The JC Show: A LEADER'S JOURNEY A NATION'S TRANSFORMATION FROM GUJARAT TO THE HEART OF INDIA

The JC Show: देश और दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और बदलते वैश्विक हालात पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से बातचीत की. इस दौरान आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उप्लब्धियों से लेकर देश के विकास तक, हर मुद्दे पर खुलकर बात किया. इस शो का नाम है- 'The JC Show: A LEADER'S JOURNEY A NATION'S TRANSFORMATION FROM GUJARAT TO THE HEART OF INDIA'

Bharat 24

The JC Show: देश और दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और बदलते वैश्विक हालात पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से बातचीत की. इस दौरान आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उप्लब्धियों से लेकर देश के विकास तक, हर मुद्दे पर खुलकर बात किया. इस शो का नाम है- 'The JC Show: A LEADER'S JOURNEY A NATION'S TRANSFORMATION FROM GUJARAT TO THE HEART OF INDIA'

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के जो सबसे अधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का जो रिकॉर्ड था 62 साल पुराना उसको उन्होंने तोड़ दिया है. तो एक आम नागरिक के नाते आप कैसा महसूस करते हैं?

जवाब: भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जिस पृष्ठभूमि से आते हैं उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक इतनी बड़ी प्रेरणा दी है के लोकतंत्र में परिश्रम ईमानदारी और समर्पण के द्वारा आदमी किसी भी बुलंदी पे पहुंच सकता है. जवाहरलाल नेहरू जी का जो अतीत था वह एक ऐसी फैमिली परिवार से था कि उनको बहुत कुछ चीजें विरासत में मिली. वो बहुत संपन्न परिवार में पैदा हुए. उसके बाद महात्मा गांधी जी का उनको बहुत बड़ा सहयोग मिलता रहा. लेकिन नरेंद्र मोदी जी जो संघर्ष और तपस्या का जीवन पूरा परिवार जीता था और ऐसी परिस्थितियों से बाहर निकल के आज के लोकतंत्र में हम जैसे चुनाव में जातपात के व्यवहार को देखते हैं. उस दृष्टि से मैं अनुभव करता हूं कि उनकी जो तथाकथित जाति बोलते हैं उनका बहुत छोटा सा समुदाय है. लेकिन एक व्यक्ति अपनी कर्मठता से 140 करोड़ लोगों के दिलों में राज करने की स्थिति पैदा करता है. इसके पीछे केवल और केवल उनका चिंतन और उनके हृदय की विशालता और उनका जीवन पूर्ण रूप से लोक हित और मानवता के कल्याण के लिए मानव पैदा हुए हैं. उसी का परिणाम है कि आज वो जनजन के नेता बन गए. 

सवाल: एक आम आदमी के साथ-साथ आप एक ऐसे राज्य के गवर्नर हैं जहां से नरेंद्र मोदी आते हैं जहां वे लगभग 13 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे तो गवर्नर के संवैधानिक पद पर रहते हुए आप उनके कार्यकाल को मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री के रूप में कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं गुजरात में गांव में खूब जाता हूं. लोगों के बीच में रहता हूं और लोगों से मैं उनके कार्यों के किस्से सुनता हूं. तो लोग इतना प्रेम मोदी जी से करते हैं. कितने लोग मुझे बताते हैं कि हमारे गांव में पानी की ऐसी स्थिति थी कि घर की दो महिलाएं सिर पर घड़ा रख के घर से भेज देते थे. जाओ पीने का पानी जुटा के लाओ. पूरा दिन भर पूरे घर के लोगों का पानी से पेट भर पाएं. यह स्थिति हमारी थी. आज नल से जल, किसानों के लिए ड्रिप सिस्टम, सिंचाई योजनाएं, नहरों का जाल, गांव-गांव में सड़कें, कोई गांव ऐसा नहीं जिसमें बिजली की सुविधा ना हो.

