंड करे आपकी बात पर हम पे हमला कौन करेगा होगा तो चाइना से संघर्ष होगा और चाइना से होगा तो चाइना एक डील देगा आप चुपचाप अपने घर में बैठ जाएंगे यू आर अ बिज़नेसमैन यू कांट बी ट्रस्टेड लेकिन हां फेस वैल्यू अच्छा लगा उन्होंने भारत के लिए कहा और ये भी कहा जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं तो उनका कमिटमेंट मोदी के साथ है तो एज ए मोदी भक्त के लिए या एज अ मोदी एडमायर जो है हम कह सकते हैं उसको कि बहुत अच्छा लगा सुनने में लेकिन कोई खास इसकी आवश्यकता नहीं थी लेकिन एट द एंड ऑफ़ द ट्रंप की प्रशंसा की जानी चाहिए. उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के लिए ऐसे उद्गार कहे. 

सवाल: सर सर आखिर ट्रंप और मोदी के बीच में किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई?

जवाब: बेसिकली ट्रेड डील की बात चल रही है. एक तरह से नाविकों का मुद्दा था. ट्रेड डील है और बाकी आपस में प्लेजेंटरी का एक्सचेंज होता है. और बाकी ट्रेडिशनल मुद्दे सारे हैं. पावर है. देखिए एआई है, डिफेंस है, कम्युनिकेशन है, टेक्नोलॉजी है, सब कुछ है. इन सब मुद्दों पे इस तरह से टच करके जैसे बात होती है, बात हुई. बेसिकली तो क्या है ना आइस ब्रेक मीटिंग थी. 16 महीने के बाद मीटिंग हुई थी और नरेंद्र मोदी बहुत कोश थे. उसको कोई ऐसा मौका नहीं देना चाहते थे कोई लूज कमेंट करने के लिए. तो नरेंद्र मोदी बिहेवियर वास वेरी डिग्निफाइड एंड डिसेंट. एक ब्रीफ और प्रोसाइज मीटिंग थी जो ठीक से हुई. दिस इज ऑल. 

सवाल: सर ट्रंप के साथ बातचीत में नरेंद्र मोदी ने हॉर्मोस में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के मुद्दे को एक नहीं दो बार उठाया. आखिर नरेंद्र मोदी इस पूरे मुद्दे को लेकर इतने ज्यादा चिंतित क्यों नजर आए?

जवाब: इसलिए चिंतित हैं भारत के आम नागरिक के प्रधानमंत्री हैं. वो इंडिया फर्स्ट ह्यूमनिटी फर्स्ट पहले कई मौकों में देखा है भारत के लोगों को छुड़वाने के लिए विदेशों से जो फंस गए थे कई देशों में अलग-अलग लोग की सीमा तक चले गए थे. तो यहां भी सीमा तक चले गए. ट्रंप को उन्होंने दो टूक यह कहा कि समुद्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा निश्चित होनी चाहिए. तो ट्रंप को कहना पड़ा कि देखते हैं मिलके काम करेंगे और फिर ये भी कहा कि जोखिम भरा जीवन है वो तो सब जानते हैं जोखिम भरा लेकिन नरेंद्र मोदी ने अपनी तरफ से मुद्दों को प्रभुता उठाया और देश में और खास करके सेना में और आम आदमी के जीवन में जो है नरेंद्र मोदी का जो इनिशिएटिव था, उनका जो स्टैंड था, उनकी जो चिंता थी, उनका जो कंसर्न था उसको एप्रिशिएट किया गया. 

सवाल: सर जी7 समिट के दौरान में बड़बोले ट्रंप ने एक बार फिर से दोहराया आई एम द बॉस. आप इन उद्गारों को कैसे देखते हैं? और आखिर मानसिक तौर पर ये जो ग्लोबल पुलिसमैन की भूमिका में अपने आप को देखते हैं ट्रंप इससे मुक्त कब हो पाएंगे? 

जवाब: अब देखो आदतें तो सिर के साथ जाती है आदमी की. एक तो मीटिंग में देर से आए. फिर एोगेंस कि आई एम द बॉस. वक्त बताएगा हु इज द बॉस. आज ऑल प्रैक्टिकल पर्पस देखा जाए तो आज वह लोग तो कहीं है नहीं. चाइना वैसे रेस में नहीं है तो नरेंद्र मोदी बॉस दिखाई देते हैं. लेकिन वी फील शाई और ट्रंप के सामने कौन इस बात को कहे? कौन इसे खंडन करे या कौन कंट्राडे करे? कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस होती तो कोई कहता नो यू आर नॉट द बॉस. नाउ मोदी इस एमर्जिंग बॉस. कह सकते थे वहां पे. एनी हाउ ये जस्ट एोगेंस और इट शुड नॉट बी टेकन सीरियसली. ठीक है. जस्ट अ फाइन. 

सवाल: सर G7 समिट में मोदी के प्रति इटालियन प्रधानमंत्री मेलिनी के एक्स्ट्रा फ्रेंडली बिहेवियर को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: वो तो है बेसिकली तो वनवे ट्रैफिक है. उनकी तरफ से एक्स्ट्रा फ्रेंडली होता है. तो मोदी हैज़ टू रेस्पोंड एज अ जेंटलमैन एज अ डिसेंट डिग्निफाइड प्राइम मिनिस्टर तो जवाब देना होता है. मिले आपस में तो मेलोनी ने ही पोस्ट किया वहां पे. नाइस टू सी यू अगेन. वी आर द मोस्ट पॉपुलर कपल ऑन Instagram. तो मुस्कुराए नरेंद्र मोदी और हल्कीफुल्की बातचीत हुई तो चल दिए तो वन मोर इंसिडेंट जिसमें कि नरेंद्र मोदी और मेलोनी की जो जोड़ी है जो डिप्लोमेटिक कपल जिसे कहते हैं उसकी चर्चा हुई और एक आकर्षण का केंद्र रहा और लाखों लोग इस बात का इंतजार करते रहे कि अब ये कब छाए रहते हैं Facebook पेज पे और वही हुआ उन्होंने कहा कि Facebook के करोड़ों लोग हमको देखते हैं. तो एक ये नया इक्वेशन डेवलप हो गया. नरेंद्र मोदी हर यात्रा में कहीं ना कहीं से वो घूम के आ जाती है वहां पे. ठीक? और फिर एक पॉलिटिकल एक डिप्लोमेटिक कपल बनता है और एक प्रचार प्रसार होता है और दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होते हैं और सबको अच्छा लगता है. 

सवाल: सर मैंने सुना है कि इस बार उत्तराखंड से पहली बार 1000 किलो उत्तम किस्म की जो लीची है वो इटली भेजी गई है जिससे 25% किसानों को ज्यादा दाम मिल रहे हैं. क्या ये जो लीचियां हैं वो मेलनी तक भी पहुंचेगी? 

जवाब: अनुमान तो लगाया जाना चाहिए कि पहुंचेंग और कोई आश्चर्य नहीं कि थोड़ा विदेश मंत्रालय से भी गया एक पैकेट कट सी होती है विदेश में जाते हैं लोग उपह पार ले जाते हैं कोई आम भेजता है पाकिस्तान से कोई यहां से कोई मूर्ति लेके जाता है अब लीचियों की बात सही है मैं पिछली बार जब वहां गया देहरादून तो वहां लीचियों के बहुत ठेलो लगे हुए थे एक तो साइज बड़ा था वहां की लीची का मैंने देखा दूसरा क्या सुगंध है थोड़ा सा एक स्वादिष्ट है और क्वालिटी इसकी बहुत अच्छी है दैट वे तो अच्छी बात यह है कि मेलोनी और नो उत्तराखंड के किसानों का भला हो गया. आप यह मानिए अब और दूसरी बात क्या है कि नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ से चीज उछलती है. आज मेरे मन में भी आया कभी फोन करके अपन वहां रिपोर्टर से कहेंगे अरे एक लीची तो भेजना वहां से वो तो लीची गायब हो जाएगी देखना से. तो एट द एंड ऑफ़ द डे इट वाज़ अ गुड जेस्चर. अब मेलोनी तक पहुंची कि नहीं? ऐसा मेरा अनुमान है कि पहुंचीगी नहीं तो पहुंचंगी. 

सवाल: सर एक बार फिर पॉलिटिकल इमैच्योरिटी दिखाते हुए डोनल्ड ट्रंप ने टारगेट किया मेलोनी को जिनका हम जिक्र कर रहे हैं इटली की प्राइम मिनिस्टर और कहा कि ये फोटो खिंचवाने के लिए मुझसे मन्नत मांग रही थी शी बेग्ड फॉर इट और स्वाभिमानी मेलोनी ने भी रिटेलिएट किया तो आप इस पूरे किस्से को कैसे देखते हैं सर?

