भारत-पाक के बीच फिर बढ़ेगा तनाव! अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान ने मचाई हलचल, जानें क्या है मामला

Marco Rubio On Ind Pak: दक्षिण एशिया में तनाव का हर उतार-चढ़ाव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को भी हिला देता है. यही कारण है कि अमेरिका लगातार भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नज़र बनाए हुए है.

Tension increase between India and Pakistan US Foreign Minister Rubio statement created a stir
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Marco Rubio On Ind Pak: दक्षिण एशिया में तनाव का हर उतार-चढ़ाव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को भी हिला देता है. यही कारण है कि अमेरिका लगातार भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नज़र बनाए हुए है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को साफ कहा कि सीजफायर बनाए रखना आसान नहीं है और वॉशिंगटन “हर रोज़” यह मॉनिटर कर रहा है कि सीमा पर क्या हो रहा है.

उनका यह बयान उस वक्त आया है जब पाकिस्तान के नेता अक्सर भारत को लेकर भड़काऊ बयानबाज़ी कर रहे हैं, युद्ध की धमकी देना, मिसाइल चलाने की बात करना और हालात को भड़काने की कोशिश करना. अमेरिका को भलीभांति पता है कि अगर हालात बिगड़े तो इसका असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर भी गहरा पड़ेगा.

रूस-यूक्रेन पर रूबियो की राय

भारत-पाकिस्तान का ज़िक्र करने के साथ ही रूबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी अपना पक्ष रखा. उनका कहना था कि दुनिया में स्थायी शांति तब तक संभव नहीं जब तक व्लादिमीर पुतिन से सीधे संवाद नहीं किया जाता. पुतिन के पास दुनिया का सबसे बड़ा टैक्टिकल और दूसरा सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर आर्सेनल है.

यह सोचना कि उनसे बातचीत करने से उनकी अहमियत बढ़ेगी, बेमानी है, क्योंकि वे पहले से ही विश्व राजनीति के केंद्र में हैं. अगर रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है तो बिना पुतिन से समझौता किए यह मुमकिन नहीं. रूबियो के मुताबिक, यह महज़ कूटनीतिक चाल नहीं बल्कि “कॉमन सेंस” है.

भारत-पाक पर चौकस निगरानी

रूबियो के बयान से साफ है कि भले ही अमेरिका रूस-यूक्रेन मुद्दे पर ज्यादा सक्रिय दिखता हो, लेकिन भारत-पाकिस्तान पर भी उसकी नज़र लगातार बनी हुई है. दोनों देशों की परमाणु क्षमता दक्षिण एशिया को संवेदनशील ज़ोन बनाती है. अमेरिका नहीं चाहता कि कश्मीर या एलओसी की स्थिति किसी बड़े टकराव में बदल जाए. यही वजह है कि वॉशिंगटन रोज़ाना सीमा पर हालात की निगरानी कर रहा है.

बैकड्रॉप में बड़ी डील?

दिलचस्प बात यह है कि ठीक इसी दौरान 15 अगस्त को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तीन घंटे लंबी बैठक हुई. पहले दोनों नेताओं के बीच वन-ऑन-वन चर्चा हुई. फिर विदेश मंत्रियों और शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ थ्री-ऑन-थ्री मीटिंग. ट्रंप के साथ विदेश मंत्री मार्को रूबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ थे, जबकि पुतिन के साथ यूरी उशाकोव और सर्गेई लावरोव मौजूद थे. इस मुलाकात को रूस-यूक्रेन संकट और वैश्विक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

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