मैं गांव में देखता हूं उसकी समृद्धि के पीछे केवल मात्र नरेंद्र मोदी जी. लोग मेरे को कहते हैं कि यदि साहब ना होते तो शायद हम पलायन कर गए होते. गुजराती दुनिया के लगभग 170 देशों में है. उसके पीछे बहुत बड़ा कारण यह रहा कि एक समय था कि गांव में जीवन जीना असंभव हो गया था. अकाल पड़ते थे. सुविधाएं थी नहीं. लोग मजबूरी में घरों से निकले और वह दुनिया में फैले. लेकिन आज गुजरात के विकास का जो मॉडल बना है उसके पीछे पूरे प्रदेश के लोग बिल्कुल प्रसन्नता के साथ कहते हैं बड़े साहब की कृपा है कि जो आज गुजरात इस रूप में विकसित हुआ. 

सवाल: नरेंद्र मोदी 12 वर्षीय प्रधानमंत्री हैं और आप 11 वर्ष राज्यपाल हैं. 

जवाब: ये सब मैं समझता हूं कि ईश्वर कृपा है और राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी, शीर्षस्थ नेतृत्व का मैं आभारी हूं कि जिन्होंने इतना बड़ा प्लेटफार्म मुझे भी काम करने के लिए दिया और मैं ईमानदारी से उनकी भावना की कदर करते हुए कोई कसर नहीं छोड़ता और मैं कभी यह नहीं सोचता कि मैं लोक भवन में बैठ के आनंद लूं. हूं. मेरा ज्यादा समय लोगों के बीच में गुजरता है और मेरे को उसके लिए सुख मिलता है. जो काम मैं करता हूं उससे लोगों का भी लाभ होता है और मुझे भी आत्मिक सुख मिलता है. 

सवाल: पहली बार कब मुलाकात हुई नरेंद्र मोदी से और कब मिलना हुआ उनसे और जो है बिना किसी पॉलिटिकल बैकग्राउंड के सरकार ने आपको 2015 में हिमाचल का गवर्नर नियुक्त किया. 

जवाब:  मेरी कभी कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं थी. मैं गुरुकुल में प्रधानाचार्य था. कुरुक्षेत्र में वहां रहते हुए मैं शिक्षा जगत में काम करता था. समय बचता तो गांव में जाकर के किसानों के लिए और आने वाली पीढ़ियों में व्यसन मुक्ति का रास्ता वृक्षारोपण और यह खेतीबाड़ी प्राकृतिक हो. इस दिशा में मेरा भाव रहता था. लेकिन मैं स्वयं आश्चर्य में हूं. मैं कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिला नहीं. मैंने साक्षात उनके कभी दर्शन किए नहीं. एकदम उन लोगों ने कैसे मुझे चुना मैं आज तक नहीं सोच पाया. लेकिन इससे मैं एक अनुभव करता हूं.

जब मैं इस रूप में आया अन्य लोगों को भी देखा. पद्मश्री जैसे पुरस्कार और कुछ केंद्र में ऐसे मंत्री लोग कि जिनकी राजनीतिक कोई बैकग्राउंड जिनका नहीं था लेकिन प्रधानमंत्री जी मोदी जी केवल राष्ट्र प्रथम और कोई आदमी ईमानदारी मेहनत और राष्ट्र के लिए समर्पित होकर काम करता है और उनकी जानकारी में होता है तो वह केवल राष्ट्रहित के भाव से उन लोगों का लाभ लेते हैं. और अनुभव में आया कि जो पद्मश्री पुरस्कार इस समय देश में दिए जा रहे हैं जिनके पैरों में पहनने को जूता भी नहीं. लेकिन जिन लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से काम किया. वर्तमान सरकार उनको चुन चुन के सम्मान देती है. यह भाव पहले कभी देश में देखने को नहीं मिला. 

सवाल: दिल्ली और अहमदाबाद में राजनीतिक प्रेक्षक इस बात से हैरान हैं कि नरेंद्र मोदी चाहे मुख्यमंत्री हो चाहे प्रधानमंत्री रहे एंटीएस्ट फैक्टर उनके जीवन में आता ही नहीं है. एंटी इनकंबेंसी आती नहीं है. यह कैसा चमत्कार है?