जवाब: इसमें ये कि ये ट्रंप के पार्ट पे ऐसा लगता है ट्रंप आत्महत्या करना चाहते हैं. मेलोनी से जो भिड़ा है बर्बाद हुआ है. आज तक का इतिहास है ये. और उससे जितना दूर हो विवाद से उतना अच्छा है. नरेंद्र मोदी दोस्ती अच्छी है. उससे विवाद अच्छा नहीं है. ट्रंप को सीखना चाहिए हाउ टू हैंडल दिस लेडी जो है नरेंद्र मोदी कितने अच्छे व्यवहार है. कितनी अच्छी दोस्ती है आप देखिए. तो उसने अनक्ल्ड फॉर ऐसे ही बयान दे दिया. वहां पे जो है उसे पलट के वार किया. उसने कहा हम स्वाभिमानी इटली वाले हैं. मेरे विदेश मंत्री जा रहे थे. मैंने दोबारा रद्द किया उसका मैसेज देने के लिए आपको जो है और आप यह सोचते हैं कि आपके साथ फोटो खींचने में लोकप्रियता होगी. मुझे आपकी लोकप्रियता नहीं चाहिए. आप अपने पास रखिए. मैं पहले से बहुत पॉपुलर हूं और मेरी लोकप्रियता जनता तय करती है. जनता के कारण से मुझे आती है. तो एक इंडीसेंट एक अनकॉल्ड फॉर जिसे कहना चाहिए वो शुरुआत हुआ. लेकिन उन्होंने जिसे कहना चाहिए एक ट्रंप ने शहद के छत्ते में हाथ डाल दिया है अननेसेसरी. मेलोनी का इतिहास इस तरह रहा है कि बहुत ही धाकड़ और बहुत ही संघर्षशील इस तरह की महिला रही हैं. बहुत लड़ाईयां लड़ती है. फिर अंत में जीत भी जाती हैं. एक बार ये लेबनान को ले कोई किस्सा हो गया था. अड़ गई कि नहीं मान्यता जो है 20 लाख लोग सड़कों पर आ गए नहीं मानी अल्टीमेटली विक्टर हुई ऐसे पांच सात किस्से मैंने पढ़े हैं उनके कि भाई उससे तो दूर से नमस्ते ही अच्छा है बस और ऐसे हैंडल करो जैसे नरेंद्र मोदी हैंडल करते हैं नमस्ते जो है ये अब ट्रंप ने गलती की है जो है आप देख आने वाले दिनों में ट्रंप मानेगा नहीं वो मानेगी नहीं एक अच्छा खासा डंड गिरेगा और अल्टीमेटली महिला से कहां तक लड़ोगे ये भी ट्रंप को सोचना चाहिए एट द एंड ऑफ़ द डे जो है तो इट इज़ ए जिसे कहना चाहिए वो वो कहते हैं स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तो इट अ स्ट्रेटेजिक ब्लंडर ऑन द पार्ट ऑफ़ ट्रंप. टू हैव अ झगड़ा विद मेनी. 

सवाल: सर आखिर ये कैसी विडंबना है? एक तरफ जिनेवा में समझौता वार्ता और दूसरी तरफ लेबन में इजराइली हमलों के बाद में हॉर्मूस के बंद होने की घटना. आखिर आप कैसे डिफाइन करते हैं इस कंट्राडिक्शन को?

जवाब: अबब्सोलुटली कंट्राडिक्शन है. और डिफाइन भी नहीं किया जा सकता. जिसे कहना चाहिए एंड ट्रंप इज रेस्पांसिबल. जिसे कहना चाहिए माइंड चेंजिंग माइंड ट्रंप इस रेसिबल क्योंकि आज समझौता हुआ है कल फिर हमला करने इजराइल जा रहा है इजराइल आपका पुत्र है दत्तक पुत्र है माना जा रहा है कि आपका एंडोर्समेंट है तो कैसे होगा ऐसे तो चल नहीं सकता ना कि आप स्विट्जरलैंड में तो वार्ता कर रहे हैं उसे 24 घंटे पहले आप हमला कर रहे हैं 50 लोगों को मार रहे हैं वहां पर कैसा चलेगा ये जो कंट्राडिक्शन है ओनली हिस्ट्री विल डिफाइन दिस कंट्राडिक्शन दिस इज़ ऑल. 

सवाल: आखिर होर्मुज से गुजरने वाले जहाज मौजू पर क्या फैसला होगा टोल टैक्स की वसूली का?

जवाब: आप एक बात नोट करके रख लीजिए. टैक्स देना पड़ेगा ईरान को. आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों जो समझौता होगा उसकी मात्रा में फर्क हो सकता है. ठीक है? बाकी ट्रंप की एक कल्पना है खाली कि मैं उस पर कब्जा कर लूंगा. फिर टोल टैक्स में मैं वसूल करूंगा. मैं डिसाइड करूंगा. 20% ऑयल मेरे पास रहेगा. उसका ऑयल मैं बेचूंगा. माफ़ कीजिए. मूर्तपूर्ण बातें इन अ वे दैट वे जो है तो कुल मिला के क्या है कि टैक्स तो आपको आज नहीं तो कल हॉर्न पे देना पड़ेगा मे बी रीज़नेबल. 

सवाल: सर आखिर क्या है अमेरिका ईरान समझौते का भविष्य क्या यह समझौता भी बलि चढ़ेगा डोनाल्ड ट्रंप के ब्लो हॉट ब्लो कोल्ड मूड एंड एटीट्यूड का आखिर कितना कारगर होगा इस्लामाबाद में मेमोरेंडम?

जवाब: अब्सोलुटली क्वेश्चन इज वेरी वैलिड और इसका जवाब यही है कि दिस समझौता इज गोइंग टू बी बिग बिग फ्लॉप जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ ट्रंप्स नॉन क्रेडिबिलिटी. ठीक है? इट्स नॉट गोइंग टू लास्ट. इट्स गोइंग टू हैव ए नेचुरल डेथ. इट्स गोइंग टू बी लाइक ए प्लेन व्हिच क्रशेस और रनवे इटसेल्फ बिफोर टेक ऑफ. और इसके अंदर जो छिपे हुए कारण है इनबिल्ट जो रीज़ंस है वो सबके सामने. वन ब्लो ब्लॉक कोल्ड एटीट्यूड ऑफ ट्रंप. सेकंड इजराइल कंट्रोल में नहीं है लेबनान के मुद्दे पर. ठीक है? आप देख रहे हैं इसको. तीसरा परमाणु हथियार आप कह है कि कभी कुछ कहते हैं आप कभी कुछ कहते हैं. कभी तो कहते हैं परमाणु हथियार नष्ट कर देंगे हम उसे. कभी कहते हैं कब्जा कर लेंगे. फिर कहते हैं चलो ठीक है यूएन का अगर आदमी है उसके देखरेख में रखेंगे तो हम इसके लिए मंजूर हैं. तो यह जो सारी स्थितियां है ना यह समझौते को अच्छा नहीं बनाती हैं. दैट वे तो मुझे कोई संभावना नहीं दिखाई देती है. बल्कि ट्रंप ने अमेरिका को एक ऐसे उसमें ड्रैग कर दिया है जैसे रूस और यूक्रेन का वॉर. अब अमेरिका और ईरान का ये जो युद्ध है छलम युद्ध है. कभी-कभी कभी एक्चुअल युद्ध है. ये वर्षों चलेगा और बहरहाल ये जो समझौता है इट्स गोइंग टू बी मेजर फ्लॉप. ऐसा मेरा मानना है. 

सवाल: सर यूएस ईरान पीस डील अ वॉर व्हिच ट्रंप चोज़ और लॉस्ट आज सारे विश्व में ऐसा क्यों महसूस किया जा रहा है?

जवाब: क्योंकि सच है ये आ बैल मुझे मार. किसने कहा था हमला करने के लिए? तब भी जिनेवा में बात चल रही थी. आपने हमला कर दिया सऊदी अरब के कहने पे या किसी के कहने से. ऐसा थोड़ी होता है. तो सब ने लिखा कि एक ऐसा झगड़ा है जिसमें कि कुछ इसको मिला नहीं है. ट्रंप को मिलना भी नहीं है इसके अंदर. और एट द सेम टाइम ईरान जो है पावरफुल हो गया. आप देखिए अभी सर्व हुआ है इजराइल में इटसेल्फ. उन्होंने कहा कि 93% लोग ये कहते हैं ईरान ज्यादा शक्तिशाली हो गया है. तो आपने जबरदस्ती झगड़ा मोल लिया और बाद में फिर गिड़गिड़ाना पड़ा आपको कि समझौता कर लो किसी तरह से. सारे संसार में जो है आपका मैसेज गलत गया. अमेरिका का जो ग्राफ था वो यू नोज़ ड्राइव हुआ वहां पे जो है और ये सब हुआ तो एट द एंड ऑफ़ द डे तो लोग ठीक कह रहे हैं कि आपने खुद ही तो उसको क्रिएट किया और उस लड़ाई को खुद ही हारा और बाद में एग्जिट के लिए जो है आपको बहाने ढूंढने पड़े आपको हाथ जोड़ के एग्जिट करना पड़ा.  

सवाल: सर हर पल अपना मूड बदलने वाले ट्रंप ने एक और गंभीर बात कही. अगर मुझे डील पसंद नहीं आई वी विल गो बैक टू शूटिंग, ड्रॉपिंग बॉम्ब एंड आई एम द बॉस. आप कैसे देखते हैं ट्रंप के इस व्यवहार को?

