'जोरावर' की एंट्री से दहलेगा दुश्मन! भारतीय सेना को मिलने जा रहे हैं 350 लाइट टैंक, जानें खासियत

Zorawar Light Tank:सीमा पर हालात बदल रहे हैं, और भारत अब हर चुनौती का जवाब "अपनी तकनीक" से देगा. पूर्वी लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों तक, अब भारतीय सेना के पास होगा ऐसा हथियार जो हल्का है, तेज़ है, और पूरी तरह देसी है,‘जोरावर लाइट टैंक’.

The entry of Joravar will terrify the enemy Indian Army is going to receive 350 light tanks  Bharat 24
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Zorawar Light Tank:सीमा पर हालात बदल रहे हैं, और भारत अब हर चुनौती का जवाब "अपनी तकनीक" से देगा. पूर्वी लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों तक, अब भारतीय सेना के पास होगा ऐसा हथियार जो हल्का है, तेज़ है, और पूरी तरह देसी है,‘जोरावर लाइट टैंक’.

इस साल सर्दियों में भारतीय सेना को मिलने वाला यह स्वदेशी टैंक न केवल दुश्मन की हर चाल को जवाब देगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी एक नई धार देगा.

क्या है जोरावर की ताकत?

वजन: लगभग 25 टन, जिससे इसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करना आसान होगा

हथियार:

  • DRDO द्वारा विकसित नाग मार्क-2 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल
  • टॉप माउंटेड ड्रोन इंटीग्रेशन सिस्टम, जो फील्ड इंटेलिजेंस सीधे कमांडर को देगा
  • मोबिलिटी: कठिन, संकरे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में भी यह टैंक आसानी से पहुंच सकता है
  • ट्रायल: लद्दाख में होने वाले यूजर ट्रायल के बाद बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन शुरू होगा
  • सेना करीब 350 लाइट टैंक खरीदने की योजना बना रही है, यह संख्या बताती है कि जोरावर को लेकर फौज कितनी गंभीर है.

क्यों जरूरी है लाइट टैंक?

2020 में LAC पर चीन के साथ हुए टकराव ने यह साफ कर दिया कि भारी टैंक हर भूगोल में काम नहीं आते. ऊंचाई पर, बर्फ में, और तंग रास्तों में, जरूरत होती है ऐसे टैंक की जो तेज हो, हल्का हो और तुरंत रिएक्शन दे सके. यही काम करेगा ‘जोरावर’.

चीन पहले से ही मीडियम और लाइट टैंकों के साथ LAC पर मौजूद है, ऐसे में भारतीय सेना को जवाब देने के लिए अपने भरोसेमंद, हल्के और ताकतवर हथियार की जरूरत थी, जो अब पूरा होने जा रहा है.

आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

जोरावर और नाग मार्क-2 मिसाइल, दोनों ही पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं. ये न सिर्फ भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि अब देश रक्षा उपकरणों में आयात पर निर्भर नहीं रहेगा. DRDO की यह बड़ी उपलब्धि मेक इन इंडिया के तहत आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की तरफ एक मजबूत कदम है.

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