जवाब: ये मैं भी अनुभव करता हूं. वो देखिए ना 12 साल पूरे कर चुके हैं. केवल प्रधानमंत्री जी के रूप में और इतना बड़ा कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में. प्रधानमंत्री जी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है और उसके पीछे जो मैंने अनुभव किया राष्ट्र प्रथम प्रत्येक भारत का नागरिक उनके परिवार का हिस्सा और वह सभी लोगों का हित कल्याण के लिए ही सोचते हैं और उनमें जो भाव है भाव ही नहीं कर्म योग इतना परिश्रमी व्यक्ति थी. आजाद भारत तो क्या बहुत लंबे काल के बाद ही देश को मिले हैं.

जिन्होंने अपने इतने लंबे राजनीतिक कार्यकाल में एक भी छुट्टी नहीं ली. और भगवान की कृपा उनका जीवन इतना पवित्र साफ सुथरा कि वह निरोग स्वस्थ हैं. वह चलते फिरते भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक प्रेरणा है और अपने इस कार्यकाल में चाहे वो गुजरात में रहे या भारत में रहे. उन्होंने लोगों के जीवन में बहुत सरलता ला दी. देश को विकास के सोपान पर आगे बढ़ा दिया है. यह युवा पीढ़ी भी देखती है, किसान भी देखता है, महिलाएं भी देखती हैं और बालक भी देखते हैं. आज इन 10 साल में भारत 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर ले आया. जिधर हम बाहर निकलते हैं रेलवे का नेटवर्क, रोड का नेटवर्क, एयरपोर्ट का नेटवर्क, इंडस्ट्रीज का अभियान और लोगों के जीवन में इतनी योजनाएं लाए हैं कि उनको गिनना भी मुश्किल हो जाता है. 

सवाल: अहमदाबाद और पूरे गुजरात में उनके पास एक मकान भी नहीं है. आप सात साल से गवर्नर हैं. वो अहमदाबाद यात्रा पे आते हैं तो लोग भवन में आपके यहां एक छोटे से कमरे में रहते हैं. बिल्कुल ऐसे ही उस दौरान उनकी दिनचर्या क्या रहती है? किस तरह से वो और क्या वो प्राकृतिक चिकित्सा और खेती के बारे में आपसे फीडबैक भी लेते हैं?

जवाब: इतना त्याग और तपस्या जिस व्यक्ति का अपने लिए संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं है. सारे लोगों की उन्नति ही उनकी उन्नति है. ऐसा भाव रखते हैं. आते हैं इतनी सरलता से और हम कई बार अनुभव करते हैं. आप भी करते हैं. आप तो मीडिया से जुड़े हुए शीर्षस्थ व्यक्ति हैं. वह विदेश में भी जाते हैं ना तो एक ही लाइन में पूरे अनेक देशों को सबसे मिलके आ जाते हैं. बार-बार जाने से भी वह राष्ट्र का खर्चा ना हो. समय बचे अपने देश को ज्यादा से ज्यादा समय मिले. इतनी बारीकियों पर वह जाते हैं. मैं देखता हूं राजभवन जो लोक भवन गुजरात है वह बड़ा छोटा है और उसका रूम जिसमें वो रुकते हैं इतना सामान्य है कि उससे सामान्य हो नहीं सकता. लेकिन मैंने कभी भी उनको किसी फाइव स्टार सेवन स्टार की कल्पना भी नहीं करते देखा. वहां रुकते हैं और वहां पर भी उनकी एक के बाद एक मीटिंग एक के बाद एक मीटिंग दिन भर वो जनसभाओं को संबोधित करते हैं. कार्यक्रम करते हैं. आने के बाद 11 12 बजे तक उनकी एक के बाद मीटिंग दूसरी मीटिंग तीसरी मीटिंग ऐसे चलती है. एक-ए मिनट का इतना सदुपयोग राष्ट्र के लिए कल्पना से बाहर है. 

सवाल: अहमदाबाद टूर के दौरान क्या उनके परिवार के लोग या क्लोज फ्रेंड्स या क्लोज रिलेटिव्स कोई मिलने आते हैं?

जवाब: उनका मैंने ऐसा कभी देखा नहीं जो आएगा वो किसी बड़ा राष्ट्र मिशन होगा तो आएगा वो वैसे कोई समय व्यर्थ नहीं जाने देते और घर परिवार तो उनका सारा ही देश है मैंने अलग से कोई आए किसी चीज की कोई गप बाजी हो ऐसा तो कभी सोचा ही नहीं. वहां मीटिंग्स होती हैं. लेकिन वह अलग-अलग विषयों पर चलती हैं. तो उस ढंग से मैंने कभी उनको नहीं देखा कि कोई व्यर्थ में आया है और समय व्यर्थ चल रहा. ऐसा कभी होता नहीं. 