जवाब: अगेन द सेम अनप्रिडिक्टेबल ट्रंप जिसे कहना चाहिए बहुत ही अनफॉर्चूनेट और सबसे आश्चर्य की बात यह है कि उनके खिलाफ अभी तक अमेरिका में कोई बड़ा आंदोलन कैसे खड़ा नहीं हुआ? इस तरह का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करने के लिए. आप बताइए आप वाशिंगटन में बैठे हुए हैं. आप मॉनिटर कर रहे हैं कि आपका उपराष्ट्रपति गया हुआ है. वहां डायलॉग चल रहा है. मीटिंग में से लोग बैठे हुए हैं. आप बीच में अपना ट्वीट कर रहे हैं कि अगर यह नहीं हुआ तो हम बड़ा हमला करेंगे. तो ईरान ने पलट के थप्पड़ दिया इस बार. उन्होंने कहा हमारी सेनाएं तैयार है. आइए लड़िए हमसे आप जो है और चेतावनी और दी ट्रंप को इस बार जो है कि आप अपने बयान सोच समझ के जारी करिए. ट्रंप को हम यह चेतावनी देते हैं. इसमें जो है दैट वे क्या निकला? कोई प्रणाम नहीं निकला. अब बेचारे वेंस क्या करें? उपराष्ट्रपति हैं. राष्ट्रपति तो ट्रंप है ना वो बोल्टे फेस हो जाते हैं. वो मीटिंग में बैठे हुए हैं. बातचीत चल रही है. समझौते की बात आगे बढ़ रही है. वेंस क्या है कि लॉजिकल आदमी है. एक तरह से उन्होंने कहा कि वी विल टर्न अ न्यू लीफ दिस टाइम. ट्रंप ने ये बयान देके सत्यानाश कर दिया उसका. दैट इज़ ईरान ने पलटवार वार किया वहां पे. फिर दो कौड़ी के हो गए. तो वेरी अनफॉर्चूनेट. तो इन सब हालात के देखते हुए मुझे लगता नहीं कि ये समझौता कभी होगा. 

सवाल: सर राजनीतिक प्रेक्षकों का यह मानना है कि आमतौर पर ट्रंप शुक्रवार शाम के बाद वीकेंड तक आते-आते कोई ना कोई कंट्रोवर्शियल स्टेटमेंट दे देते हैं. क्या इसका कोई संबंध है ग्लोबल शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव से रिलेटेड? 

जवाब: ट्रंप बेसिकली तो एक व्यापारी हैं, बिजनेसमैन है, स्मार्ट बिजनेसमैन है, शेयर होल्डर भी हैं. तो कई बार ऐसी चर्चा चलती है, उनके बारे में लूजक चलती है कि घटनाओं को ऊपर नीचे करके जो उतार-चढ़ाव है शेयर मार्केट का उससे लाभ कमाते हैं. दैट वे जो है अब ये लोगों ने नोट किया है ये. इट मे बी कोइंसिडेंस, इट मे बी डेलीबेट कि फ्राइडे को ऐसा करते हैं और बाद में लोग क्या करते हैं? पैनिकिक सेलिंग करते हैं. बिक जाता है माल वहां पे इधर-उधर सोने वगैरह में प्रॉपर्टी में कन्वर्ट हो जाता है. फिर वो खरीद लेते हैं. एक आम धारणा है. लेकिन अनफॉर्चूनेट बात ये है ना कि ट्रंप की इमेज अमेरिका के राष्ट्रपति होते हुए भी आज एक बिजनेसमैन और शेयर ब्रोकर की बनी हुई है. जिसको कोई तोड़ नहीं पाया. तो वी कांट से व्हाट एक्सक्टली हैपेंस ऑन फ्राइडे इवनिंग्स. 

सवाल: सर आपको क्या लगता है डॉनल्ड ट्रंप के इस रवैया से दुनिया के सबसे ताकतवर संगठन नेटो में फूट पड़ गई है? 

जवाब: ऑफकोर्स आपका वमिकल एटीट्यूड है. कभी आप ब्रिटेन को नाराज कर लेते हैं. अब आज बैठे-बठाए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का इस्तीफा हो रहा है. अरे भाई तुम कौन हो? इस्तीफा होने दो ना वहां पे. जिसे कहते हैं दूसरे के फटे में डांग डालना. क्या मतलब है आपको? उससे जो है कहते हैं नहीं ये फेल हो रहा. अरे भाई यू आर नॉट राष्ट्रपति ऑफ़ ब्रिटेन. वो अलग देश है. आप अलग देश हो. उसका अलग संविधान है. निर्वाचित लोग हैं. आप कह रहे हो वो एनर्जी फेल हो रहा. और अभी हु आर यू टू से दिस थिंग इन बातों से कटता होती है और फिर जो आर्मी की बात थी इटली ने कहा मैं तो नहीं अपने यहां उनकी लैंड करने दूंगी उनकी आर्मी को और एक झगड़ा ये भी था वहां मलोनी के प्रति नाराजगी थी ट्रंप की एक झगड़ा ये भी है कि मेलोनी पावरफुल औरत है तो उसने उसमें कह दिया हम पार्टी नहीं झगड़े के अंदर आपके जो है आई विल नॉट अलाउ लैंडिंग ऑफ़ यूएस आर्मी प्लेस ऑन इटली लैंड जो है तो उसने उसको नहीं करने दिया दैट वे तो इसमें आधे राष्ट्र तो ट्रंप के साथ हो जाते हैं आधे अलग हो जाते हैं एक अच्छा वाला बड़ा पावरफुल ऑ्गेनाइजेशन था नाटो जो काम आता था आप सहायता करते थे उसको भी आपने खंडित कर दिया है. इसीलिए कहते हैं कई बार ट्रंप के लिए कि सम टाइम ही बिहेव्स लाइक बुल इन चाइना शॉप तो यह हो रहा है नाटो में भी हो रहा है इस तरह से.

सवाल: सर फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मीटिंग से ठीक पहले एक अनफ्रेंडली मूव जिसमें सर यूएस इंडोपेसिफिक मिलिट्री कमांड से इंडो शब्द का हटा देना इस घटना को आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: ये घटना वही है कि देयर इज़ अ ह्यूज गैप बिटवीन ट्रंप अशोरेंसेस एंड ह एक्शंस ये उसका एक उदाहरण है एक तरह से देखा जाए तो और कोई मतलब वो नहीं है एक धारा 3001 और है उसमें भारत को शामिल कर दिया उसमें इन्वेस्टिगेशन चल रहा है. उन राष्ट्र अनुसार भारत उसमें शामिल हो गया है. इसलिए एक अखबार ने बहुत अच्छा लिखा है. वी शुड नॉट बी लॉस्ट इन द फ्लरी ऑफ़ कॉम्प्लीमेंट्स एंड फाल्स एप्रिसिएशन ऑफ ट्रंप जो है. तो ऐसे ही ये चलेगा बिकॉज़ देयर इज़ अ ह्यूज गैप. देयर इज़ अ कंट्राडिक्शन बिटवीन नेचुरल एंड एकश जो है तो ये उसी का एक प्रतीक है. 

सवाल: सर कैन इंडिया एंड यूएस वर्क टुगेदर अगेन डू यू थिंक सो इज इट पॉसिबल?

जवाब: अब्सोलुटली शो मस्ट गो ऑन नो ऑप्शन. यूएस आल्सो कांट अफोर्ड इंडिया आल्सो कांट अफोर्ड ए ब्लैक आउट ऑन बिजनेस फ्रंट और फिर एक बात और है दैट्स बीन वेरी फेयर टू ट्रंप दिस टाइम इन दिस मीटिंग तो देयर वाज़ ए गुड डिग्री ऑफ़ वथ ड्यूरिंग देयर बटरल एक्सचेंजेस और इंटरेक्शन जो है तो उससे थोड़ी धारणा बनती है. लेकिन जहां तक स्ट्रेटेजिक इशज़ का सवाल है, इकोनमी से जुड़े इशज़ का सवाल है, ट्रंप कांट बी डिपेंडेड. ही इज़ नॉट डिपेंडेबल. पर व्यापार दोनों में रहेगा. दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं सकती. एक दूसरे के सप्लीमेंट्री है तो व्यापार निश्चित तौर पर रहेगा और अब डील होने वाली है. व्यापार और बढ़ा. तो व्यापार के फ्रंट पे अब ज्यादा चिंता नहीं दिखाई देती है. पिछली बार ये कहा ना ईरान वाले ने कि ट्रंप ने इस बार 180° का टर्न लिया है. तो मेरा ऐसा मानना है वहां लिया या नहीं लिया. भारत में जरूर ले लिया उन्होंने. आई थिंक थिंग्स हैव कम टू सेंसेस. और अब जो डील होगी उसमें बेकार की धमकियां नहीं आएंगी. 50% टेरिफ लगा देंगे और 30% लगा देंगे. अब डील होने वाली है दिसंबर में जब भी कभी होगी. तो आई थिंक देयर इज अ गुड फ्यूचर ऑफ़ बिजनेस प्रमोशन बिटवीन द टू कंट्रीज. 

सवाल: सर आपको क्या लगता है अमेरिका ईरान समझौते के बाद क्या फिर से कायम होंगे भारत और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते? 

जवाब: ऑफकोर्स अभी कोई 18 2000 करोड़ का व्यापार है बढ़ेगा रेस्ट्रिक्शन थी प्रतिबंध लगा रखे थे अमेरिका ने ईरान पे तो हम उसे उतना व्यापार नहीं कर सकते थे जो करना चाहिए था फिर ऑयल चाहते थे लेना तो फिर नहीं लेने दिया फिर कभी लेने दिया कभी नहीं लेने दिया दैट विल है लेकिन स्थितियां अगर सामान्य होती हैं तो भारत और ईरान के जो व्यापारिक रिश्ते हैं ये और बढ़ेंगे. 

