Zorawar Light Tank:सीमा पर हालात बदल रहे हैं, और भारत अब हर चुनौती का जवाब "अपनी तकनीक" से देगा. पूर्वी लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों तक, अब भारतीय सेना के पास होगा ऐसा हथियार जो हल्का है, तेज़ है, और पूरी तरह देसी है,‘जोरावर लाइट टैंक’.
इस साल सर्दियों में भारतीय सेना को मिलने वाला यह स्वदेशी टैंक न केवल दुश्मन की हर चाल को जवाब देगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी एक नई धार देगा.
क्या है जोरावर की ताकत?
वजन: लगभग 25 टन, जिससे इसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करना आसान होगा
हथियार:
क्यों जरूरी है लाइट टैंक?
2020 में LAC पर चीन के साथ हुए टकराव ने यह साफ कर दिया कि भारी टैंक हर भूगोल में काम नहीं आते. ऊंचाई पर, बर्फ में, और तंग रास्तों में, जरूरत होती है ऐसे टैंक की जो तेज हो, हल्का हो और तुरंत रिएक्शन दे सके. यही काम करेगा ‘जोरावर’.
चीन पहले से ही मीडियम और लाइट टैंकों के साथ LAC पर मौजूद है, ऐसे में भारतीय सेना को जवाब देने के लिए अपने भरोसेमंद, हल्के और ताकतवर हथियार की जरूरत थी, जो अब पूरा होने जा रहा है.
आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
जोरावर और नाग मार्क-2 मिसाइल, दोनों ही पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं. ये न सिर्फ भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि अब देश रक्षा उपकरणों में आयात पर निर्भर नहीं रहेगा. DRDO की यह बड़ी उपलब्धि मेक इन इंडिया के तहत आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की तरफ एक मजबूत कदम है.
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