सवाल: राजभवन लोक भवन जो है ट्रेडिशनली गवर्नर का रोल जो है एक सेरेमोनियल हेड का रहा है. आपने उसे फंक्शनल हेड और पीपल ओरिएंटेड हेड के रूप में कन्वर्ट कर दिया है. तो इसको आपने कैसे रिीडफाइन किया? कैसे आपको रीशेप किया आपने लोक भवन के रोल को?

जवाब: इसमें भी मैं सही तो आपकी सेवा में कहूं. प्रधानमंत्री जी को मैं एक आदर्श के रूप में देखता हूं. जिस तरह से एक व्यक्ति रात और दिन राष्ट्र के लिए काम करते हैं तो मैं अनुभव करता हूं तेरी कोई राजनीतिक बैकग्राउंड थी नहीं और इन लोगों ने ऐसा पद प्लेटफार्म दिया और मैं लोक भवन में बैठ के आनंद लूं यह कतई मुझे स्वीकार नहीं और जब शपथ हम लेते हैं गवर्नर उसमें एक शपथ में हमसे वचन लिया जाता है कि मैं अपने प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए कार्य करूंगा. कल्याण राजभवन में बैठ के तो हो नहीं सकता लोक भवन में वो तो जनता के बीच में जाएं जो मैं जानता हूं अपना वो उन लोगों तक पहुंचा पाऊं इसी के लिए मैंने यह अभियान लिया है. 

सवाल: प्रधानमंत्री जी कई वर्षों से कोशिश कर रहे हैं. किसान की इनकम को दुगना किया जाए. तो उनका जो पावन यज्ञ है इसमें आपका जो नेचुरल खेती का जो कैंपेन है इसका कितना रोल रहेगा? 

जवाब: प्रधानमंत्री जी ने अपने काल में आकर किसानों के लिए बहुत योजनाएं दी हैं और उससे किसान की स्थिति में बड़ी तेजी से सुधार भी है और अब उनको पूर्ण रूप से ध्यान में आया है कि जो फर्टिलाइजर यूरिया जंतु नाशक इतनी खेतों में डालते हैं जिससे धरती के जहरीली बन गई उसका ऑर्गेनिक कार्बन खत्म हो रहा है. यूरिया डीएपी की खपत हर वर्ष बढ़ रही है. उसका दुष्प्रभाव पर्यावरण पे भी है. लोगों के स्वास्थ्य पर भी है और धरती बंजर हो गई. तो प्रधानमंत्री जी प्राकृतिक खेती को पूरे राष्ट्रव्यापी बनाने के मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं. और उन्होंने पिछले साल प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन बना दिया पूरे राष्ट्र के लिए. उसका एक बजट भी निर्धारित किया है और वह अनेक बार किसानों के बीच में लोगों को प्रेरित करते हैं के भाई आप प्राकृतिक खेती की ओर लौटिए ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ और निरोग रह के जीवन जी सके.

पर्यावरण पानी धरती माता का स्वास्थ्य बच सके. और यह प्राकृतिक खेती एक ऐसा साधन है कि जिसके द्वारा धरती की गुणवत्ता बढ़ती है. और इससे पानी भी बचता है, पर्यावरण भी बचता है और इसमें उत्पादन भी कम नहीं होता. यह जैविक खेती नहीं है. यह जैविक खेती से बिल्कुल अलग कांसेप्ट है. प्राकृतिक खेती, नेचुरल फार्मिंग जो सूक्ष्म जीवाणुओं की खेती है. और यह हम गाय आधारित करते हैं. देसी गाय के 1 ग्राम गोबर में 300 करोड़ से भी ज्यादा बैक्टीरिया हैं. जो धरती की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं. इससे हम जीवामृत घन जीवामृत बनाते हैं. जिनमें इन सूक्ष्म जीवाणुओं को हर 20 मिनट में डबल करने की व्यवस्था है. ये जितना बढ़ेगा केंचुआ अर्थवर्म जितना बढ़ेगा मित्र कीट जितना आएगा वो अपने आप धरती के ऑर्गेनिक कार्बन को बढ़ाएगा. किसान की लागत न के बराबर होगी. उत्पादन कम होने का सवाल ही पैदा नहीं. 