सवाल: सर आखिर इस प्रकार कितना टिकाऊ सिद्ध होगा इजराइल और हिजबुल्ला के बीच में सीज फायर समझौता?

जवाब: इजराइल का तो बेसिक इशू क्या है कि उनका जो प्राइम मिनिस्टर है ही इज़ ए वारियर प्राइम मिनिस्टर. उसको 24 घंटे लड़ने में मजा आता है. ट्रंप और नो ट्रंप दैट वे जो है तो कोई उसका भविष्य नहीं है. आज ठीक है. कल को कह देंगे साहब ये हिजबुल्ला ने जो है साहब ये मार दिया. यहां ये इंफॉर्मेशन हमारे पास में है. अटैक कर दिया. अटैक किया नहीं किया. इनेशन है. फिर ठोक आएंगे जाके 25 फिर मार के चले आएंगे. तो नो फ्यूचर इस समझौते का कोई फ्यूचर नहीं है.  

सवाल: सर यूएस ईरान समझौते की घोषणा होने के बाद इजराइल ने लेबनन पर हमला कर दिया और 32 लोग मारे गए. सर आपको क्या लगता है, उसके बाद गुस्साई ईरान ने हॉर्मूस को फिर से बंद कर दिया. तो ये संकट कब सुलटेगा?

जवाब: ओनली गॉड नोज़ देखो ये सारे मामले इंटरलिंक हैं आपस में. ईरान यूएस का समझौता होता है. फिर ईरान इजराइल में कुछ संबंध बनते हैं. फिर क्या है कि इजराइल और लेबनान में कुछ संबंध बनते हैं. तो अभी तो कोई निश्चित रोड मैप जो है ना वो नहीं दिखाई देता है. लेट्स सी व्हाट फाइनली कम्स आउट इन द कमिंग मंथ्स. 

सवाल: सर इजराइल इतना नाराज क्यों है अमेरिका ईरान के बीच समझौते से और क्या सर यहां से ही अमेरिका और इजराइल के बीच में टकराव शुरू होगा. और सर एक सवाल और है कि अमेरिका यूरान युद्ध में सबसे बड़े लूजर के नेतन्याहू हैं. 

जवाब: अभी तो यह लगता है लूजर है कि नहीं तो बहुत ठोका लोगों को छांट छांट के मारे हैं उनके लोग जो थे जो टॉप पर्सनल थे आर्मी पर्सनल थे जिनके थे और बहुत जबरदस्त इजराइल की सक्सेस है पर डिसपॉइंटिंग इसलिए है कि ही फील्स आइसोलेटेड वो एक मेन प्लेयर थे इस सारी कहानी में बल्कि जो झगड़ा हुआ था सऊदी अरबिया और इनका रोल था इजराइल का उसको प्रमोट करने में ट्रंप को कि अपने को अटैक करना है वहां पे जो है लेकिन अनफॉर्चुनेट बात ये जो समझौता हो रहा है स्विट्जरलैंड में तो इसमें इजराइल इज़ नॉट अ पार्टी ही इज़ आइसोलेटेड इज़ लेफ्ट आउट जैसे है तो उन्होंने कहा खुद ने वी आर नॉट सिग्नेटरी टू दिस एग्रीमेंट वी आर नॉट ए पार्टी टू दिस एग्रीमेंट तो मतलब क्लियर है और उनका तो 24 घंटे एक ही काम है सुबह उठते ही इजराइल वालों का कि आज किस पे अटैक करना है उनको उनकी जानी दुश्मनी है जैसे कि शत्रुता का भाव है वहां पे और इसी कारण से आपने कहा टकराव तो टकराव शुरू हो गया है. अब अगले दौर में ट्रंप जो धमकी देगा ईरान को नहीं देगा. अब अगली धमकी इजराइल वालों को देगा. मैं तुम्हें बर्बाद कर दूंगा. तुम मेरे पैसे पे जिंदा रहते हो. मैं जब चाहूं जब तुमको उठा सकता हूं, गिरा सकता हूं. ऑल बुल इट दैट इज तो ये ऐसे ही चलेगा. 

सवाल: सर आखिर इजराइल चाहता क्या है?

जवाब: बहुत डिफिकल्ट सवाल है. लेकिन वो तो उसका मन जो है उसकी महत्वाकांक्षा तो ये है कि लेबनान और ये खत्म हो जाए गाजा. संसार की पट्टी से मिट जाए. जैसे एक बार ट्रंप ने धमकी दे दी थी. मैं आज इसका नक्शा बदल दूंगा. सारी जो एक सभ्यता समाप्त कर दूंगा मैं. और आज देखिए क्या हालात हैं. ईरान से गिर उड़ा रहे हैं आप डील करने के लिए. दैट इज एनी हाउ वो चाहता तो उसका मन यह है कि मेरा राज्य और जिससे मेरे को नफरत है उस कौम से वहां जो है यह बर्बाद हो जाए खत्म हो जाए गायब हो जाए लुप्त हो जाए वो हो नहीं सकता इसलिए संघर्ष ऐसे चलता रहेगा फिर बेसिकली वो ये चाहता है अगर चाहने की अगर विश लिस्ट बनाए इजराइल क्या चाहता है तो सबसे पहले चाहता है हिजबुल्लाह एंड अदर्स हमास, हूती ये सब जो है ये संसार से मिट जाए इनका नक्शे से मिट जाए सबसे पहले तो ये वो चाहते हैं इसके फिर वो चाहते हैं कि लेबना इजराइल के 10 कि.मी. का जो एरिया है बॉर्डर का उसमें इनकी सुरक्षा सेना लगा रखी है. इजराइल ने वो वहां बनी रहे और वो वहां रहनी चाहिए. मेरी सेना वहीं रहे वहां पे. अमेरिका ऐसा नहीं चाहता समझौता हो रहा है. समझौता टोटिटी में होगा ना. और फिर क्या है कि अब इलेक्शंस आ रहे हैं वहां पे नेक्स्ट ईयर बाय द ईयर एंड जो है तो ये सोचते हैं लड़ाई चलती रही तो इलेक्शन जीत जाएंगे. तो भाई देखो वो तो इजराइल तो इनकोजेबल है. इट इज़ डिफिकल्ट टू कंट्रोल इवन फॉर द ट्रंप. सो लेट्स सी. 

सवाल: सर आपको क्या लगता है अब ईरान ही गल्फ का असली मालिक होगा? 

जवाब: उसका रुतबा तो ऐसे बना है. देखिए एक आदमी 50 साल से जो आइसोलेटेड था वर्ल्ड पॉलिटिक्स में आपने खड़ा कर दिया उसको अपने इमचोर एक्शन से और मैंने आपसे बताया ना अभी इजराइल में एक सर्वे हुआ वहीं के लोगों ने कह दिया कि 93% लोग ये कहते हैं ईरान हैज़ एमर्ज मोर पावरफुल. और पूरी दुनिया कह रही है ईरान हैज़ एमर्ज मोर पावरफुल. बिकॉज़ दे बिहेव दे टॉक सेंस. और कोई कोई नया चमत्कार नहीं है वहां पे उसमें ईरान में जो है बिकॉज़ दे आर बिहेविंग लाइक ए कॉमन मैन. ट्रंप इज़ नॉट बिहेविंग लाइक अ कॉमन मैन. लाइक ए कॉमन जैसे एक सामान्य बुद्धि का व्यक्ति व्यवहार करता है. और ट्रंप के यहां सिस्टम नहीं है. विमजिकल सिस्टम है. इसलिए क्या है कि बिटवीन द टू ईरान हैज़ अमर्ज एज अ बेटर ह्यूमन बीइंग एज एज अ बेटर जेंटलमैन, एज अ बेटर पॉलिटिशियन एज अ बेटर डिप्लोमेट. तो ईरान हैज़ स्कोर्ड ओवर ट्रंप दिस टाइम. 

सवाल: सर क्या यह सच है क्या अमेरिका ईरान के समझौते से ईरान को एक नई लाइफ लाइन मिल गई है?

जवाब: ऑफकोर्स वो तो उसकी तो बल्लेबले हो गई देखा जाए तो अब एक तो उसको जो है ना 28 लाख करोड़ का पैकेज देने की बात चल रही है पुनर्निर्माण के लिए. ठीक है? एक तो ये है. दूसरा $ अरब डॉलर उसको मिल सकते हैं. इस बात के लिए अगर अपने हथियार यूएनओ वाले को दिखा दे कि मैं गड़बड़ नहीं करूंगा. मैं बम नहीं बनाऊंगा यह नहीं करूंगा. परमाणु जो भी कुछ है उसको मिलने वाले हैं. तीसरा हार्वेज का जो टैक्स आएगा उसके लिए जबरदस्त है. अब टैक्स लगेगा चाहे ₹2 लगे चाहे ₹100 लगे लगेगा लेकिन वहां पे जो है और चौथा फिर क्या अब तेल का फ्री हो जाएगा मूवमेंट वो तेल जो डुबो रहा था समुद्र में के कारण से अब वापस बिकेगा तेल उसका बाजार में जो है तो ईरान तो हीरो हो गया फाइनेंसियली जो है. सो दिस इज़ राइट कि उनकी इकॉनमी में मेजर टर्निंग पॉइंट आने वाला है उनका. तो दिस वार इज़ गोइंग टू बी अ ब्लिस फॉर ईरान पर. 