सवाल: तो क्या ये विकल्प हो सकता है पेस्टिसाइड्स का खाद बीज का? 

जवाब: निश्चित रूप से हो सकता है. चंद्रा साहब इस समय गुजरात में 8.5 लाख किसान प्राकृतिक खेती करते हैं. और इस पिछले वर्ष 83000 मीट्रिक टन यूरिया डीएपी की हमने बचत की है. और उस समय की है जब 1 लाख 8000 हेक्टेयर नया रबा खेती का बढ़ा है. मतलब खेती करने की जमीन बढ़ी है. 18800 हेक्टेयर और जबकि 33000 मीट्रिक टन यूरिया डीएपी कम हुआ. क्यों? क्योंकि किसानों में अब प्राकृतिक खेती के प्रति रुचि बढ़ी है और देश के अलग-अलग भागों में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ चुके हैं.

आने वाले समय में प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से और सरकारों के काफी इसमें झुकाव से उनका भी इसमें बड़ा योगदान चल रहा है. उदाहरण के लिए अभी 7 जून को मैं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह जी ने बुलाया और वहां पूरे प्रदेश के किसानों का कार्यक्रम हुआ और आज ही भजन लाल जी शर्मा जो हमारे माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान है इन्होंने एक बहुत बड़ा कार्यक्रम किया तो ऐसे पूरे प्रदेशों में मैं जा रहा हूं और बड़ी रुचि से किसान इस विषय को आगे बढ़ा रहे हैं. 

सवाल: प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि विकसित भारत एक नारा नहीं एक कमिटमेंट है. आप कुछ कहना चाहेंगे? 

जवाब: निश्चित रूप से प्रधानमंत्री जी बहुत दूरगामी सोचते हैं और वो बार-बार कहते हैं भारत की युवा शक्ति पे भारत के लोगों पर हमें पूरा विश्वास है और जिस तरह से वो बहुमुखी विकास की ओर देश को ले जा रहे हैं. ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और पूरे देश में इन 12 साल में जो विकास का स्वरूप बना है तो आने वाले समय में 2047 जो लक्ष्य लिया है और जिस तरह से प्रधानमंत्री जी रात दिन मेहनत करते हैं मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम उस लक्ष्य की ओर जरूर बढ़ेंगे. 

सवाल: गुजरात के राज्यपाल गवर्नर होने के नाते क्या आप इस बात से गौरानित महसूस करते हैं कि गुजरात की धरती का एक गुदड़ी का लाल आज ना केवल प्रधानमंत्री बल्कि ग्लोबल लीडर बन चुका है?

जवाब: भारत का क्या गुजरात का तो एक-एक व्यक्ति आत्म गौरव से भरा हुआ है. जब मैं अपने व्याख्यानों में कोई चर्चा इस तरह की उनकी करता हूं तो लोगों की तालियों की आवाज भिन्न प्रकार की होती है. और गुजरात क्या अब तो पूरा देश और पूरा विश्व इस बात को स्वीकार कर चुका है कि प्रधानमंत्री जी विश्व नेता है और वह सर्वमान्य नेता है. उनके प्रति सारी दुनिया के लोगों में अलग तरह का सम्मान है. उनके कर्म योग पर उनके जीवन पर, उनके चिंतन पर और अपने देश के प्रति, उनके समर्पण पर दुनिया नाज करती है. बड़े-बड़े लीडर विदेशी उनकी प्रशंसा करते हैं. 

सवाल: भारत 24 पे एक प्रोग्राम चलता है चार साल से. अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी. उसमें लोग बताते हैं गुजरात के अपने अनुभव कि वो मेरे घर पे आए. मैं रसोई में सब्जी बना रहा था. मेरे साथ खड़े हो गए. तो आपके जीवन में पिछले सात साल से आप गवर्नर हैं. कोई ऐसा अनुभव है जिससे आप शेयर कर सकें? 