सवाल: सर अमेरिका ने जो ईरान को पुनर्निर्माण के लिए जो 28 लाख करोड़ देने की बात की है तो इसका सच क्या है और क्या खाड़ी देश ट्रंप के दबाव में ये एक्स्ट्रा बर्डन उठाएंगे? 

जवाब: सच है कि ईरान मांग रहा है ट्रंप एज यूजुअल कोई पैसा नहीं देंगे हम कोई परमाणु हथियार नहीं बनाने दे हम कोई मतलब नहीं है आपको देना पड़ेगा 28 दोगे 24 दोगे 20 दोगे देना पड़ेगा नेगोशिएट करके आपको देने पड़ेंगे यह जो पैसे हैं दूसरा सवाल इसमें कि खर्चा कौन उठाएगा सवाल यह है क्या खाड़ी देश उठाएंगे? उनको तो यह दिखता है तेल पैदा हो रहा है. चलो इनके मत्थे डाल दो इसको. खाड़ी देश अब उस तरह से गुलाम नहीं है ट्रंप के जैसे पहले कभी हुआ करते थे. देख लिया उन्होंने. उन्होंने कहा ट्रंप से हमें नुकसान हुआ है. ट्रंप इज नो गारंटी ऑफ़ सेफ्टी. बल्कि ट्रंप इज़ अ सोर्स ऑफ लॉस जिसे कहना चाहिए. कितना हमला किया है ईरान ने. खाड़ी देशों में. कितना नुकसान हुआ है वहां पे जो है. तो दे आर लूजर. उनको समझ नहीं आ रहा कि अमेरिका से पीछा कैसे छुड़ाया अपना. ऐसे हालत के अंदर कोई चांस ही नहीं इस बात का कि खाड़ी देश इसको उठाएं लेकिन ट्रंप है फिर धमकाएगा तो कह नहीं सकते मान जाए खाड़ी देश कभी अपेरेंटली प्राइम मुझे उम्मीद नहीं दिखाई देती है देन यू नेवर नो. 

सवाल: सर इस बात की चर्चा है कि अमेरिका ईरान युद्ध में अमेरिका का सारा खर्चा ग्लोबल साउथ के देशों के द्वारा चुकाया जाएगा. क्या यह गरीब देश उठा पाएंगे इस भार को? और आखिर इस बारे में क्या सोच है ग्लोबल साउथ के नए मसीहा नरेंद्र मोदी की?

जवाब: नहीं मुश्किल है. नरेंद्र मोदी हीरो हो गए हैं ग्लोबल साउथ के पहले भी थे. अब उन्होंने लीडरशिप और एक्वायर कर ली यह स्टेटमेंट देके कि यह राष्ट्र नहीं उठा सकते हैं. खर्चा जो है बल्कि इन्हें तो फाइनेंसियल मदद की जरूरत है. अभी ऐसा कोई चांस नहीं लगता है कि ग्लोबल साउथ के जो राष्ट्र हैं वो इस खर्चे को उठा पाए. और फिर नरेंद्र मोदी इतना माहौल बना देंगे वर्ल्ड प्लेटफार्म से कि वो मुश्किल है. दैट वे जो है ग्लोबल साउथ इज़ लकी टू हैव नरेंद्र मोदी नाउ एज़ देयर इमर्जिंग लीडर. तो कोई चांस नहीं इस बात का कि ग्लोबल साउथ के देश इस पैसे को चुकाए. 

सवाल: सर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ के बगैर जो वेस्टर्न पावर्स हैं ग्लोबल साउथ की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते?

जवाब: फैक्ट नरेंद्र मोदी हैज़ एक्वायर्ड ए टिपिकल लीडरशिप रोल इन ग्लोबल कंट्रीज. और जो नॉन वेस्टर्न कंट्रीज हैं उनका वहां कोई ज्यादा डायलॉग नहीं है. उनके खिलाफ हैं सारे. तो नरेंद्र मोदी एक पुल का काम करते हैं. उसके अंदर एक ब्रिज का काम करते हैं. एक एक नेगोशिएटर कहिए, एक कोऑर्डिनेटर का काम वहां पे करते हैं. तो ये बात सच है और उन राष्ट्रों ने समझ लिया है कि ग्लोबल साउथ के जो चैलेंजेस हैं उन्होंने नरेंद्र मोदी का एक रोल है. इसलिए जी7 में देखा आपने परमानेंट मेंबर नहीं होने के बाद कैसे बुलाया और कैसे मान सम्मान उन्होंने जो किया तो निश्चित तौर पे जो उनके चैलेंजेस हैं ग्लोबल साउथ के उन राष्ट्रों के प्रति उन राष्ट्रों के लिए उनको सॉर्ट आउट कर नरेंद्र मोदी विल हैव ए रोल. 

सवाल: सर अमेरिका ईरान युद्ध में यह कैसा चमत्कार हुआ कि ग्राउंड फोर्स उतारी ही नहीं गई मैदान पर? 

जवाब: यह एक नया तरीका है युद्ध लड़ने का. ये आविष्कार हुआ इस बार. इसका दूर परिणाम पड़ेगा ग्राउंड फोर्सेस पे. मिलिट्री में भर्ती कम होगी. क्या होगा? इक्विपमेंट कम आएगा. इट इज टू बी सीन. एयरफोर्स विल कमांड. इट इज़ टू बी सीन. दैट इज़ लेकिन ये सच है. 110 युद्ध चला. सेनाएं नहीं हिली. कहीं से सारा जो है ना एयर स्ट्राइक से और आपके ड्रोन से. इससे सारा हुआ ये तो इट्स इमरजेंस ऑफ अ न्यू वार स्टाइल ये कहा जा सकता है. 

सवाल: सर आपको क्या लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रक्षित ट्रेड डील कब होगी?

जवाब: एनी टाइम खुद ट्रंप ने कहा वी आर वेरी नियर. हालांकि ट्रंप के कहने का कोई मतलब नहीं होता. फिर भी मैं फेस वैल्यू पे इस बात को लेता हूं जो है कि वी आर वेरी नियर वेरी क्लोज टू द डील और अब डील जो है ना किसी भी दिन हो सकती है. 23 24 तारीख को एक मीटिंग होने वाली है मिनिस्टर लेवल की वो हो जाएगी. तो उम्मीद की जानी चाहिए कि इस साल तो डील पक्का हो जाएगी. ऐसा लगता है. 

सवाल: सर आखिर कब तक इयू और ब्रिटेन के साथ में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन होंगे?

जवाब: वो भी इस साल होने की बात है. पीयूष गोयल उसमें लगे हुए हैं और वो तो बड़ा जबरदस्त काम होगा. पूरा यूरोप खुल जाएगा भारत के लिए. आप देखिए 93% एक्सपोर्ट जो है वो कस्टम फ्री हो जाएंगे. और जिसका ऑपरेशनल पार्ट है 2027 में फरवरी मार्च में वो भी हो जाएगा. तो पीयूष गोयल हैज़ डन अ रिमारकेबल जॉब इन दिस थिंग जो है ना अंडर द सुपर नरेंद्र मोदी जो है पीयूष गोयल इज नाउ नोन एज ए डील मैन इनोवेटेड डील उनका एक ब्रांड हो गया होने वाली है. 

सवाल: सर जी7 समिट में यूक्रेन के राष्ट्रपति जिलंस्की और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में आखिर क्या बात हुई है? 

जवाब: आप देखिए यूक्रेन के राष्ट्रपति तो हमेशा उम्मीद की निगाह से मोदी की तरफ देखते हैं कि कब ये पुतिन को समझाते हैं और कब कोई समझौता होता है इस तरह का तो एक सम्मान और आदर का भाव मोदी के प्रति उनके मन में रहता है. इस बार भी हुआ. तो नरेंद्र मोदी ने वही पुरानी बात कही वहां पे वार इज़ नॉट ए स्यूशन. स्यूशन विल ओनली कम थ्रू डायलॉग एंड डिप्लोमेसी और मैं तो शांति का समर्थक हूं. युद्ध का समर्थक नहीं हूं. तो ठीक है. एक तरह से आप कहिए कि यूक्रेन के आंसू पोंछने वाली बात थी और थोड़ा सद्भाव बनाने वाली बात थी. तो नरेंद्र मोदी ने किया. 

सवाल: सर इसी समिट के दौरान जी7 लीडर्स के सामने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से यह कहा गया कि वर्ल्ड सफर्स फ्रॉम शॉर्टेज ऑफ ट्रस्ट नीड टू रिबल ट्रस्ट इन इंटरनेशनल लॉ. आखिर आप क्या कहेंगे इसके बारे में?

जवाब: ये तो बहुत ही जबरदस्त ब्रिलियंट स्टेटमेंट था. बड़ा मैच्योर और ये स्टेटमेंट था लाइक ए स्टेट्समैन जो संसार के बड़े-बड़े नेता हुए हैं. वो ऐसा भाषण देते थे. ऐसे उद्गार व्यक्त करते थे. इसमें व्यक्ति स्वार से उठ के भारत के पॉइंट से उठ के एक ग्लोबल व्यक्ति की तरह ग्लोबल संसार को एक निगाह से देखना पूरे विश्व को और फिर जिम्मेदारी के साथ एक बात कहना कि जो भरोसा उठ गया है साधनों की कमी नहीं है. ट्रस्ट डेफिसिट है. ट्रस्ट की कमी है. इंटरनेशनल लॉ के प्रति सम्मान नहीं रहा क्योंकि ट्रस्ट नहीं रहा लोगों का जो है ये तो एक लार्जर उन्होंने बयान दिया है और जो उनकी मैच्योरिटी को और उनकी डिप्लोमेटिक सोच को दर्शाता है और साथ में उनकी पीड़ा भी झलकती है इसके अंदर कि क्यों नहीं मानते हो लोगों के प्रति सम्मान करो इंटरेस्ट लोगों के प्रति आदर करो उसके हिसाब से चलो तो इसमें क्या है उनकी अभिव्यक्ति भी है पीड़ा की जो है ये और जो पीड़ित राष्ट्र है उनके साथ उनकी सहानुभूति भी है इस बात में जो है और खुद का उनका एक बड़ा मैच्योर लाइक ए सीनियर स्टेट्समैन ये स्टेटमेंट. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये पहला दौरा था 20-21 जून को हां पश्चिम बंगाल की इस यात्रा में जिस अद्भुत तरीके से उनको रिस्पांस मिला सड़कों पर. इसको आप कैसे देखते हैं?

जवाब: भाई एक्चुअली देखो दो 2 ढाई लाख लोगों की भीड़ थी. लोग पागल हो रहे थे नरेंद्र मोदी झलक पाने के लिए. तो जिसे कहना चाहिए वर्चुअली कह सकते हैंक हैड गॉन मैड आफ्टर नरेंद्र मोदी जो है और ऐसा चमत्कार बिल्कुल जो होता है जिसे कहना चाहिए. और अब ये कहा जा सकता है नाउ नरेंद्र मोदी इज़ द फेस ऑफ़ वेस्ट बंगाल. यह सेफली कहा जा सकता है. पश्चिम बंगाल की विजय में अमित शाह का जबरदस्त रोल था नरेंद्र मोदी के नीचे. इसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन जो फेस और क्राउड पुलर और ये सब बातें आती हैं और लीडरशिप की बात आती है वहां पे. तो आज बंगाल का जो फेस है वो नरेंद्र मोदी बन चुके हैं. आप देखिए दो ढाई लाख लोगों का आना इस तरह से और पहली यात्रा थी उनकी तो बहुत जबरदस्त रिस्पांस था और आने वाले कल का संकेत है कि उत्तर भारत से ज्यादा लोकप्रियता आश्चर्य की बात है कल बंगाल में मोदी के प्रति दिखाई दी. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल विजय के बाद कोलकाता में भगवा लहराते हुए देख प्रधानमंत्री मोदी कितने भावुक हुए होंगे और क्या आपको लगता है कि अब उनके नेतृत्व में जो पश्चिम बंगाल के करोड़ों लोग हैं जिनका सपना है सोनार बांग्ला का क्या ये सपना सच हो पाएगा? 

जवाब: नरेंद्र मोदी गदगद हुए होंगे, भावुक हुए होंगे. जहां ठहरे खिड़की खोल के हुगली की तरफ देखा होगा. जहां एक बार फोटो खींचने चले गए थे. पहले जो है कोलकाता को अलग आंखों से निहारा होगा और सोचा होगा हमारा आखिरी सपना इस तरह का था. पॉलिटिकली पूरा हो गया. गुरु रविंद्र नाथ टैगोर का जो सपना था श्याम प्रसाद मुखर्जी का जो सपना था 1905 से 1911 के बीच जितनी संख्या में लोग शहीद हुए उनका त्याग संघर्ष बलिदान हुआ उनका सपना था वो सपना आज नरेंद्र मोदी अमित शाह के हाथों पूरा हुआ दैट वेज है तो बहुत भावुक और इमोशनल दैट इज है उनका होना स्वाभाविक है रही बात सोनार बंगला की तो मन में यह भी ख्याल आया होगा कि उस समय गुरु रविंद्र नाथ टैगोर ने लिखा था आमार सोनार बंगला आज उसको पूरा करने का वक्त वक्त आ गया है. जनता ने भरोसा जताया मुझ में. अब मुझे डिलीवर करना है. इसलिए आने वाले समय में आप देखना बंगाल जो है एक रियल जिसे कहना चाहिए सोनार बंगला की तरह आपको दिखाई देगा. जो प्लान चल रहे हैंक में जो डिस्कशन हो रहे हैं जो इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट वहां जा रहा है वो अद्भुत है और सब कुछ अगर ठीक रहा तो वी विल अब्सोलुटली फाइंड इन न्यू सोनार बंग इन बंगाल कटसी नरेंद्र मोदी एंड टू सम एक्सटेंट आल्सो अमित शाह और अब क्योंकि वो लड़ाई नरेंद्र मोदी जीत चुके हैं तो सेकंड पार्ट अब जो है गवर्नेंस का पार्ट है और गवर्नेंस में नरेंद्र मोदी का रोल है दैट वे जो है और ऐसी आशा की जानी चाहिए कि अगले दो चार साल में बल्कि 5 साल पूरे होते-होते से यू विल फाइंड ए डिफरेंट बंगाल ऐसा लगता है. 

सवाल: सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा वेस्ट बंगाल टर्निंग पेज आफ्टर डेकेड्स ऑफ मिस रूल कुछ कहना चाहेंगे आप? 

जवाब: सही है वो तो उन्होंने कहा है कि भाई जिन लोगों ने लूटा बंगाल को उनको हम जेल भेजेंगे और ये तो एक धारणा आम हो ही गई थी ना मिस गवर्नेंस थी जिस तरह से टीएमसी के लोगों को जनता ने मारा जनता ने पकड़ा उनका घेराव किया उनसे वो सब कुछ हुआ वो जनता की आक्रोश की अभिव्यक्ति थी तो उनका यह कहना था कि मिस रूल था अब हम अच्छा रूल देंगे और चांस की बात यह है कि सबसे अच्छा काम नरेंद्र मोदी अमित शाह के हाथों हुआ वो यह हुआ सुधेंदु अधिकारी उनको उन्होंने चीफ मिनिस्टर बना दिया. ये एक माइलस्टोन डिसीजन था. बहुत विनरी डिसीजन था. यहां अगर गलती से कोई नया आदमी बैठ जाता तो बंगाल का एजेंडा लागू करने में मजा नहीं आता. इनको मजा नहीं आता यहां पे. वो ट्रेंड आदमी है. घर का आदमी है. अंदर का आदमी सब जानता है और कॉम्पिटेंट दिखता है वो. और कितने कम समय में उसने जितने बकाया काम थे बड़े-बड़े जो दीदी के मिस रूल कहते हैं उसको रिवर्स करने थे. सारे काम किए उसने. एंड ही है इज़ अ फुल सपोर्ट ऑफ़ अमित शाह एंड होम मिनिस्ट्री. एंड ओवरऑल नरेंद्र मोदी ब्लेसिंग्स. 

आप देखते हैं दैट वे जो है इस हिसाब से चलते-चलते कहा जाए तो बहुत कुछ बंगाल में होने वाला है. बिल्कुल जैसे कहना चाहिए मिस रूल की बात थी. एक गुड गवर्नेंस में कन्वर्ट होने वाला है. और ये तो मैं समझता हूं कि अभी भी वो जो वसूलियां थी तरह-तरह की वो सब बंद हो गई होंगी वहां पे. सड़कों पे महिलाओं का छेड़ना खैर पहले भी ज्यादा नहीं था. इक्कादुक्का घटनाएं हो जाती थी. डॉक्टर की हो गई और हो गई. अलग बात है. वुमेन सेफ्टी वाज़ नॉट दैट इशू. लेकिन ये लूटपाट कहो या वसूली ये एक इशू ज्यादा था वहां पे. तो सब वो चीफ मिनिस्टर ठीक कर रहे हैं. तो सर्टेनली ये मिस रूल जो है नरेंद्र मोदी का दावा है कि मैं इसको गुड गवर्नेंस में चेंज कर दूंगा. तो कर देंगे और प्रोसेस उन्होंने ऑलरेडी चीफ मिनिस्टर के थ्रू शुरू करवा दिया है. 