जवाब: अनुभव तो कई बता सकता हूं लेकिन मैं एक बताता हूं. मैं प्राकृतिक खेती मिशन के लिए गांव-गांव में जाता हूं. रात को मैं स्कूल में ही सोता हूं. लोगों के बीच में जनसभा करता हूं. स्वच्छता अभियान चलाता हूं. किसी अनुसूचित जाति जनजाति परिवार में भोजन करता हूं. किसान के खेत में भी काम में सहयोग करता हूं. हल भी चलाता हूं. गाय का दूध भी निकालता हूं. तो एक दिन ऐसे ही कार्यक्रम में मैं भुज में गया हुआ था. और किसानों का जो कार्यक्रम था एक बड़ी जगह थी दूसरी मंजिल पर हॉल था तो उसमें लगभग 5 600 किसान थे. कार्यक्रम संपन्न हुआ तो हम सीढ़ियों से उतरने लगे तो लोगों की भीड़ इतनी थी मेरे साथ कि वो धक्के लग रहे थे और वो सीढ़ी में बात मैं कर रहा था. मेरा एक पैर फिसल के दूसरी पे ना जाके तीसरी चौथी सीढ़ी पे गया और वो मेरे कमर में बड़ा तेज झटका लगा और बड़ा पेन हुआ मेरे को जोर का तो मैं आ गया जैसे तैसे लेकिन पेन इतना ज्यादा था जो बहुत कष्ट दे रहा था और उससे तीसरे दिन आने वाले तीसरे दिन प्रधानमंत्री जी का अहमदाबाद में कार्यक्रम था जिसमें आना था अब मैं जानता हूं प्रोटोकॉल के नाते हमें उनको रिसीव करना पड़ता है. 

साथ जाना होता है. तो मैं बड़ी चिंता में था. प्रधानमंत्री जी तीसरे दिन आ रहे हैं. तेरे को यह दर्द हो गया. इसको ठीक करो. तो मैंने सिकाई विकाई करके कुछ योग के आसन कुछ तरीका अपना के और चलने लायक अपने को बना लिया. और जिस दिन प्रधानमंत्री जी ने आना था तो प्रोटोकॉल में गवर्नर पहले नंबर पर होता फिर सीएम साहब होते. आप आश्चर्य मानेंगे और मैं उस घटना को ऐसा मेरे दिमाग में बैठी प्रधानमंत्री जी नीचे उतरे. मैंने अभिवादन स्वागत किया और एकदम मेरे से पूछा कमर का दर्द कैसा है? मेरे लोक भवन के लोगों ने नहीं पता था मेरे को कोई दिक्कत है. लेकिन उनको पता है कि मेरे कमर में दर्द और संयोग क्या हुआ उस दिन वो सीधा राज लोक भवन आ रहे थे तो उनकी कई बार कृपा होती वो समय बचाते और मेरे को कई बार साथ में बैठा लेते लोक भवन तक एयरपोर्ट से तो मैं साथ में था यह दर्द हो गया. पहले तो यह पूछा फिर रास्ते में चलते उन्होंने मेरे को कहा कि कमर का दर्द दुखदाई होता है. लापरवाही मत करना. इसको अच्छी तरह से संभाल के ठीक करना. तो आप यह देखिए अपने लोगों का इतने बड़े पद का व्यक्ति कितना काम है देश दुनिया का. हम एक आदमी के कमर दर्द की भी चिंता ऐसे आदमी को दिल से कौन ढुलान चाहेगा मेरे सबके साथ उनका व्यवहार है.

सवाल: प्रधानमंत्री ने जो अपील की है कि गैर जरूरी यात्राएं नहीं करनी है. जी उनके अपील को देखते हुए आप 15 तारीख से इस 15 जून से परिवार के साथ एक सप्ताह के लिए छुट्टी पर जाने वाले थे हिमाचल प्रदेश और आपने इसको रद्द कर दिया दौरे को. 