सवाल: सर आज विश्व भर में योगा क्रांति लाने वाले प्रधानमंत्री मोदी के इस योगदान को आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: अद्भुत योगदान भारत का जो पुरातन का कहिए सनातन का कहिए इतिहास का कहिए जो परंपरा थी लाइफ स्टाइल था आज सारे संसार के देशों की लाइफ स्टाइल बन गया है अभिरेंद्र मोदी ने कहा ना कि अब आप 70 साल के हो गए 50 साल जैसा रह सकते हो व्यवहार कर सकते हो अगर आप योगा करते हो दैट आप शांत रहते हो चित रहते हो सारी बातें हैं लेकिन इस सारे प्रोसेस में योगा तो पॉपुलर हुआ सो हुआ 190 देशों में कटसी मेन नरेंद्र मोदी शुरू में बाबा रामदेव का रोल लेकिन अब वो उन्होंने तो एक धारणा दे दी बढ़ा दिया आगे अब नरेंद्र मोदी ने उस चीज को आसमान में ले गए दैट वे लेकिन इसका दूसरा पहलू बड़ा दिलचस्प है कि नरेंद्र मोदी का जिसे कहना चाहिए भाई डिसिप्लिन कहो कुछ लोग इसको एलिमेंट ऑफ फियर भी कहते हैं कुछ भी मान लो कि पूरी पार्टी में मतलब एक कार्यकर्ता से लेकर जिसे कहना चाहिए राजनाथ सिंह तक सब जो है ना एक ही भाषा में थे एक ही स्वर में थे एक ही उस अंदाज में थे योगा करने के तो मैं नहीं समझता 140 करोड़ लोगों के देश में कोई एक ऐसा व्यक्ति आज तक हुआ हो या मोदी के बाद 10 साल बाद भी कभी ऐसा होगा मुझे नहीं लगता जिसके एक इशारे पे पूरी पार्टी एक ही संकेत में योगा करने लग जाए झुक रहे हैं ऊपर हो रहे हैं नीचे हो रहे हैं सब कर रहे हैं अद्भुत ये जो डिसिप्लिन का चेहरा सामने आया है नरेंद्र मोदी का जो प्रभाव है जो मोरल इन्फ्लुएंस है मोरल सपोर्ट है कहिए या जो है जो इनका नैतिक प्रभाव है मान लीजिए ठीक है उसके कारण से ये जो अद्भुत था कल दृश्य देखने वाला. मुख्यमंत्री से लेकर के मंत्री तक, एमएलए से लेकर कार्यकर्ता तक वहां भी थे. सारे के सारे टॉप से नीचे तक सारे लोग एक ही वेशभूषा में एक ही स्वर में नरेंद्र मोदी का योगा कर रहे थे. ये एक और उपलब्धि है नरेंद्र मोदी के. 

सवाल: सर तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन टूट चुका है. लेकिन उसके बावजूद भी स्टालिन की तरफ से राहुल गांधी को हैप्पी बर्थडे विश किया गया. क्या इसके पीछे कोई पॉलिटिकल रेलेवेंस है?

जवाब: नो. प्लीज डोंट रीड बियों्ड ए पॉइंट जिसे कहते हैं इस नोमल कटसी स्टाइलि नोमल कटसी में फोन किया है. इसका कत अर्थ नहीं है कि वो कोई अपना गठबंधन रिवाइव करने वाले हैं. कांग्रेस से सोचने वाले हैं. अब हैप्पी बर्थडे तो नरेंद्र मोदी ने भी कहा, प्राइम मिनिस्टर ने भी कहा राहुल गांधी को. तो इट इज़ जस्ट अ शेयर जिसे कहना चाहिए कटसी एंड नथिंग मच शुड बी रीड बिटवीन द लाइंस. 

सवाल: सर उस दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने अपने विरोधियों के प्रति जिस तरह की गाली गलौज की भाषा का प्रयोग किया उसके बाद एकनाथ शिंद ने जो पलटवार किया इसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: अनफॉर्चूनेट एलाइज आप हो सकते हैं पॉलिटिकली पार्टी कंपल्शन है कि ठीक है आपका सपोर्ट थी साथ है यह बट यू हैव टू आल्सो बिहेव इस घटना से ये चीज सामने आई कि आज नहीं तो कल ओवरऑल जो एक राष्ट्र का जो सम्मान होता है राष्ट्र की भाषा होती है राष्ट्र का अनुशासन होता है वो हर आदमी को मेंटेन करना पड़ेगा चाहे वो शिंद हो चाहे संजय राउत हो एक्स वाई जेड कोई भी हो तो अल्टीमेटली आई थिंक इट रिक्वायर द इंटरवेंशन ऑफ़ द प्राइम मिनिस्टर एट द पॉलिटिकल लेवल इन द कमिंग डज़. 

सवाल: सर मैंने सुना है उद्धव शिवसेना के जो सांसद हैं बगावत की शिंद का हाथ थाम लिया और बड़े नाटकी ढंग से दिल्ली पहुंचते हैं. आपको इस बारे में कोई है जानकारी?

जवाब: ये सुना था मैंने तीन चार्टर प्लेन हुए थे अलग-अलग शहरों से. अलग-अलग आए वहां पे एक को मकराना भी दिख गया. लोगों ने कहा अभी क्यों आए हो? तो बोले आर के मार्बल के मेहमान हैं. एक आर के मार्बल बहुत बड़ी कंपनी है. वेरी डिसेंट बिजनेसमैन जो है तो उसका मार्बल लेने आए हैं. वहां पे ही हैज़ नो पॉलिटिकल लिंक्स लेकिन वो बोले कि उसके आए हैं मार्बल लेने के लिए. वहां छिप गया कोई वहां चला गया. तो वो तो देखो जो ऑपरेशन होता है ना वो अद्भुत होता है. फ्लोलेस होता है. एग्जैक्ट उसी टाइम पे सब लोग यहां पे उतरे. उतरे तो यहां उनको जिनको थामना था. थाम लिया लोगों ने अपनी गाड़ी में बैठा के ले गए उनको. दिस इज वेरी इंटरेस्टिंग.

सवाल: सर मौजूदा टीएमसी और उद्धव ठाकरे वाले जो सांसदों का दलबदल हो रहा है उस परिपेक्ष में ओम बिरला का जो रोल है वो बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है तो आपको कैसा लगता है कि अभी संसद सत्र शुरू होने वाला है कैसे निपटाएंगे? 

जवाब: इस पूरे विवाद को ओम बिरला ओम बिरला का तो एक ही मंत्र है बस मुस्कुराते रहो और सबकी सुनते रहो जिसे कहना चाहिए उनकी स्माइल है ना स्थाई हो गई है कुछ ऐसा लगता है फ्रेम स्माइल एक तरह से हो गई. हालांकि फ्रेम नहीं है तो जीवित व्यक्ति है, जीवंत व्यक्ति है, ट्रांसपेरेंट है, वाइब्रेंट है. लेकिन वो बैठते हैं जिस ढंग से उनकी दाद देनी पड़ती है कि 8आ घंटे 10-10 घंटे केवल एक स्माइल के साथ ही बैठे रहते हैं उसके अंदर. उसमें कई बार तो जो बड़े-बड़े लोग होते हैं, हाउस के अंदर प्राइम मिनिस्टर होते हैं, अमित शाह होते हैं तो स्माइल मोर और लेस एक तरह से होती है. स्माइल वहां पे जो है उसमें रहते हैं. वो इसको स्माइल से ही निपटा देंगे. इस झगड़े को जो है और सबसे बड़ी बात उन्होंने क्या की इस बार उन्होंने कहा दोनों पक्षों को सुनूंगा मैं उसके बाद करूंगा ये. तो लोकतांत्रिक चेहरा अपना लेकर सामने आए कि मैं शिवसेना के दोनों को सुनूंगा. उसके टीएमसी के दोनों को सुनूंगा. फिर कोई फैसला करूंगा. दैट वे जो है तो मौके पे ऐसा एकदम से नहीं कहा कि नहीं नहीं यू गो तो ट्रांसपेरेंसी दिखती है. डेमोक्रेटिक एप्रोच दिखती है. और ये दोनों पार्टियों के लोग आए मिले ऐसे ही जैसे निपटा दिया उनको चाय पी के चले गए अपनी बात कह कर के बिना किसी कंट्रोवर्सी के. ऐसे पार्लियामेंट में भी एक मुस्कान के साथ निपटा देंगे उनको. ऐसा लगता है. 

सवाल: सर तो फिर जो दलबदल हुआ टीएमसी के अंदर 20 सांसद इन सबके बाद पूरे घटनाक्रम के बाद आप तो ममता बनर्जी के भविष्य को कैसे देखते हैं?

जवाब: देखो शी इज़ ए वारियर. उसकी शक्ल देखोगे तो बहुत तरस आता है लोगों को. एक तो कितनी वीक हो गई हैं. चल नहीं पा रही हैं. प्लस अपनों ने इतने वार किए. बीजेपी से हार गई उतना अफसोस उनको उसका नहीं होगा. जितना अपने लोगों ने वार किए या जो डिफेक्शन हुआ वहां पे और जो निकट से निकट लोग थे वो भी छोड़ के चले गए. तो सल में से बाहर नहीं निकल पाई. अभी तो मुझे ऐसा लगता है ना जाने क्यों एक सहानुभूति का भी एक कहना चाहिए फैक्टर थोड़ा बहुत जो है ना उसके प्रति एक डेवलप हुआ हालांकि उस सहानुभूति का भी कोई अर्थ नहीं है क्योंकि उसके सहानुभूति एक्सप्रेशन की कोई अपॉर्चुनिटी नहीं है. चुनाव तो 5 साल बाद आएंगे. तो उसका पिछले दिनों आई थी यहां पे तो किसी ने राय दी के कांग्रेस में जॉइ करना आत्महत्या है. कैसे 10 दिन में लड़ लोगी फिर बाहर आ जाओगी. 

कभी राहुल से लड़ लोगी फिर एक दिन सोनिया गांधी से लड़ लोगी जाके अपना अस्तित्व खो दोगी. तो चाहे दो एमएलए ही सही कोलकाता की सड़कों पर घूमो तो सही एक मौका तो मिलता है अब अलग बात है किसी ना किसी केस में हो सकता है अंदर हो जाए केसेस चलते हैं तो कानून अपना काम करता है वो तो एक अलग बात है लेकिन अंदर भी क्या होता है दो चार छ महीने में फिर बेल हो जाती है आदमी आ जाता है दैट इज तो ममता बनर्जी स्टिल जिसे कहना चाहिए डाउन है सो है बट शी इज़ नॉट स्टिल ओवर जैसे और खतरा कोई नहीं है किसी का ममता की पार्टी का या उसका जो है लेकिन एज एन इंडिविजुअल भी जो है वो चलती रहेंग 100-50 लोगों की भीड़ उनके पास पास धीरे-धीरे वापस इमर्ज इकट्ठी होती रहेंग. ऐसा मुझे लगता है कि एक मतलब होते हैं जिसके प्रति सहानुभूति लोग मन में आती है यार इसका हुआ तो बहुत सही. लोग ये तो कहते हैं ना यार कि बहुत गुंडागर्दी थी इनके टाइम में बहुत अच्छा हुआ. या फिर ये भी कहते हैं यार चलो बेचारी महिला है. उसको सजा मिल गई है. ठीक है अब चलने दो. तब आने वाले दिन जो है ना ममता बनर्जी के लिए चाहे पांच लोग ही आए वहां पे तो थोड़ा सा सहानुभूति के दिन होंगे तो वो सर्वाइव कर जाएगी. 

पॉलिटिकल लीडर की लाइफ में अगर 10 लोग उससे मिलने नहीं आए रोज को तो मर जाता है वैसे ही जो है तो ममता के साथ यह है कि 5-10 लोग आज नहीं तो 10 दिन बाद 20 दिन में आने लग जाएंगे तो शी विल सर्वाइव एंड शी विल हैव हर ओन वे दैट विल हैव बाकी सत्ता में आने का कोई इशू नहीं है उसके कहीं से चुनाव लड़ने का कोई प्रश्न नहीं है चुनाव जीतने का प्रश्न नहीं है अभी तो कोई ऐसा लगता नहीं है तो उसको तो आइसोलेशन भी अपने हिसाब से ही जैसे एज एन इंडिविजुअल कभी-कभी ऐसा आदमी जब बड़ा आदमी रिटायर हो जाता है ऐसा हो जाता है तो आदमी अकेलेपन को भी एंजॉय करने लगता है तो लेट लेट्स सी ममता क्या है लेकिन मेजर कोई मू चले वो ऐसा या किसी पार्टी में छोड़े नई पार्टी बनाए कुछ और करें ऐसा कुछ नहीं होने वाला है थ्रेट एक्चुअल में उसको बस एक सहानुभूति की थ्रेट रहेगी अभिषेक बनर्जी के जो केसेस चल रहे हैं तो हिज अरेस्ट इज़ नॉट रूल्ड आउट दैट कानून अपना काम करता है तो एक मानसिक पीड़ा रहेंग वो अगर जेल चला गया तो फिर जेल में आदमी खाना देने जाता है कभी घर वाले भी चले जाते हैं तो वो उनके लिए एक और पीड़ा का क्षण जीवन में हो सकता है आए आगे जाकर के जो है और बाक़ी तो ठीक है. ममता का भविष्य आपने कहा तो अभी आज ऐसा भविष्य उनका एक व्यक्ति की तरह है. एक लोनर जिसे कहते हैं आइसोलेटेड एक अकेले व्यक्ति की तरह हैं. एंड दिस इज़ ऑल. 

सवाल: सर टीएमसी और शिवसेना का जो रीसेंट डेवलपमेंट हुआ उसे देखकर आपको ऐसा नहीं लगता है कि भारत में पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी सिस्टम फेल हो चुका है और क्या अमेरिका की तरह भारत में भी प्रेसिडेंशियल सिस्टम की जरूरत है? दूसरा सवाल यह है कि सर उद्धव गुटके जो बाकी के सांसद हैं उनका यह कहना कितना सत्य है कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने जा रहे हैं. 

जवाब: सेकंड पार्ट तो अब्सोलुटली फाल्स. कोई कांग्रेस में नहीं जा रहा था. कोई कांग्रेस ले नहीं रही थी. कोई मुद्दा नहीं था. कोई बात नहीं थी. विले की आवश्यकता कहां थी? आपका खुद का नाम जैसा भी नाम था बहुत था. बंबई में सड़क पे चलने के लिए. दैट वेल जो है. अब पहला सवाल आपका वो बड़ा गंभीर है कि ये जो घटनाएं हुई हैं टीएमसी के हिस्से बड़े पैमाने पे दल बदल हुआ. बड़े पैमाने पे चले गए. मतदाता अपने को ठगाव सा महसूस कर रहा है. कहीं कोलकाता में, मुंबई में, कभी जो है तो एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये पार्लियामेंट्री सिस्टम था जिसके तहत ये सब चुनाव होते हैं, व्यक्ति बनता है, सरकार बनती है. क्या ये सिस्टम फेल हो गया है? क्या? इसके दो पहलू हैं. एक तो यह कि फेल नहीं हुआ है तो नरेंद्र मोदी प्राइम मिनिस्टर हैं. स्थाई गवर्नमेंट दे रहे हैं. इसी सिस्टम की उपज है वो और सिस्टम चल रहा है. दूसरा इशू ये कि ये जो घटनाक्रम चला है सारा इसने क्वेश्चन मार्क खड़ा कर दिया है कि क्या ये सिस्टम फेल हो गया तो प्रेजेंशियल सिस्टम लाएं क्या? आप प्रेजेंट सिस्टम भी ले आइए. 

मैं तो उसके समर्थन में रहता हूं हमेशा. लेकिन मूल बात यह है जिस पे कोई मानेगा नहीं और पॉलिटिकल पार्टी मानेगी भी कैसे? आवश्यकता तो इस बात की केवल यह है कि अब नरेंद्र मोदी को 10 साल के लिए सत्ता सौंप दो. बस मान जाओ. बहुत कर लिया तुमने. बहुत लड़ लिए. बहुत कुछ कर लिया. कुछ नहीं कर पाए. आपके लोग ही आपको धोखा देकर कार में भरभर कर वहां पे चले गए जाकर के. तुम्हारा कोई कंट्रोल नहीं है. काहे का चुनाव और काहे के लीडर और काहे के विरोधी दल के नेता ये क्या है? मतलब इस तरह से वास्तविकता तो देखो यह है. अब ऐसा होता नहीं वह अलग बात है. वह चुनाव जीत के अगले 10 साल प्राइम मिनिस्टर बनते रहेंगे करते रहेंगे. वह एक अलग है. लेकिन जो इस समय राष्ट्र के नाते रूलिंग पार्टी का कर्तव्य देखने का है यह कि पॉलिटिकल सिस्टम हमारा ठीक से काम करें. और जो घटनाएं हुई हैं उन्होंने पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी के सामने गंभीर चुनौती खड़ी की. इसमें तो कोई संदेह नहीं है. फेल हुई कि नहीं हुई? दो पार्ट मैंने कहा नरेंद्र मोदी वाला पार्ट सक्सेसफुल है. यह पार्ट फेल है. 

अब आवश्यकता इस बात की है कि अब राहुल गांधी कैसे माने और और पॉलिटिकली माने भी कैसे और क्यों माने दैट वे कि नरेंद्र मोदी 10 साल प्राइम मिनिस्टर बन जाओ. हालात तो देश के ऐसे हैं भाई कि सब छोड़ के अपना टाइम वेस्ट मत करो. एक मान लो बात एक आदमी को सत्ता मिली हुई सौंप दो. कोई छोटे-मोटे चेंजेस करने हैं कर लो और 10 साल तक एक एजेंडा बना लो डेवलपमेंट कंट्री का और सारे मिलके उसे सपोर्ट करो और या फिर इतना समर्थन लाओ कि सरकार को बदल दो. ठीक है? उसके कोई चांस नहीं दिखाई देते हैं. तो कुल मिला के यह आपका कहना सही है कि पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी के लिए घटनाएं गंभीर चुनौती हैं. अब लेट्स सी इसका जो उत्तर है वो समय के घर में है. तो लेट्स सी व्हाट फाइनली कम्स आउट. 

समापन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विदेश दौरा समाप्त हुआ और इसके साथ ही कूटनीति की जय जयकार हुई. देश की जय जयकार हुई और कहते हैं कि कूटनीति में तस्वीरों के बड़े मायने होते हैं. कूटनीति की तस्वीरों में यह तो साफ है कि आज की तारीख में भारत को नजरअंदाज करना नामुमकिन सा हो चला है और जो जेंजी की भाषा में कहते हैं कि एक ही तो दिल है मोदी जी कितनी बार जीतोगे. तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं ही दिल भी जीतते रहेंगे, दोस्ती भी निभाते रहेंगे, डील भी लॉक करते रहेंगे और प्रधानमंत्री मोदी के दिल जीतने के साथ-साथ यह देश भी यूं ही जीतता रहेगा. बहुत-बहुत शुक्रिया सर आपका द जेसी शो में आज के इस एनालिसिस के लिए और साथ ही तमाम दर्शकों का भी बहुत-बहुत धन्यवाद हमारे साथ द जेसी शो का हिस्सा बनने के लिए. वक्त एक छोटे से ब्रेक का. आप बने रहिए भारत 24 के साथ.

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