जवाब: प्रधानमंत्री जी ने अपील की. उनकी एक-एक अपील हमारे लिए बहुत बड़ा संदेश होती है. तो उसी दिन मैंने कुछ संकल्प लिए. केवल वही यात्रा नहीं मैंने कैंसिल की. अपितु मैंने संकल्प लिया कि गुजरात में जब तक यह संकट ठीक नहीं होगा तेल वाला मैं हेलीकॉप्टर हवाई जहाज अपना प्रयोग नहीं करूंगा. चार्टर प्लेन चार्टर्ड प्लेन उस दिन के बाद मैंने गुजरात में रहते हुए वह प्रयोग नहीं किया और उसके बाद अब तक मैं ट्रेन से यात्रा ही करता हूं और गांव में जाता हूं तो एसटी बस जो स्टेट ट्रांसपोर्ट है गांव में जो जाती है अभी एक दिन तो मैंने 3 घंटे की 42 डिग्री टेंपरेचर में यात्रा की और इतनी दूर मैं आया हूं तो मेरे को बड़ा मजा आता है हम उसका बहाना लोग मिलते हैं. इतना अपनापन होता है. उनके सुखदख ही जानते हैं. वह हमारे बारे में जानते हैं. और एक ये भेदभाव ये बड़े हैं. ये छोटे हैं. तो उससे लोगों में सरकार के प्रति बहुत सम्मान का भाव होता है कि ये लोग भी हमारे बीच में जाते हैं. 

सवाल: मैंने सुना है कि आप हर हफ्ते में दो दिन गांव में जाते हैं. स्कूल में सोते हैं. गाय का दूध निकालते हैं. किसान के साथ बैठते हैं. तो इतनी सादगी की प्रेरणा कहां से मिलती है आपको? 

जवाब: इसका कारण मैं गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में रहा. मेरे पिताजी ने मेरे को छोटी आयु में गुरुकुल पढ़ने भेजा. उन दिनों वहां बड़ा तपस्वी जीवन जीते थे. धरती में सोते थे. गाय होती उनकी सेवा करते थे. खेती थी उसको भी करने का पूरा मेहनत करते थे. और शिक्षा पढ़ाई भी साथ होती थी. तो वह जीवन का हिस्सा बन गया. तो अब जब मैं यहां आया और प्रधानमंत्री जी जिस तरह से काम करते हैं सरकार ने जैसे देश की दशा बदली है तो मैंने लक्ष्य लिया कि कोई ऐसा करें जिससे मैं लोगों के बीच में सीधा जुड़ूा. उससे पहले बड़े-बड़े सम्मेलन मैंने जिला स्तर पर पूरे गुजरात में किए. लेकिन मैं भाषण दिया और वापस आ गया. लोगों से जैसे आत्मीयता से मिलना था वह नहीं हो पाता था. तो एक दिन मैंने बहुत गंभीरता से विचार किया मैं क्या करूं.

तो यह बैठे-बैठे मैंने संकल्प किया मैं गांव में जाऊंगा. प्रधानमंत्री जी ने एक पेड़ मां के नाम स्वच्छता अभियान ये काम किए तो मैं गांव में लगभग 5:00 बजे जाता हूं. मैं जाके कम से कम एक एकड़ में जो सरकारी भूमि है पंचायती लैंड उसमें पेड़ लगवाता हूं और उस एक पेड़ के साथ उस गांव के एक परिवार को जोड़ता हूं. वह परिवार पेड़ लगाता है और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को भी जोड़ता हूं. तार फेंसिंग करवाता हूं और उस पेड़ की मैं प्रतिमासिक वीडियो मंगाता हूं. मरा तो नहीं है. लोग अक्सर लगा देते हैं. पेड़ मर जाते हैं. लेकिन मैं ऐसा होने नहीं देता. तो एक एकड़ में कम से कम पेड़ लगवाता हूं. उसके बाद झाड़ू लेके गांव की स्वच्छता अभियान करता हूं. लोग साथ में जुड़ते हैं. उसके बाद थोड़ा अंधेरा होता भोजन का समय तो मैं एक अनुसूचित जाति या जनजाति परिवार में जो बिल्कुल गरीब सामान्य उसके घर में उसके परिवार में बैठकर भोजन करता हूं. 

सवाल: विधानसभा का विशेष सत्र हुआ था. उसमें विधायकों से आपने अपील की है कि हर विधायक एक प्राकृतिक गांव को गोद में ले. तो कैसा रिस्पांस है उस कैंप का? 

जवाब: इसमें अभी लोग बढ़े हैं और हमारे बहुत सारे नेता लोगों ने भी जो कृषि थी उनके पास उसमें प्राकृतिक खेती को जोड़ना शुरू किया और यह वातावरण हमारे गुजरात में तो तेजी से आगे बढ़ रहा है. उसमें माननीय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल और हमारे कृषि मंत्री जीतू भाई भगानी उनका बहुत सहयोग इसमें मिलता है और उन्होंने लक्ष्य लिया कि हम इस मिशन को अगले एक साल में अभी हम 8 लाख हैं. अगले साल में 4-5 लाख नए जोड़ेंगे. इतनी गति से हमारे गुजरात में और प्रधानमंत्री जी का इसमें विशेष आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिलता है. 

सवाल: भूपेंद्र पटेल लगभग पिछले पांच वर्षों से मुख्यमंत्री हैं. जिसे कहते हैं कि ग्राउंड पे काम करने वाले साइलेंट परफॉर्मर हैं. आप ओवरऑल एक थर्ड आई के हिसाब से उनके कामकाज को कैसे देखते हैं?

जवाब: हमारे मुख्यमंत्री बहुत सौम्य और बड़े ऑनेस्ट और बड़े कर्मठ हैं. लोगों में उनके प्रति बहुत सम्मान का भाव है और रात दिन प्रदेश को आगे बढ़ाने में माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. और इन दिनों प्रदेश ने बहुत उन्नति की है. विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है. 

सवाल: आपका इंटरेक्शन रहता है गुजरात की हायर ब्यूरोक्रेसी से भी. वहां की ब्यूरोक्रेसी के बारे में क्या सोचना है आपका?

जवाब: वह सब जब ऊपर से लोग सही दिशा देते हैं तो सब ठीक काम करते हैं और हमारे यहां बहुत अच्छा तालमेल है आपस में ब्यूरोक्रेसी का भी. अपने-अपने क्षेत्र में सही दिशा में प्रदेश की उन्नति विकास. 

सवाल: आपको भी ऐसा लगता है गुजरात की ब्यूरोक्रेसी वन ऑफ द बेस्ट ब्यूरोक्रेसी इन द कंट्री. 

जवाब: वहां जो प्रधानमंत्री जी ने अपने मुख्यमंत्री काल में जो एक लाइन दी थी जिस तरह से काम करने की उनकी तरीके थे वो संस्कार वहां के सभी ब्यूरोक्रेट्स में है और उसी का परिणाम है कि वहां बड़े तालमेल से काम चलता है. 

सवाल: अभी कुछ ही महीने पहले नरेंद्र मोदी अमित शाह ने वहां जो होम मिनिस्टर हैं हर्ष संघवी को प्रमोट करके डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाया है. तो गुजरात की युवा पीढ़ी के लिए क्या मैसेज देना चाहते हैं?

जवाब: प्रधानमंत्री जी बहुत दूरगामी सोच के साथ चलते हैं. ऐसे नेता जो युवा हैं हर क्षेत्र में आगे आने वाली पीढ़ियां भी आनी चाहिए. पुराने लोग बूढ़े होकर के बेचारे बिल्कुल अंतिम समय तक रहे तो कार्य पर विपरीत असर पड़ता है क्योंकि शरीर की क्षमता होती है काम करने की तो समय रहते घर का एक पिता भी काम करते अपने पुत्र को समय पे अपने काम से जोड़ लेता है ताकि वह परंपरा गति रुकने ना पाए. तो ऐसे वह दोनों तरह के रास्ते इतने बढ़िया तरह से लेते हैं कि हमारी पुरानी पीढ़ी से युवा पीढ़ी सीखे समय पर सीखे ताकि देश की उन्नति की गति रुकने ना पाए. तो उनकी नियुक्ति जो है वो यंग लीडरशिप को प्रमोट करनी चाहिए. बहुत जगह है हमारे तो आज पूरे देश में सभी क्षेत्रों में उन्होंने ऐसे लोग चुनते हैं जो ज्यादा से ज्यादा काम कर सकें और आने वाली युवा पीढ़ी का भी मार्गदर्शन होता रहे.

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